URDU ADAB

URDU ADAB Koi Apna Nahi Apne Siwa.......
Dusra, Dusra Hi Hota Hai.........

28/04/2022

....
लाख तलवारें बढ़ी आती हों गर्दन की तरफ़
सर झुकाना नहीं आता तो झुकाएँ कैसे
~वसीम बरेलवी

28/04/2022

अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे,
तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे,
कोई अपनी ही नज़र से तो हमें देखेगा,
एक क़तरे को समंदर नज़र आएँ कैसे...

27/04/2022

मुहब्बत से, इनायत से, वफ़ा से चोट लगती है !
बिखरता फ़ूल हू मुझ को हवा से चोट लगती है !

मेरी आँखो मे आँसू की तरह इक रात आ जाओ !
तक्ल्लुफ़ से, बनावट से, अदा से चोट लगती है !

मे शबनम की ज़ुबाँ से फ़ूल की आवाज सुनता हू !
अजब अहसास है अपनी सदा से चोट लगती है !

तुझे खुद अपनी मजबूरी का अन्दाजा नही शायद !
ना कर अहदे-वफ़ा, अहदे-वफ़ा से चोट लगती है !

07/01/2022

Tumko jahan-e-shauk-o-tamanna me kya mila?
Hum bhi mile to darham-o-barham mile tumhe...

~John Elia

26/10/2021

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं,
तो उस के शहेर में कुछ दिन, ठहेर के देखते हैं

सुना है रब्त है उसको खराब हालों से
सो अपने आप को बर्बाद कर के देखते हैं

सुना है दर्द की गाहक है चश्म-ए-नाज़ उस की
सो हम भी उस की गली से गुज़र के देखते हैं

सुना है उस को भी है शेर-ओ-शायरी से शुग़फ़
तो हम भी मुआ'जज़े अपने हुनर के देखते हैं

सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते हैं
यह बात है तो चलो बात कर के देखते हैं

सुना है रात उसे चाँद तकता रहता है
सितारे बाम-ए-फलक से उतार के देखते हैं

सुना है दिन को उसे तितलियाँ सताती हैं
सुना है रात को जुगनू ठहेर के देखते हैं

सुना है हश्र हैं उस की ग़ज़ाल सी आँखें
सुना है उसको हिरन दश्त भर के देखते हैं

सुना है रात से बढ़ कर हैं काकुलें उस की
सुना है शाम को साये गुज़र के देखते हैं

सुना है उसकी सियाह चश्म'गी क़यामत है
सो उसको सूरमा फ़रोश आह भर के देखते हैं

सुना है उसके लबों से गुलाब जलते हैं
सो हम बहार पे इल्ज़ाम धर के देखते हैं

सुना है आईना-तिमसाअल है जबीन उसकी
जो सादा दिल हैं, उसे बन संवर के देखते हैं

बस इक निगाह से लूट्ट'ता है क़ाफला दिल का
सो राह-रवाँ-ए-तमन्ना भी दर के देखते हैं

सुना है उस के शाबिस्तान से मुत्तसिल है बहिस्त
मकीन उधर के भी जलवे इधर के देखते हैं

रुके तो गर्दिशें उस का तवाफ़ करती हैं
चले तो उसको ज़माने ठहेर के देखते हैं

कहानियाँ ही सही, सब मुबालगे ही सही,
अगर वो ख्वाब है तो ताबीर कर के देखते हैं

अब उस के शहर में ठहरें, के कूच कर जाएँ,
'फ़राज़' आओ सितारे सफ़र के देखते हैं.

Address

Dammam

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when URDU ADAB posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Establishment

Send a message to URDU ADAB:

Share