17/05/2026
⭕️ दिन के लिफ़ाफ़ों में वादे ही वादे हैं…
दिन के लिफ़ाफ़ों में वादे ही वादे हैं,
रातों की राहों में बदले इरादे हैं.
ऐसा ये दौर है तूफ़ाँ हर ओर है,
रुकना है मुश्किल है खोया हर ठौर है.
फिर भी कुछ लोग यहाँ भरते उजाले हैं,
टूट रहे सपनों के अब वही रखवाले हैं.
सो चलना है साथी हमको चलते ही जाना है.
जीवन की राहों पर कुछ कर के गुज़रना है.
मंज़िल की चाहत है और उसको भी पाना है,
गिरने से डर कैसा जब गिर कर उठ जाना है.
राहों में पत्थर हों तो उनसे भी सीखेंगे,
आँधियों में जलते दीये बन कर हम दीखेंगे.
कल इन अँधेरों से नए सूरज निकलेंगे,
सूखे हर आँगन में फूल फिर महकेंगे.
हिम्मत की मिट्टी से ही सपनों को गढ़ना है,
जीवन की धारा में बस बहते ही जाना है.
— नैमिष
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#नैमिष #सफ़र_से_गुफ्तगू