31/10/2014
PLEASE READ THE STORY OF OUR SHORT FILM BASED ON LOVE - JIHAD IN PARTS
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शहर मेरठ की एक पॉश कॉलोनी में एक p .g .{गर्ल्स} में रहने वाली बी. एस सी प्रथम वर्ष की छात्रा गरिमा त्यागी एक साधारण नैन- नक़्श वाली सुन्दर लड़की थी, आँखों में भविष्य के सुनहरे सपने लिए यौवन के अट्ठारवे वर्ष में प्रवेश कर रही थी.
किसी आम दिन की तरह आज भी वह सही सात बजे बस स्टॉप पर पहुंच गई और अपनी सहेली आलिया का इंतज़ार करने लगी. दोनों शहर के एक प्रतिष्ठित कालेज में साथ-साथ पढ़ती थी.
तभी किसी ने उसकी कमर पर चपत लगाई, गरिमा ने पलट कर देखा तो आलिया थी.
गरिमा गुस्से से — “आ गई तू !”……..
“साली रोज देर करती है , तेरे चक्कर में एक बस तो निकल गई.”
आलिया — “{ झेंपते हुए } सोरी यार!, मेरे सैंडिल नहीं मिल पा रहे थे,उन्हें ढूंढने में देर हो गई.”
गरिमा –” चल – चल, रहने दे, ये तेरे रोज के ड्रामे है.”
तभी बस आ जाती है दोनों बस में चढ़ जाती है, करीब पंद्रह मिनिट सफर के बाद दोनों बच्चा पार्क उत्तर जाती है और पैदल ही कालिज की तरफ बढ़ती है. सुबह होने की वजह से अभी सड़क पर ज्यादा ट्रैफिक नहीं है.
कुछ दूर चलने के बाद वो सड़क क्रॉस करके बाई तरफ विजय नगर की तरफ बढ़ गई और अपनी मंज़िल यानि करियर कोचिंग के सामने पहुंच गई.
अभी दोनों पहली मंज़िल की तरफ जाने वाली सीढ़ियों की तरफ बढ़ ही रही थी की पीछे से एक बाइक उनके करीब आ कर रुकी. बाइक सवार एक पतले छरहरे बदन का कोई युवक था उसने हेलमेट पहन रखी थी.
आलिया ने मुड़कर देखा और युवक को पहचानते हुए मुस्कराई.
आलिया – “अस्सलाम अलैकुम भाईजान.”
युवक -” वालेकुम अस्सलाम, कैसी हो आलिया !
आलिया – ” हम तो ठीक ही होंगे नबील भाई, आप सुनाओ मॉडलिंग कैसी चल रही है आपकी?
नबील – बाइक से उतरते हुए” जस्ट गोइंग इजी,” हेलमेट को बाइक की सीट पर रखता है और एक भरपूर नज़र गरिमा पर डालता है.
आलिया – “ओह, बाय द वे, मीट माय फ्रेंड गरिमा,” { गरिमा की तरफ इशारा करते हुए}
नबील – गरिमा की तरफ हाथ बढ़ाते हुए ” हेलो, नबील खान ”
गरिमा – इस अप्रत्याशित वाकये से हतप्रभ असमंजस की स्थिति में अपना हाथ आगे बढ़ती है.
नबीन ने हाथ मिलाते वक़्त महसूस किया कि गरिमा की कोमल हथेली उसके हाथ में काँप रही थी, गरिमा की आँखों में झांकते हुए “इटस नाइस टू मीट यू ” गरिमा ने उत्तर में कुछ नहीं कहा.
आलिया – “वैसे आप जा कहाँ रहे थे.”
नबील – “वर्कआउट करके आ रहा था.”
आलिया – ” डैशिंग लग रहे हो भाईजान.”
नबील – “एक ऐड मैग्ज़ीन की ओडिशन है मंडे, अल्लाह से दुआ करो.”
आलिया – ख़ुशी से चहकते हुए ” अल्लाह करे आप कामयाब हो.”
गरिमा – ” आलिया, आई ऍम गोइंग.”
आलिया – “अरे, रुक ना, मै भी चलती हूँ.” और फिर नबील की तरफ देखते हुए ” फिर मिलते है अभी क्लास के लिए देर हो रही है.”
