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11/06/2025

रेलवे ने तत्काल टिकट बुकिंग के लिए कुछ जरूरी बदलाव किए हैं। जिसमें मुख्य रूप से रेलवे ने आधार को आईआरसीटीसी के खाते से लिंक करने के लिए कहा है। पहले 10 मिनट उन्हीं के टिकट बुक होंगे जिनके खाते आधार से लिंक होंगे। इसके साथ ही और बहुत सारे नियम बदले गए हैं। जैसे कि ओटीपी वेरिफिकेशन वगैरह-वगैरह। मुझे लगता है कि ई सब से कुछ होना जाना है नहीं। इसका उल्टा प्रभाव भी पड़ सकता है। जिसके पास ये सारी सुविधा नहीं है। उसे टिकट लेने में और दिक्कत हो सकती है।
आपने कहा था की 5 साल में हम हर यात्री को कंफर्म टिकट देंगे। आप जब कंफर्म टिकट नहीं दे पाए तो नए तरह के हथकंडे ले आए। मार्केट का अच्छा फंडा क्या है। डिमांड और सप्लाइ बराबर कर दीजिए। जितना टिकट चाहिए उतना टिकट अवेलेबल होगा। तो कोई मुनाफाखोरी का काम होगा ही नहीं। मुझे लगता है कि जो लोग टिकट ब्लैक में खरीदते हैं। वे मजबूरी में ही खरीदते हैं। हम यह भी मानते हैं कि ब्लैक में टिकट खरीदना और बेचना दोनों गैर कानूनी है। दोनों का धर पकड़ होना चाहिए ।आखिर टिकट जब मिल नहीं रहा तो कोई क्या करेगा? सबसे बेस्ट क्या है कि आप सभी को टिकट उपलब्ध करा दीजिए।
इसका उदाहरण ऐसे समझिए। कुछ दिन पहले रेलवे ने क्या किया था कि प्लेटफार्म टिकट को दोगुना देखना चार्ज कर दिया। कहीं कही तो ₹50 प्लेटफार्म चार्ज कर दिया गया थे। स्टेशन मास्टर को पावर दे दिया था कि जिस पर जितना मन है भीड़ के टाइम उतना चार्ज कर दो।
कुछ लोग खुश हो गए कि अब प्लेटफार्म में भीड़ नहीं होगी। भरी जनदबाव में वापस लेना पड़ा। अभी रेलवे में एक नियम लागू है कि आपके पास एसी का टिकट है तो वेटिंग हॉल में जाइए ₹10 पर आवर का टिकट कटाईये और आराम से एसी में बैठिए। बड़े-बड़े स्टेशन है वहां पर आपको इसके बावजूद भी वेटिंग हॉल में बैठने के लिए सीट नहीं मिलेगा। बिल्कुल मारामारी है। वहां भी अफरातफरी मची है। दिल्ली के किसी भी स्टेशन में चले जाइए। वेटिंग लाउंज जो बना हुआ है आपको बैठने का जगह नहीं मिलेगा। लोग भरे पड़े हैं। भाई साहब पैसा देने के बाद भी आप उस लाउंज में घुस नहीं पाएंगे।
आपको याद होगा आज से तकरीबन पन्द्रह बीस साल पहले को बात होगी। गैस कनेक्शन आसानी से नहीं मिलता था। उस समय जिनके घर में गैस कनेक्शन होता था। वे भी एक्स्ट्रा कनेक्शन लेकर रखते थे। बेटी की शादी में देने काकाम आएगा। बेटा का शादी करेंगे तो काम आएगा। क्योंकि तब सबके लिए सर्वशुलम नहीं था। जब सर्व सुलभ हो गया तो गैस कनेक्शन में अब किसी को कोई दिक्कत नहीं है। आराम से ले रहे हैं। कोई धोखेबाजी नहीं हो रही है। पहले कितना ब्लैक मार्केट होता था गैस का।
इसी तरह से मुझे याद है कि बीएसएनएल सिम के लिए खूब मारामारी होता था। उस टाइम उपलब्ध नहीं हो पता था तो लोग सोर्स लगाते थे। जुगाड़ लगाते थे। किसी भी तरह से सिम मिल जाए। अब सभी के लिए अवेलेबल है। तो कहीं कोई दिक्कत नहीं है। जितना डिमांड है उतना सप्लाई कर दीजिए। फालतू के चोंचले बाजी नहीं करना पड़ेगा।
सिंपल सी बात है। आपसे मैनेज नहीं हो पा रहा है। बुजुर्ग है जो गांव में रहते हैं आप जबरदस्ती मोबाइल पकड़ना पड़ेगा। कोई मतलब है।कुछ लोग इसे बहुत बड़ा क्रांतिकारी कदम बता रहे हैं। मैं मानता हूं कि ये सब कुछ क्रांति फ्रंटी नहीं होने वाला है। सब आंख में धूल झोंकने का काम हो रहा है।
गालिब चचा का एक शेर याद आ गया।
उम्र भर ग़ालिब यही भूल करता रहा,
धूल चेहरे पे थी आइना साफ़ करता रहा।

