26/07/2026
क्या #दिल्ली में #जंतर #मंतर पर #छात्रों का ऐसा #प्रोटेस्ट एक छात्र एवं छात्रा के लिए शोभा दे रहा है???
इसमें #अश्लीलता एवं #अर्धनग्नता की तस्वीर इस बात की गवाही देता है कि इस देश में छात्रों का एक नया गिरोह बन चुका है, जिसमें छात्र , छात्र न रहकर नाच पार्टी का एक मोहरा बन चुके हैं।
यह #टैटू और यह #बिकिनी इस बात को कभी नहीं नकार सकते हैं कि यह छात्र नहीं, किसी आर्केस्ट्रा पार्टी के डांसर और एनाउंसर नहीं है।
अभी तक हम यह #न्यूज़ #पेपर या किसी #समाचार में देखे थे कि यहां पर छात्रों ने #डांस पार्टी कर हंगामा मचाया लेकिन अब यह तस्वीर आम बन चुकी है वह विकास कर जंतर मंतर के निट एवं कॉकरोच वाले प्रोटेस्ट में।
दोस्तों अब सवाल शिक्षा पर भी उठना है कि वह शिक्षा शिक्षा नहीं है जिसमें "विद्या ददाति विनयम" का भाव रहता था।
इसको देखने से अब यह लगता है कि इसका अर्थ बदल गया या यह सूक्ति ही बदल गई यानी कि हम सीधे तौर पर यह कह सकते हैं की विद्या ददाति .... नृत्यम, गलियम, अश्लीलम, एवं असभ्यं।
अब यह शिक्षा व्यवस्था खासकर स्वर्ण के लिए नहीं रह गया है क्योंकि जिस शिक्षा व्यवस्था में नैतिकता का पतन हो चुका है वह शिक्षा व्यवस्था किसी भी इतिहास में किसी भी छात्र के लिए नहीं रहा है क्योंकि शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल नौकरी लेकर पैसा कमाना ही नहीं शिक्षा का मूल उद्देश्य अपने जीवन में आहार बिहार एवं संस्कार को शुभ अवस्थित कर अपने समाज को एवं अपने देश को जागृत करना शिक्षा से सामाजिक उत्थान की कामना ऐसे कैसे हो सकती है जिसमें से संस्कार विचार लुप्त हो चुके हैं।
अतः आने वाले दिनों में यह पाश्चात्य शिक्षा केवल ऐसे ही निठल्ले, आवारे, एवं ऐसे ही अश्लील बच्चों के लिए रह जाएगी सभ्य समाज इस शिक्षा से मुंह मोड़ लगा एवं सभी लोग इसे दरकिनार कर हसीए पर रख देंगे।
फिर बाद में कहेंगे ब्राह्मणों ने हमें नैतिक शिक्षा से अलग कर दिया। भाई जितना भी कार्य है पहले आपके द्वारा शुरू होता है एवं खुद ही आप अपने असभ्य एवं अश्लील कृत्यों के चलते सभ्य समाज से खुद ब खुद अलग हो जाते हैं क्योंकि आपका मानसिक भाव उसी में रहता है जो चित्र में दिख रहा है।
इसलिए आप उसी के होकर रह जाते हैं बाद में जब ब्राह्मण समाज एक नए सभ्य समाज का निर्माण करता है तो आप कहते हैं ब्राह्मणों ने हमें छाट दिया एवं हमें शिक्षा नहीं लेने दिया। इसके जिम्मेदार स्वयम आप ही हैं।
जब आप स्वयं ही इस तरह के असभ्य एवं अश्लील हरकत करेंगे तो कौन आपके साथ रहेगा???
खुद व खुद आप किनारे हो जाएंगे एवं खुद व खुद आप निचले स्तर के होकर रह जाएंगे।
इन्ही सब हरकतों के चलते आप एससी एसटी में चले गए हैं।
तो आप अपने इस हरकत को बरकरार रखिए ।
ब्राह्मण के लिए खुद टाइम नहीं है धर्म ग्रंथो को पढ़ने से। खुद टाइम नहीं है अपने भगवान को मानने से।
आप अपना काम करिए हम अपना काम करने दीजिए क्योंकि आप अपना काम स्वयं करते हैं । लेकिन ब्राह्मण अपना काम स्वयं नहीं करता । वह अपने भगवान के भरोसे अपना सारा काम छोड़ देता है । बस भगवान का भजन करता है ,सत्संग करता है ,प्रणाम करता है ,योग करता है, जप करता है, तप करता है।
तो भगवान भी अपने भक्त का काम स्वयं किसी न किसी रूप में आकर कर ही देते हैं जिस पर आपको भरोसा ही नहीं होता है।
तो कोई बात नहीं..... जय सिया राम 🙏🙏🙏
लेखक अजय ओझा ✍️ (7376318796)