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Vimarsh विमर्श एकटा वैचारिक उपक्रम अछि, मिथिला-मैथिलीक विविध आयामक। भाषा, संस्कृति, लोक आ समाजक।

विमर्श एकटा वैचारिक उपक्रम अछि, मिथिला-मैथिलीक विविध आयामक। भाषा, संस्कृति, लोक आ समाजक। समृद्ध मिथिलाक परिकल्पना मे एक दीप चेतनाक।

अपन जीवन, चिंतन, अचार-विचार आ व्यवहार मे सदिखन मैथिलीक साहित्यिक, सामाजिक आ सांस्कृतिक अनुशीलन केँ आत्मसात कएनिहार, मिथि...
28/10/2025

अपन जीवन, चिंतन, अचार-विचार आ व्यवहार मे सदिखन मैथिलीक साहित्यिक, सामाजिक आ सांस्कृतिक अनुशीलन केँ आत्मसात कएनिहार, मिथिलाक माटि-पानि आ ग्राम्य जीवनक विशिष्टता केँ अपन सृजनकर्म सँ रेखांकित कएनिहार, मिथिलाक विधि-व्यवहार, लोक-वेद, पाबनि-तिहार आदिक लोकसंदर्भित व्याख्याक वरेण्य, त्रिभुवन विश्वविद्यालयक मैथिलीक केंद्रीय विभागक पूर्व-विभागाध्यक्ष, मैथिलीक बहुविधावादी वरिष्ठ साहित्यकार परमेश्वर कापड़ि सर केँ हुनक जन्मदिवस पर आत्मीय मङ्गलकामना।

•|• गुरुदेव कामत : पुण्यतिथि पर सादर स्मरण गुरुदेव कामत। जेहने विरल प्रतिभा तेहने सहज व्यक्तित्व। मातृभाषाक प्रति अपनत्व...
01/08/2025

•|• गुरुदेव कामत : पुण्यतिथि पर सादर स्मरण

गुरुदेव कामत। जेहने विरल प्रतिभा तेहने सहज व्यक्तित्व। मातृभाषाक प्रति अपनत्व आ समर्पणक एकटा एहन अप्रतिम प्रतिमूर्ति जिनका प्रति स्नेह आ श्रद्धा सँ सहजहि समस्त मिथिला नतमस्तक होइत अछि।

मैथिली गीत-संगीतक एकटा एहन विराट व्यक्तित्व जिनक उपस्थिति सँ मैथिली संगीतक निजता आ विशिष्टता परिभाषित होइत रहल अछि। अपन साधना आ स्वर सँ मैथिली गीत-संगीतक जे ओ प्रतिमान गढ़लनि अछि से आगत पीढ़ीक हेतु एकटा आदर्श अछि आ मार्गदर्शक सेहो। सुचिता आ निजताक एहन लोकग्राह्य समागम अन्यत्र भेटब दुर्लभ अछि।

गुरुदेव कामत केँ सुनब एहि गौरवबोध केँ आत्मसात करब अछि जे एहन प्रवीण आ माधुर्य सँ भरल स्वरक स्वामी हमर सभक अपन माटिक लोक छथि। अपन मातृभाषाक लोक छथि। लोक कंठ मे बसल मैथिली गीतक दिकपाल छथि। मैथिलीक अजस्रताक संवाहक मैथिल पूत छथि। मैथिलीक गुदरी आँचरक मणि-माणिक्य छथि।

कहियो जॉर्ज गियर्सन विद्यापतिक संदर्भ मे लिखने रहथि जे जहिया धरि कमला आ कोशि मे पानि रहत विद्यापतिक महेशवाणी एहि समाज मे जिबैत रहत से तहिना आइ ई कहब कोनो अतिशयोक्ति नहि होएत जे जहिया धरि मैथिलीक गीत-संगीत रहत तहिया धरि गुरुदेव कामत एकर अन्यतम ध्वजवाहक बनल रहताह।

ई दिप तँ मिझाएल अछि सिरहाक पोखरभिण्डा गाम मे मुदा आइ अन्हार सगर मिथिला अछि। एकटा एहन अन्हार जकर नैपथ्य मे ठाढ़ कोटि-कोटि मैथिलक आँखि नोराएल अछि आ कम्पित ठोर सँ निकसैत अछि गीत ! कहाँ गेलै सुरमा सलहेस ! एहि अन्हार सँ भोरक बाट देखबैत आब केँ उठाओत मिथिला केँ ? आब तेना क' केँ गाओत "उठू यौ मैथिल भेलै भोर" ...

मैथिली विकास कोषक अध्यक्ष, मैथिलीक अजस्रताक हेतु समर्पित व्यक्तित्व, कला, साहित्य आ सांस्कृतिक चेतनाक सजग डलिबाह आदरणीय ...
18/07/2025

मैथिली विकास कोषक अध्यक्ष, मैथिलीक अजस्रताक हेतु समर्पित व्यक्तित्व, कला, साहित्य आ सांस्कृतिक चेतनाक सजग डलिबाह आदरणीय श्री जीवनाथ चौधरी जीक जन्मदिवस पर विमर्श परिवार दिस सँ आत्मीय शुभकामना।

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