डॉक्टर मनमोहन सिंह को विनम्र श्रद्धांजलि
27/12/2024

डॉक्टर मनमोहन सिंह को विनम्र श्रद्धांजलि

जमाना कर न सका उसके कद का अंदाजा, वो आसमान था मगर झुककर चलता था .ये बातें बिलकुल सटीक बैठती हैं. देश के भूतपूर्व महरूम प...
27/12/2024

जमाना कर न सका उसके कद का अंदाजा, वो आसमान था मगर झुककर चलता था .
ये बातें बिलकुल सटीक बैठती हैं. देश के भूतपूर्व महरूम प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर, वरिष्ठ पत्रकार पंकज पचौरी लिखते हैं कि “ मैं मनमोहन सिंह से मिलने उनके सरकारी आवास 7 रेसकोर्स रोड पंहुचा . बातचीत के शुरुआत में उन्होंने कहा “ मैं इस बड़ी कुर्सी (पीएम) के लिए बहुत छोटा आदमी हूँ. करीब 28 महीने उनके साथ काम करने के दौरान मैंने उनके बारे में जैसा सुना था, वैसा ही पाया- सादगी , सौम्यता और इमानदार.
डॉक्टर मनमोहन सिंह की सादगी की पूरी दुनिया कायल थी. टोरंटो में 2010 में जी 20 शिखर सम्मेलन के दौरान तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था- मनमोहन ने न केवल भारत, बल्कि दुनिया को बेहतरीन लीडरशिप दी है . वे भारत को वर्ल्ड पॉवर के रूप में आगे ले जा रहे हैं, उन्होंने आगे कहा कि जब डॉक्टर मनमोहन सिंह बोलते हैं और खासकर आर्थिक मुद्दों पर तो पूरी दुनिया उन्हें सुनती है.
मनमोहन सिंह पाकिस्तान से विस्थापित होकर हल्दवानी आए थे . बचपन में माँ का निधन हो गया . उन्हें दादा दादी ने पाला था. डॉक्टर साहब की शुरुआती पढाई उर्दू में हुई थी. जब वे प्रधानमंत्री बने तब भी स्पीच की स्क्रिप्ट उर्दू में ही लिखते थे . कई बार तो गुरुमुखी में भी लिखी होती थी.

