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क्योंझर में इंसानियत शर्मसार: बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचा भाई, अब मिली राहतओडिशा के क्योंझर से आई इस घटना ने पूरे सिस्...
29/04/2026

क्योंझर में इंसानियत शर्मसार: बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचा भाई, अब मिली राहत

ओडिशा के क्योंझर से आई इस घटना ने पूरे सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। 💔

एक भाई, जीतू मुंडा, अपनी मृत बहन के खाते से महज 19 हजार रुपये निकालने के लिए दर-दर भटकता रहा… लेकिन नियमों के आगे उसकी मजबूरी हार गई।

जब बैंक ने डेथ सर्टिफिकेट मांगा, तो वो अपनी बहन का कंकाल ही कंधे पर उठाकर बैंक पहुंच गया… 😢

ये सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता की तस्वीर है।

हालांकि अब प्रशासन हरकत में आया है—

✔️ बैंक ने 19,000 रुपये लौटा दिए
✔️ रेड क्रॉस ने 20,000 रुपये की सहायता दी

लेकिन सवाल अभी भी बाकी है…

क्या इंसानियत से बड़ा कोई नियम हो सकता है? 🤔

आकांक्षा के साथ छत्तीसगढ़ के लोगों की आकांक्षाएं हैं, जिसको एक भाई हाथ थामकर आगे बढ़ा रहे हैं  छत्तीसगढ़ के 3 करोड़ की ज...
22/01/2026

आकांक्षा के साथ छत्तीसगढ़ के लोगों की आकांक्षाएं हैं, जिसको एक भाई हाथ थामकर आगे बढ़ा रहे हैं छत्तीसगढ़ के 3 करोड़ की जनता आपके साथ है डरने की जरूरत नहीं है?

हमारे पूर्वज बिना प्रचार प्रसार के , समाज हित में बहुत कुछ कर के गये है उन्हें बारंबार जोहार जोहार सेवा सेवा 🌿🙏🌿जोहार गो...
20/01/2026

हमारे पूर्वज
बिना प्रचार प्रसार के , समाज हित में बहुत कुछ कर के गये है उन्हें बारंबार जोहार जोहार सेवा सेवा 🌿🙏🌿
जोहार गोंडवाना भूमि
गोंड गोंडी गोंडवाना ता सेवा सेवा 💞🙏💞
Sushila Dhurve

Gondwana
19/01/2026

Gondwana

छत्तीसगढ़ कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने आखिर छत्तीसगढ़ के लिए आज तक क्या किया है? धान टोकन के समय किसान परेशान था टेक्न...
18/01/2026

छत्तीसगढ़ कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने आखिर छत्तीसगढ़ के लिए आज तक क्या किया है? धान टोकन के समय किसान परेशान था टेक्निकल इशू था जबकि कांग्रेस के सरकार में ऐसा बिल्कुल नहीं था आज जब जनता उससे सवाल पूछ रही है तो सवालों से मुकर रहा है जनता से हंस के बात नहीं कर सकता है जब वोट लेना था तो सबके पाव छू रहा था आप बताओ यह मंत्री बने लायक है क्या? 2028 में इसका भविष्य खत्म होने वाला है? आकांक्षा टोप्पो जो आवाज उठाई है वह जनता के लिए सही है कितना भी हो केश दर्ज हो जाएआकांक्षा टोप्पो के साथ पूरी जनता खड़ी रहेगी एक आदिवासी बेटी होने के नाते जन समस्याओं को दिखा रही है तो इन नेताओं को दिक्कत हो रहा है 2028 में सब बीजेपी के नेताओं को मुंह बंद कर लेना चाहिए ? जो की लोगों की समस्याओं को नहीं सुनते हैं

सुन लो हमारे इतिहास को दबाने वालो यहां कोई महल नही घना भयानक जंगल था #बांसवाड़ा के मालिक (राजा) हम है614  जनवरी_1515 ईस्...
16/01/2026

सुन लो हमारे इतिहास को दबाने वालो यहां कोई महल नही घना भयानक जंगल था

#बांसवाड़ा के मालिक (राजा) हम है

614

जनवरी_1515 ईस्वी में की थी स्थापना...

बांसवाड़ा के #राजा_बांसिया_जी_भील...

