08/02/2026
*मोटिवेशनल गजल: खुद की तलाश*
हवा-ए-दोस्ती में अपने पर जलने नहीं देना,
उड़ान अपनी किसी भी हाल में रुकने नहीं देना।
महफ़िलें तो सजेंगी उम्र भर ऐ दोस्त,
पर किताबों का दामन हाथ से छूटने नहीं देना।
वो जिनके साथ हंसते हो, वो कल को पूछेंगे,
किया क्या उम्र भर? ये सिर कभी झुकने नहीं देना।
अभी वक्त है, तपा ले खुद को सूरज की तरह,
अंधेरों को मुकद्दर में कभी फलने नहीं देना।
किस्से सुनाएंगे दुनिया को तुम्हारी जीत के हम,
बस आज ये इरादा अपना तुम डिगने नहीं देना।