दैनिक भास्कर के अनुसार 1948 में मनमोहन सिंह ने मेट्रिक पास की. कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड से अर्थशास्त्र की पढाई की. करियर की शुरुआत पंजाब विश्वविद्यालय और दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में शिक्षक के रूप में की . वर्ष 1971 में वाणिज्य मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार बने. 1972 में वित्त मंत्रालय के मुख्या आर्थिक सलाहकार बने. 1985 से 1987 योजना आयोग के प्रमुख और 1982 से 1985 तक रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे. पीवी नरसिम्हा राव ने 1991 में वित्त मंत्री बनाया . बाद में प्रधानमंत्री बने जो आप सभी को पता ही है.
डॉक्टर मनमोहन ने अपने कार्यकाल के दौरान ऐतिहासिक काम किये जिसकी मुरीद पूरी दुनिया हुई.
शिक्षा का अधिकार, सुचना का अधिकार, रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), पहचान के लिए आधार कार्ड , अमेरिका से न्यूक्लियर डील, भूमि अधिग्रहण कानून और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा .
2013 में राजनीति में अपराधियों की एंट्री रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया. मनमोहन सरकार फैसला पलटने के लिए अध्यादेश लाने वाली थी. लेकिन राहुल गाँधी ने अध्यादेश की प्रति ‘कम्प्लीट नॉनसेंस’ करार देते हुए फाड़ दी थी . जिससे मनमोहन सिंह काफी व्यथित हुए .
03 जनवरी 2014 को मनमोहन सिंह ने कहा था “मुझे उम्मीद है कि इतिहास मेरा मूल्यांकन करते समय ज्यादा उदार होगा.
एक रोचक घटना 1991 में हुई . जब बतौर वित्तमंत्री मनमोहन सिंह के बजट की तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष अटल बिहारी वाजपेयी ने जमकर आलोचना की . वाजपेई की आलोचना से आहत मनमोहन इस्तीफे की सोचने लगे . फिर वाजपेयी ने उनसे मुलाकात की और समझाया तो पद छोड़ने का फैसला वापस लिया .
लोकसभा में एक बहस के दौरान मनमोहन सिंह ने मिर्जा ग़ालिब का मशहूर शेर पढ़ा था. “हम को उनसे वफ़ा की है उम्मीद ,जो नहीं जानते वफ़ा क्या है”.
कांग्रेस के सभी छोटे बड़े नेताओं ने गहरी संवेदना व्यक्त की है. राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी ने उन्हें याद किया. केंद्रीय केबिनेट ने एक बैठक की और मनमोहनसिंह के योगदान को याद किया और एक शोक प्रस्ताव भी पास किया गया .
आम आदमी पार्टी ने मनमोहन सिंह के लिए भारत रत्न की मांग की है.
पीएम मोदी ने एक विडिओ सन्देश के माध्यम से डॉक्टर मनमोहन के साथ अपने संबंधो को याद करते हुए कहा, पूर्व पीएम डॉक्टर मनमोहन सिंह के निधन ने हम सभी को ह्रदय को गहरी पीड़ा पहुचाई है. उनका जाना एक राष्ट्र के रूप में भी हमारे लिए बहुत बड़ी क्षति है. विभाजन के उस दौर में बहुत कुछ खोकर भारत आना और यहाँ जीवन के हर क्षेत्र में उपलब्धियां हासिल करना ए सामान्य बात नही है. अभावों और संघर्षों से ऊपर उठकर कैसे ऊँचाइयों को हासिल किया जा सकता है.

26/04/2024

मुझे लगता है कांग्रेस ने एक सेपरेट घोषणा पत्र छाप कर मोदी जी, शाह जी, और अन्य बीजेपी के स्टार प्रचारकों के घर भिजवा दिया है😂😂😂 ऐसा नहीं करना चाहिए था... बहुत गलत हुआ ... खा मखा मैनिफेस्टो के चक्कर में ये लोग अनाप शनाप बोल कर देश की भी बेइज्जती करवाए जा रहे हैं....

22/01/2024

किसी भी मुसलमान को राम, राम के व्यक्तित्व और उनके मंदिर से कभी कोई मतभेद या मनभेद नहीं था न है और न रहेगा।

लेकिन यह अब तथ्य है की
बाबरी मस्जिद कोई भी मंदिर तोड़ कर नहीं बनाया गया था,
उसे तोड़ने वाले अपराधी थे(हैं), और
राम जी मूर्ति चुपके से रखी गई थी जो एक अपराधिक घटना थी।
जबकि
मस्जिद को ढहा कर मर्यादा पुरुषोत्तम राम का मंदिर बनाया गया यह अब दुनियां जानती है... सरकारी अतिक्रमण किसने किया यह भी अब स्थापित सत्य है। धैर्य और इंसाफ के उत्तम उदाहरण पेश कर ईश्वर के दर्जे तक पहुंचने वाले के लिए यह अन्याय कितना पसंद आया होगा यह भी एक पहलू हमेशा चर्चा का विषय रहेगा।

इस सब के बावजूद विश्व की सबसे महंगी मंदिर बनाई गई... इस विवादित और लंबे सफर में छल है, प्रपंच है, खूंरेजी है, अतिरेक है, फिर भी इस दिन को ऐसे पेश किया गया जैसे राम जी लंका जीत कर लौटे हों।

क्या अनपढ़, क्या कुपढ़ सब के सब एक व्यक्ति विशेष के अहवाह्न पर एक उत्सव मनाने में लगे हैं... कोई पटाखे तो कोई दीप जला रहा है... हालांकि यह सब रोज भी हो तो मुझे व्यक्तिगत तौर से कोई परेशानी नहीं है बल्कि खुशी होगी के लोग चरम बेरोजगारी में भी खुश तो हैं... पर दिखावा से किसे खुशी होगी और कितने देर की खुशी होगी? यह चिंता की बात है...