बांसवाडा के संरयापक भौल राजा

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यता राजस्थान के प्रतापी शासक थे, जो बांसवाडा के संस्थापक थे राजस्थान का दक्षिणी भाग जो गुजरात और मध्य प्रदेश की सीमाओं से लगा हुआ है, 7 बांसवाड़ा को सौ द्वीपों का नगर भी कहा जाता है, क्योंकि यहां से गुजरने वाली माही नदी जिसमें बहुत सारे द्वीप है राजा बांसिया भील को वाहिया भील के नाम से भी जाना जाता है, ये राजा अमरा चरपोटा के पुत्र थे, राजा अमरा चरपोटा भील, राजा बिया चरपोटा भील के पुत्र थे, जिन्होंने चित्तौड़गढ़ और मल्हारगढ़, धारगढ़ राजधानियों पर राज किया, इनके बाद राज्य के शासक इनके बेटे राजा अमरा बने और उन्हीं के नाम से नगर का नाम अमरथुन किया गया राजा बांसिया भील के एक भाई और तीन बहन थी, बांसिया भील को राजा अमरा चरपोटा के बाद राज्य का शासक बनाया गया, उन्होंने अपने भाई बहनों के साथ अमरचंद नगर से निकलकर एक घने जंगलों में एक नया नगर बसाया।।

जिसका नाम है #बांसवाड़ा

बांसवाड़ा नगर की स्थाप

कौन थे “कुँवारा भिवसेन” (भीमाल पेन)?कुँवारा भिवसेन, जिन्हें गोंड समाज में भीमाल पेन कहा जाता है, संपूर्ण गोंडवाना की आस्...
16/01/2026

कौन थे “कुँवारा भिवसेन” (भीमाल पेन)?

कुँवारा भिवसेन, जिन्हें गोंड समाज में भीमाल पेन कहा जाता है, संपूर्ण गोंडवाना की आस्था का केंद्र हैं।
यह पवित्र स्थल आज के महाराष्ट्र राज्य के नागपुर ज़िले के पारशिवनी तहसील में स्थित है।
हर वर्ष चैत्र महीने में यहाँ सव्वा महीने तक चलने वाली जत्रा (मेला) लगती है, जिसमें पूरे गोंडवाना से श्रद्धालु आते हैं।

भीमाल पेन के जीवन और इतिहास की यह कथा तिरुमाल शंकरराव मरस्कोल्हे (नागपुर) की पुस्तक पर आधारित है।

प्राचीन काल की पृष्ठभूमि

कहा जाता है कि रावण काल से लगभग 700 वर्ष पूर्व, वर्तमान मध्य प्रदेश के बालाघाट ज़िले में मोहमभट्टा राज्य था।
इस राज्य के राजा थे सयमाल मडावी, और उनकी रानी का नाम था झमया।

राजा-रानी को एक पुत्र हुआ, जिसका नाम भुरा भगत था।
भुरा भगत अत्यंत साहसी, बलवान और निर्भीक थे। जंगल में अकेले जाकर हिंसक पशुओं का शिकार करना उनका शौक था।

भुरा भगत और कोतमा का विवाह

एक दिन भुरा भगत शिकार के लिए बैहर के जंगल (आज का कान्हा-किसली क्षेत्र) गए।
उसी दिन उसी क्षेत्र के राजा ढोला उइका, अपनी पुत्री कोतमा के साथ वहाँ आए थे।

संयोगवश भुरा भगत और कोतमा पानी की तलाश में एक तालाब के किनारे मिले।
पहली ही भेंट में दोनों एक-दूसरे से प्रभावित हुए।

कुछ समय बाद राजा ढोला उइका वहाँ पहुँचे।
भुरा भगत के तेज और व्यक्तित्व को देखकर उन्होंने अपनी पुत्री के विवाह का प्रस्ताव रखा।
परिवारों की सहमति से भुरा भगत और कोतमा का विवाह संपन्न हुआ।

भीमा का जन्म

विवाह के बाद कोतमा गर्भवती हुईं।
चैत्र पूर्णिमा के दिन, जंगल में रहते हुए, उन्होंने एक पुत्र को जन्म दिया।
उस बालक का नाम रखा गया — भीमा।

पूरे राज्य में उत्सव मनाया गया।

गोटूल शिक्षा और अलौकिक प्रतिभा

पाँच वर्ष की आयु में ही भीमा को गोटूल में शिक्षा हेतु भेज दिया गया।
उस समय गोटूल के मुखिया (मुर्सेनाल) थे माहारू उइका, जो भीमा के गुरु बने।

भुरा भगत और कोतमा को कुल 11 संतानें हुईं —

6 पुत्र: भीमा, जाटबा, केशबा, हिरबा, भाजी, मुकोशा

5 पुत्रियाँ: पंधरी, पुन्गार, मुगुर, कुशार, खेरदाई

भीमा असाधारण प्रतिभा के धनी थे।
वे लाठी, मुष्टि, मल्लविद्या, धनुर्विद्या, योग, तंत्र-मंत्र, समाजशास्त्र, धर्मशास्त्र और राजकाज में पारंगत थे।

इतिहासकारों के अनुसार, भीमा गोंडी धर्म के चौथे मुठवा (धर्मगुरु) थे।

वि

22/09/2023

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