02/10/2025
राजाखेड़ा का इतिहास
राजाखेड़ा, राजस्थान के धौलपुर जिले में चंबल नदी के किनारे बसा एक छोटा नगर और तहसील है। यह उत्तर प्रदेश (आगरा, 36 किमी) और मध्य प्रदेश (मुरैना) की सीमाओं के निकट है, जिसके कारण इसकी संस्कृति ब्रज क्षेत्र से प्रभावित है। यहाँ ब्रजभाषा बोली जाती है। नगर का नाम "राजा के खेरे" (राजा का स्थान) से लिया गया माना जाता है। इसका इतिहास धौलपुर रियासत और क्षेत्रीय शासनों से जुड़ा है। नीचे इसका संक्षिप्त इतिहास दिया गया है:
प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास
प्राचीन काल: राजाखेड़ा का क्षेत्र महाभारत काल के मत्स्य जनपद का हिस्सा था। धौलपुर क्षेत्र में हड़प्पा सभ्यता के अवशेष (लगभग 3000 ईसा पूर्व) मिले हैं। चंबल और बनास नदियों के किनारे प्रारंभिक बस्तियाँ थीं। मौर्य साम्राज्य (321 ईसा पूर्व) के समय यह मगध के अधीन था।
मध्यकाल: 9वीं-10वीं शताब्दी में चौहान राजपूतों का प्रभाव रहा। 1194 में मुहम्मद गोरी के आक्रमण के बाद यह दिल्ली सल्तनत का हिस्सा बना। मुगल काल में यह मुगलों के अधीन रहा। धौलपुर की स्थापना 700 ई. के आसपास राजा धवलदेव तोमर ने की, जिसे धवलपुर कहा गया, जो बाद में धौलपुर बना। राजाखेड़ा इस रियासत का हिस्सा था।
ब्रिटिश काल: 1805 में ब्रिटिशों ने धौलपुर को भरतपुर के जाट शासकों को सौंपा। 1857 की क्रांति में धौलपुर के राणा भगवंत सिंह ने विद्रोहियों का साथ दिया। राजाखेड़ा इस दौरान रियासत का हिस्सा रहा।
आधुनिक इतिहास
स्वतंत्रता के बाद: 1949 में राजपूताना रियासतों के एकीकरण से राजाखेड़ा राजस्थान का हिस्सा बना। 1982 में धौलपुर को अलग जिला बनाया गया, और राजाखेड़ा तहसील बनी। यहाँ की अर्थव्यवस्था कृषि (गेहूँ, सरसों, चना) पर आधारित है, और चंबल नदी सिंचाई का मुख्य स्रोत है।
जनसांख्यिकी: 2011 की जनगणना के अनुसार, नगर की जनसंख्या लगभग 33,666 है (तहसील की कुल जनसंख्या 1,63,904)। पुरुष-महिला अनुपात 89,022:74,882 है। पिन कोड 328025।
भूगोल और संस्कृति
भूगोल: चंबल और उटंगन (गंभीर) नदियों के किनारे बसा, समुद्र तल से 172 मीटर ऊँचाई पर। यह राष्ट्रीय राजमार्ग 23 और 44 से जुड़ा है। निकटतम रेलवे स्टेशन धौलपुर (41 किमी) और आगरा (36 किमी) हैं।
संस्कृति: ब्रज संस्कृति का प्रभाव; होली, दीवाली धूमधाम से मनाए जाते हैं। प्रमुख समुदाय: जाट, राजपूत, ब्राह्मण। भाषाएँ: ब्रजभाषा, हिंदी। स्थानीय व्यंजन: बाजरे की रोटी, घी।
महत्वपूर्ण स्थल और तथ्य
पर्यटन: निकटवर्ती चंबल उद्यान (बाघ, घड़ियाल अभयारण्य), निचीझल झील, तालछापर अभयारण्य। राजाखेड़ा में प्राचीन मंदिर और किले के अवशेष हैं।
राजनीति: पूर्व वित्त मंत्री पध्युम्न सिंह सात बार यहाँ से विधायक रहे।
शिक्षा: गवर्नमेंट कॉलेज राजाखेड़ा (2016 में स्थापित, एमएस बृज विश्वविद्यालय से संबद्ध)।