05/02/2022
वसन्त पंचमी , 9 फरवरी 1962 को अभिनय ज्योति की स्थापना हुई थी । सभी सदस्यों को स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामना ।
विगत दिनों कोरोना संकट के कारण केवल दो मंच प्रस्तुतियां हुईं - कुँवर नारायण की कविता " वाजश्रवा के बहाने" और आचार्य रामचंद्र शुक्ल की कविता "मधुस्रोत " ।
फेसबुक पर तीन मंचन हुए - डॉ. धर्मवीर भारती की कविता "कनुप्रिया ", अंशुल त्रिपाठी की कविता " लाल लोचन बिहारी , लालगंज और मनोरमा "तथा विहाग वैभव की कविता " चाय पर शत्रु सैनिक " ।