12/10/2024
कला गुरु की याद में चित्रकला कार्यशाला
कल दिनांक 11 अक्टूबर 2024 को आयोजित हुआ
द्वितीय कला-लोक एक दिवसीय चित्रकला कार्यशाला
"करता करे ना कर सके, गुरु करे सब होय।
सात द्वीप नौ खंड में, गुरु से बड़ा ना कोय।।"
इस श्लोक से प्रारम्भ हुई चित्रकला कार्यशाला। कला गुरु डॉ. राज कुमार सिंह (स्मृति शेष) की 47 वीं जयंती पर सम्भावना कला मंच, गाज़ीपुर के तत्वाधान में कला-सूत्रम् आर्ट स्टूडियो, वाराणसी के द्वारा द्वितीय "कला-लोक" एक दिवसीय चित्रकला कार्यशाला का आयोजन राजकीय सिटी इंटर कॉलेज, गाज़ीपुर के राजदीप सभागार में आयोजित किया गया। इस दौरान उनके शिष्यों ने कैनवास पर अपनी मनोभावों को चित्र के माध्यम से उतारकर अपने कला गुरु को श्रद्धांजलि दी।
इस कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि - श्री दिनेश कुमार यादव (PES) प्रधानाचार्य, राजकीय सिटी इंटर कॉलेज, गाज़ीपुर, विशिष्ट अतिथि- मोती प्रधान (समाज सेवी), श्री अमर नाथ तिवारी, साहित्य चेतना समाज ने ज्ञान की देवी मां सरस्वती एवं कला गुरु डॉ. राज कुमार सिंह (स्मृति शेष) के चित्र पर पुष्प अर्पित व दीप प्रज्जवलित करके किया।
इस कार्यशाला के आयोजन कला-सूत्रम् आर्ट स्टूडियो के। निर्देशक- श्री सुधीर सिंह ने अतिथियों को अंगवस्त्रम व पुष्प गुच्छ देकर स्वागत करते हुए स्व. राज कुमार सिंह के जीवनी पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि डॉ. राज कुमार सिंह एक ऐसे कला गुरु थे जिन्होंने अपने इस गाज़ीपुर और आस पास की जगहों पर चित्र कला के प्रति एक क्रांति के रूप में अलख जलाया। जिनके शिष्य आज देश विदेशों में कला के क्षेत्र में कोई शिक्षक, कोई प्रोफेसर तो कोई स्वतंत्र कलाकार के रूप में कार्य कर रहे हैं और डॉ. सिंह के द्वारा कला रूपी दीप के प्रकाश को और प्रकाशित कर रहे हैं।
इस कार्यशाला में डॉ. आशीष गुप्ता CHS, वाराणसी, वरुण मौर्य केंद्रीय विद्यालय, दिबरुगढ़, आसाम, मीरा वर्मा फरीदाबाद, चन्दन यादव, शिवांशी शर्मा, रीति सिंह, नर्मदा शर्मा ( डॉ. एम ए अंसारी इंटर कालेज), अंकिता विश्वकर्मा महिला महाविद्यालय, अंजलि विश्वकर्मा, सेजल भारती ( सर्वोदय इंटर कॉलेज, खरड़ीहाँ), सत्यम मौर्य, मनीष वर्मा BHU, वाराणसी, प्रिया मौर्य मऊ, हर्ष शर्मा ( क्विंस कालेज, वाराणसी), उत्कर्ष सिंह शाह फैज पब्लिक स्कूल) आदि ने प्रतिभाग किया। इस कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए प्रधानाचार्य श्री दिनेश कुमार यादव ने बताया कि चित्रकला विधा एक ऐसी भाषा है जो किसी भी शब्द और लेखन से ऊपर है।, मोती प्रधान ( समाज सेवी) ने कहा कि राज कुमार जी सदा हसमुख प्रवित्ती व्यक्तित्व वाले थे, जो हमेशा सभी व्यक्ति, बच्चों, महिलाओं को हसते हुए देखना चाहते थे। ये कहते थे कि हमें दो चीज चाहिए - आजादी और प्रेम। इससे हम सब कुछ बदल सकते हैं। साहित्यकार अक्षय पाण्डेय जी ने "जीवित हो तुम राज कुमार" नवगीत प्रस्तुत किया। अमर नाथ तिवारी, सुजीत कुमार, परेंडू सिंह, शाहिद परवेज आदि ने इस कार्यशाला पर एवं राज कुमार सिंह की जीवनी पर प्रकाश डाला। इस कार्यशाला को व्यवस्थित करने में डॉ. सूर्यनाथ पाण्डेय, श्री राम सिंहासन कुशवाहा, चंद्र प्रकाश शर्मा, सच्चिदानंद यादव, सिनोध कुमार, पंकज शर्मा आदि ने अपना योगदान दिया। इस कार्यक्रम में प्रभाकर त्रिपाठी, रंजीत कुमार भारती, बालेश्वर राव, कार्तिकेय यादव, प्रभात सिंह, नवीन सिंह, अमरदीप पांडेय आदि मौजूद रहें। सभी आगंतुकों का सम्भावाना कला मंच की अध्यक्ष सीमा सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया एवं संचालन डॉ. राजीव कुमार गुप्ता ने किया।