बकौल सनातन के सर्वश्रेष्ठ सेवादार, ज्ञानाचार्य शंकराचार्य यह घड़ी ऐसी है जिसमे राम को समर्पित होता हुआ दिखा रहा सब ऊर्जा, वास्तव में असुरों की तरफ चला जा रहा है और असुरी शक्तियां क्या करेंगी यह भला कौन नहीं जानता...

राजनीतज्ञों द्वारा जिस उद्देश्य से यह दिन बनाया गया जनता का उत्साह देख कर हिंदुत्व की राजनीति करने वाले राजनीतिज्ञ गदगद हो रहे होंगे....पर बहुत से धर्माचार्य नाराज हैं , वैसे भी उनकी चिंता किसे है, राम को लाने वालों ने राम को अकेला ही ले आए हैं जबकि राम जी तो वनवास भी अकेले नहीं गए थे...

बातें बहुत है पर क्या क्या लिखूं, लिखने बोलने का असर किसको है, सब एक आत्ममुग्ध के पीछे मंत्रमुग्ध हैं...

आदरणीय नरेंद्र मोदी जी प्रधान सेवक (भारत गणराज्य)राम-राम। विषय:- धन्यवाद ज्ञापन हेतु।महोदय,यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि ...
18/01/2024

आदरणीय नरेंद्र मोदी जी
प्रधान सेवक
(भारत गणराज्य)
राम-राम।

विषय:- धन्यवाद ज्ञापन हेतु।

महोदय,

यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि दिनांक 22 जनवरी को राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दिन पूरे देश मे आधे दिन की छुट्टी की घोषणा आपने की है।
यह भी बताया गया है कि कर्मचारियों की भारी भावना और उनके अनुरोध के कारण आपने आधे दिन की छुट्टी देने का एलान किया है।

महोदय
आपके इस दरियादिली के लिए भारत गणराज्य के समस्त कर्मचारियों के तरफ से हम आपको कोटि कोटि धन्यावाद ज्ञापित करते हैं। साथ ही साथ आपको यह सूचित करना चाहते हैं कि समस्त सरकारी कर्मचारियों की प्रबल भावना यह है कि तत्काल को बंद कर समस्त कर्मचारियों को बहाल किया जाए।
उम्मीद है आप अपनी दयालुता का पुनः परिचय देंगे और OPS लागू करने का एलान करेंगे। आपके लिए यह करना बहुत आसान है। समस्त कर्मचारीगण आपके तरफ आशा भरी निगाहों से देख रहे हैं।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि कर्मचारियों की भावना का ख्याल रखते हुए अविलम्ब OPS लागू करें और जन आशीर्वाद कर भागी बने।

आपका
अखिलेश प्रसाद

02/12/2023

कल 679 नए लोगों का चुनाव होगा। जिनको तत्काल से सारी सरकारी सुविधाएं मिल जाएंगी। इसके बाद इनके लिए पेंशन की भी व्यवस्था है। अर्थव्यवस्था और देश पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। इनमे से आधे से ज्यादा ऐसे भी होंगे, जिन्हें पहले से दो तीन पेंशन मिल रहा होगा। फिर भी इन्हें अलग से इस चुनाव के लिए अभी वेतन भत्ते मिलेंगे और कालान्तर मे पेंशन भी। जब मन होगा ये माननीय टेबल थप थपा कर अपने वेतन वृद्धि और अपनी सुविधाओं मे बढ़ोत्तरी कर लेंगे। कहीं कोई विरोध के स्वर नहीं सुनाई पड़ेगा।

इनके मातहत आने वाले क्लास ए से लेकर क्लास डी तक सरकारी मुलाजिमों को पेंशन नहीं दिया जाएगा। बोर्डर पर तैनात जवान माइनस दस से पंद्रह डिग्री की सर्द रात हो या 45 से 50 डिग्री की झुलसती गर्मी की दोपहर उसे पेंशन नहीं मिलनी है। फायर ब्रिगेड के उस जवान को याद कीजिए जो अपनी जान की परवाह किए बिना अपनी जान बचाने को कूद पड़ता है। पैरा मिलिट्री का हर उस जवान को याद कीजिए। जो अपनी जान हथेली पर लिए और सर पर कफन बांधे देश की सेवा मे 24 घंटे तैनात है। फिर भी उसे पेंशन नहीं मिलेगी।

08/11/2023

जो काम आज सिर्फ केवल वोट देने से हो सकता है। छह महीने बाद प्राण देने से भी नहीं होगा।
चाहने वालों को समर्पित।

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