24/03/2024
#होलिका_दहन
होलिका और प्रह्लाद मन की दो अवस्थाएं है। एक आसुरी शक्ति की तो दूसरी दैवीय शक्ति की। एक झूठ, छल-बल की तो दूसरा सत्य, स्नेह-प्रेम की। एक झूठे मान-सम्मान पर घमण्ड करता है तो दूसरा प्रेम भाव से समर्पण करता है। एक छल-बल, अनीति-कूट व असत्य का सहारा लेकर जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करता है और जीवन-यापन का तरीका बनाता है। तो दूसरा सत्य व प्रेम के विनम्र भाव को सजोये हुए अपने लक्ष्य की ओर शनैः-शनैः चलायमान होता है। एक को लक्ष्य सहजता और शीघ्रता से प्राप्त होती है, तो दुसरे को लक्ष्य बड़ी कठिनाई से।
इस लक्ष्य की प्राप्ति में बार-बार होलिका जैसे मन वाले लोग प्रह्लाद जैसे मन वाले पर हावी होने का प्रपंच रचते है। स्वांग रचते है। ये झूठी शान-मर्यादा एवं लूट-छल-बल की शक्ति से आत्मविभोर हुए उदंडता दिखाते हुए सदियों से प्रह्लाद रूपी मन वालों पर विजय प्राप्ति हेतु प्रयासरत रहते है। पर अंततः होता क्या है? अंत में वही होता है जो रावण का हुआ, जो होलिका का हुआ।
वास्तव में प्रह्लाद जैसा बन पाना कठिन है, जो स्वयं को समग्र रूप से प्रेम-करुणा, भक्त भाव से प्रभु के चित्त समर्पित हो जाये। फिर भी प्रह्लाद जैसा बनने की दिशा में हम कदम तो अवश्य बढ़ा सकते है। इसी कामना से अपने मन की होलिका को इस होलिका-दहन पर्व के साथ दहन कर आइये और प्रह्लाद के मन-पथ की ओर अग्रसर होइये। क्योंकि यही सत्य है, यही विजय है, यही प्रेम-समर्पण है।
होलिका-दहन पर्व की हार्दिक-हार्दिक शुभकामनायें..!!
Prem Rahi Pachrang Art
©️ Prem Chandra Patel 'Rahi'
Date: 24-03-2024