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अंतरराष्ट्रीय ठहाका सम?

सालों बाद कॉलेज के वही गलियारे और तुम्हारी वही याद,यहीं पर तो हुई थी हमारी आखिरी मुलाकात।वो चुप सी खामोशी, आँखों में अनक...
08/04/2026

सालों बाद कॉलेज के वही गलियारे और तुम्हारी वही याद,
यहीं पर तो हुई थी हमारी आखिरी मुलाकात।
वो चुप सी खामोशी, आँखों में अनकहे जज़्बात,
जैसे लफ्ज़ रुक गए हों, और ठहर गया हो हर एहसास।
कदम तो आगे बढ़ गए थे, पर दिल यहीं रह गया,
तुमसे बिछड़कर जैसे कुछ मेरा मुझमें ही खो गया।
आज फिर वही दीवारें, वही पेड़, वही रास्ते मिले,
यहां तुम नहीं थे… जो हमने साथ मिलकर देखे थे कभी वो अधूरे से कुछ ख्वाब मिले।
सोचा था वक्त सब भर देगा, हर जख्म मिट जाएगा,
मुझे क्या पता था तुम्हारा नाम आज भी मुझे रुला जाएगा।
डॉ. महेन्द्र यादव
Thahaka Sammelan Ujjain Official Group

08/04/2026
शीर्षक: 53 का रहस्य टेपा, टी-शर्ट और ठहाकों की टाइम मशीन 😄1 अप्रैल… यानी वो दिन जब सच्चाई भी मजाक लगती है और मजाक में भी...
31/03/2026

शीर्षक: 53 का रहस्य टेपा, टी-शर्ट और ठहाकों की टाइम मशीन 😄
1 अप्रैल… यानी वो दिन जब सच्चाई भी मजाक लगती है और मजाक में भी गहरी सच्चाई छिपी होती है। ऐसे ही खास दिन पर “टेपा” अपने 53वें पड़ाव पर खड़ा है और इस बार मामला सिर्फ सम्मेलन का नहीं, बल्कि एक रहस्यमयी “53” का भी है!
वो ऐतिहासिक फोटो ज़रा गौर से देखिए… जिसमें मेरे गुरु आदरणीय डॉ. शिव शर्मा सर और मैं किसी बेहद गंभीर विषय पर चर्चा करते नजर आ रहे हैं। देखने वालों को लगेगा कि शायद देश-समाज का कोई बड़ा मसला सुलझाया जा रहा है… लेकिन असली राज़ तो मेरी टी-शर्ट पर लिखा “53” खोलता है!
अब आप ही बताइए 49वें टेपा वर्ष में 53 का प्रकट होना… ये संयोग है या सर के साथ बैठकर की गई कोई “गुप्त हास्य-रणनीति”?
ऐसा लगता है कि उस दिन चर्चा कम, भविष्य की स्क्रिप्ट ज्यादा लिखी जा रही थी।
टेपा सिर्फ एक सम्मेलन नहीं, एक विचारधारा है… और विचारधाराएँ कभी अचानक नहीं बनतीं। उनके पीछे वर्षों का अनुभव, व्यंग्य की धार और कभी-कभी टी-शर्ट पर छपे ऐसे “संकेत” भी काम करते हैं।
आज जब 53वां टेपा सम्मेलन हमारे सामने है, तो मन यही कहता है कि सर भले ही हमारे बीच प्रत्यक्ष रूप से नहीं हैं, लेकिन उनका अंदाज़, उनका व्यंग्य और उनका “टेपा-तत्व” हर मुस्कान में जिंदा है।
और हाँ, ठहाकों की इस परंपरा को आगे बढ़ाने में मेरा अपना छोटा-सा प्रयास — “ठहाका सम्मेलन” — भी कहीं न कहीं उसी विरासत की एक विनम्र कड़ी है। जहाँ हम हँसी को सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज का आईना मानते हैं।
शायद कहीं ऊपर से सर मुस्कुरा कर कह रहे होंगे—
“53 लिखा था… ध्यान तो देना चाहिए था!”
तो आइए, इस अनोखे संयोग, इस जीवंत परंपरा और इस अमर हास्य-यात्रा को मिलकर उत्सव बनाएं।
दिनांक : 1अप्रैल 2026
स्थान: कालिदास अकादमी
समय: रात 8 बजे
53वां अ.भा.टेपा सम्मेलन
जहाँ संयोग भी हँसते हैं और ठहाके इतिहास बनाते हैं!

