26/07/2023
बनारसी रात ,
शांत सी बहती गंगा ,
आराम करते घाट ,
बहुत से चेहरे ,
कुछ उलझे , कुछ खिलखिलाते , कुछ उदास,
बहुत कुछ कहती,बोलती आंखे ,
उलझनों को छिपाती,
हंसती हुई आंखे ,
चुपचाप दिल में फुसफुसाती,
सारी अनकही बातें ,
तारों के आगोश में चमकता चांद ,
दूर तक टिमटिमाते बहुत से बल्ब
गंगा में उभरते उनके अक्श,
यूं ही तैरती , खोई से कश्ती ,
इंसान का वजूद , दुनिया को बताती , समझदार कश्ती ,
इंसान को दुनिया , दुनिया को बनारस बनाते
कुछ प्रेमी जोड़े एक दूसरे को संवारते ,
गंगा की लहरों सा अमर
कुछ प्रेमी जोड़ों का मिलन
आलाप करती बनारसी घंटियां ,
ग़ालिब को भी जिन्होंने लुभा लिया वही घंटियां
दिन भर की चहल पहल से दूर ,
वैराग्य ,शांति , और कला से भरपूर ,
खूब - खूबसूरत है सोता हुआ बनारस ,
आओ कभी घूमों, खुद को सुबह के लिए तैयार करता,
थका हुआ बनारस ।।
- प्रियांशु
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