02/12/2022
विधिवत संगीत सीखने के दौरान एक ऐसा अध्याय भी होता है जहां आकार का अभ्यास करवाया जाता है.गुरुजन यह भी बताते हैं कि मुंह को ठीक से खोलकर गायिकी की जाती है.
इससे होता यह है कि आवाज़ खुलती है, उच्चारण में स्पष्टता भी आती है.ये आधा मुंह खोलकर गायिकी करने से होता यह है कि शब्दों का उच्चारण है वह क्लियर नहीं रहता है. हम जो गा रहे हैं, शब्दों में जो भाव हैं, जो उत्पन्न करना चाह रहे हैं, आधा अधूरा मुंह खोलकर हम अपनी बात पूरी तरह से रख ही नहीं सकते हैं.
जिन महान कलाकारों की तस्वीरें यहां लगी हैं, उनके एक भी गीत में आपको आधा अधूरा या अस्पष्ट उच्चारण सुनने को नहीं मिलेगा.इनके द्वारा सुरों में पिरोया गया एक एक शब्द क्रिस्टल क्लियर साउंड करता था.
अब दिक्कत ये है कि आज की पीढ़ी इस आधे अधूरे उच्चारण वाले ट्रेंड को फॉलो करते हुए आगे बढ़ रही है जबकि होना यह चाहिए कि आप बेसिक्स को फॉलो करें.
क, ख, ग और घ से शुरुआत करना बहुत आवश्यक है और ये महान कलाकार इस क, ख, ग, घ का इंस्टिट्यूशन हैं.
आज की युवा पीढ़ी जो वाकई अच्छी संगीत साधना में लीन है वो इंस्टा और फेम की चकाचौंध से थोड़ी दूर है.हां, कुछ कलाकार इन प्लेटफार्म में भी दिख जाया करते हैं और शायद उन्हें देखकर राहत भी मिलती है कि मधुर संगीत कहीं ना कहीं सांसें ले रहा है पर दुख इस बात का है कि ट्रेंड को फॉलो करते हुए, नकली आवाज़ को बनाते हुए जो काम कर रहे हैं, उन्हे प्रसिद्धि बड़ी आसानी मिल रही है और ये कहीं ना कहीं, उन लोगों के लिए भी हानिकारक है क्योंकि इसकी लॉन्गिटिविटी है ही नही.
अतः जो भी माता पिता अपने बच्चों को संगीत में शिक्षा देने की सोचते हैं वे ट्रेंड नहीं बेसिक्स फॉलो करें.हिंदुस्तानी क्लासिकल या कर्नाटक संगीत अवश्य रूप से सिखाएं ताकि उनका बेस या जड़ें बेहद मजबूत हों.