भाई साहब को जन्म दिवस की बधाई शुभकामनाएं।CM Madhya Pradesh CM MOHAN YADAV FENS CLUB
25/03/2026

भाई साहब को जन्म दिवस की बधाई शुभकामनाएं।
CM Madhya Pradesh
CM MOHAN YADAV FENS CLUB

24/03/2026

जन्मदिन पर आत्मीय बधाई शुभकामनाएं यशस्वी मुख्यमंत्री आदरणीय मोहन यादव जी।
CM MOHAN YADAV FENS CLUB
CM Madhya Pradesh

24/03/2026

अति आवश्यक सूचना
ठहाका सम्मेलन टीम आपसे आग्रह करती है कृपया अपने कीमती वक्त में से एक मिनिट का समय निकालकर यह VIDEO जरूर सुने।
Pradeep Sharma

धुरंधर 2” — शोर, आक्रामकता और विचारधारा के बीच उलझती फ़िल्म  https://madhavexpress.com/?p=78210
22/03/2026

धुरंधर 2” — शोर, आक्रामकता और विचारधारा के बीच उलझती फ़िल्म https://madhavexpress.com/?p=78210

डॉ. महेन्द्र यादव की पाती  थोड़ी जज़्बाती
16/03/2026

डॉ. महेन्द्र यादव की पाती थोड़ी जज़्बाती

Spread the loveएक बदकिस्मत बहरूपिया कभी-कभी कलाकार मंच पर नहीं आता, बल्कि यादों की कोई पुरानी शक्ल हमारे

15/03/2026

ऐसी पत्नियों के पति शादी के बाद समझदार हो जाते है।

जब भी कोई ज्ञान दे कि “AI आने वाले समय में हमारी जॉब्स खा जाएगा”, तो उसे एक बार Sunil Grover की परफॉर्मेंस दिखा देना दोस...
15/03/2026

जब भी कोई ज्ञान दे कि “AI आने वाले समय में हमारी जॉब्स खा जाएगा”, तो उसे एक बार Sunil Grover की परफॉर्मेंस दिखा देना दोस्तों।
फिर उससे पूछना
भाई, यह वाला “सॉफ्टवेयर” कहाँ से डाउनलोड होगा?
कमाल का कलाकार है यह आदमी। जब Salman Khan बना तो कई जगह असली सलमान से भी ज़्यादा “भाई” लगा।
जब Gulzar साहब बना तो इतनी गरिमा और ठहराव के साथ कि हँसी भी आए और दिमाग भी दाद दे।
और जब The Great Khali बना तो लगा कि यह आदमी सिर्फ आवाज़ ही नहीं, पूरा व्यक्तित्व कॉपी कर लेता है।
लेकिन इन सबके ऊपर…
मेरे हिसाब से सबसे कठिन और सबसे अद्भुत परफॉर्मेंस है — Kader Khan साहब की मिमिक्री।
क्योंकि कादर खान सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, वे एक अद्भुत संवाद शैली और व्यक्तित्व थे।
और उस व्यक्तित्व को पकड़ लेना… यह हर किसी के बस की बात नहीं।
हैट्स ऑफ भाईलोग!
The Kapil Sharma Show का अगर कोई “लाइफ-सेवर हनुमान जी” है, तो वह सुनील ग्रोवर ही हैं।
लेकिन एक बात और…
जितनी तालियाँ सुनील ग्रोवर के लिए बज रही हैं, उसका थोड़ा हिस्सा उन राइटर्स के लिए भी बजना चाहिए जिन्होंने ऐसे कमाल के सीन और संवाद लिखे।
इनमें सबसे पहला नाम है हेड ऑफ कंटेंट हीरा अरोड़ा का।
इसके बाद लीड राइटर लखबरी लहरी।
सीनियर राइटर्स में अनुगम गोस्वामी, अभिषेक भट्ट, दिग्विजय सिंह और रफी वारसी जैसे लोग हैं।
और नई पीढ़ी के राइटर्स में पार्थ चावला, डिम्पी पाठक, अंकुश कुमार, कलमुद्दीन अंसारी, विभोर चौधरी और अनुग्रह शर्मा भी शानदार काम कर रहे हैं।
क्योंकि मंच पर जो हँसी दिखाई देती है…
वह सिर्फ कलाकार की नहीं होती
उसके पीछे कई दिमाग, कई रातें और बहुत सारी मेहनत होती है।
AI बहुत कुछ कर सकता है…
लेकिन टाइमिंग, ऑब्जर्वेशन और इंसानी शरारत अभी भी इंसानों की ही जागीर है।

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