नबील – ” ओके , नो प्रोब,” और दोनों को जाते हुए देखता है, फिर होठो को एक गोलाई की शक्ल देकर सीटी बजाता है, बाइक स्टार्ट की और तेजी से ओझल हो जाता है.
नबील से हाथ मिलाते वक़्त एक अजीब सी कैफियत अभी तक गरिमा को अपनी हथेली में महसूस हो रही थी, आँखों के सामने नबील की सूरत किसी चलचित्र की भांति तैर रही थी. कुछ ऐसा था बन्दे में कि चाहते हुए भी वह खुद को उसकी गिरफ्त से हटा नहीं पा रही थी. सामने ब्लैक बोर्ड पर कैमिस्ट्री के सूत्रों से नबील झाँक रहा था. गरिमा – “ओह, शिट!.” { खुद से बुदबुदाई } बगल में बैठी युक्ता ने गरिमा कि तरफ देखा.
युक्ता – ” कुछ कहा तूने अभी?.”
गरिमा – “ए,..हा, नहीं, कुछ नहीं कहा.”{ फिर युक्ता कि तरफ मुस्कराते हुए कहा}” यूँ ही कुछ सोच रही थी.” और लेक्चर पर ध्यान देने कि कोशिश करने लगी. इसी उहा – पोह में दो घंटे का समय गुजर गया, गरिमा जान ही न पाई कि कब क्लास ख़त्म हो गई. तभी आलिया गरिमा कि तरफ बड़ी
आलिया – “हेलो, कहाँ खो गई,” आलिया ने गरिमा के चेहरे के आगे हाथ हिलाते हुए कहा.गरिमा जैसे नींद से जागी, क्लास में कोई नहीं था.
आलिया – ” सो गई थी क्या!”
गरिमा – बुक समेटते हुए उठ खड़ी हुई.” यूँ ही कुछ सोचने लगी थी.”
आलिया – ” क्या सोच रही थी,” फिर चिकोटी काटते हुए ” कही नबील भाई के बारे में तो नहीं……….”
गरिमा – “माय फुट, व्हाई शुड आई थिंक ऑफ़ हिम.
आलिया – “अरे चल सोच भी लिया तो क्या, पर्सनालिटी तो फाडू है बन्दे क़ी.”
गरिमा – “तो!,….{सवालिया निगाहों से देखते हुए}” लड़ा न इश्क़.”
आलिया – “हाय,…………{ एक ठंडी आह भरते हुए} एक हाथ सीने पर रखते हुए ” काश! कि ऐसा होता, वह मुझे बहन मानता है दूर के रिश्ते से.”
दोनों क्लास-रूम से बाहर निकले और गलियारे से होते हुए नीचे जाने वाली सीढ़ियों कि तरफ बढ़ने लगे. तभी गरिमा की एक फ्रेंड ने दोनों को हाय, कैसी हो गरिमा” कह कर सम्बोधित किया और जवाब में गरिमा ने ” फाइन, थैंक्यू,” कहा.
दोनों नीचे आगयी और सड़क पार करके आर, जी के गेट की तरफ बढ़ गई.
आलिया – “अरे, अभी कालिज में क्या करेगी, दस ही तो बजे है अभी.” अपने मोबाइल में टाइम देखते हुए.
आलिया – “आ, चल आर्चीज़ चलते है, मुझे ना कुछ गिफ्ट खरीदनी है.”
गरिमा – “नहीं यार, तू जा, मै कैंटीन में जाकर बैठती हूँ वही आ जाना.”
आलिया चौक की तरफ चल दी. इसी बीच उसने अपने मोबाइल से एक नंबर मिलाया
आलिया – “हेलो,नबील.
नबील – दूसरी तरफ से ” हां, बोलो आलिया. व्हाट्स द न्यूज़!
आलिया – ” नबील, लगता है पहली ही नज़र में जादू चल गया, बेचारी !,,,,,,सुबह ही से अपसेट है.
नबील – “इसका क्रेडिट तो तुम्हे जाता है, माय स्वीट डॉल.” थैंक्स आलिया.
आलिया – सिर्फ थैंक्स!
नबील – “आ जाओ शाम को, तुम्हारा गिफ्ट इंतज़ार कर रहा है.” एंड विल डिस्कस द प्लान.
आलिया – ओके, बाई. इसके बाद आलिया वापिस कॉलिज की तरफ बढ़ गई.
TO BE CONTINUED................................
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