AnjaniPutra Astrovision

AnjaniPutra Astrovision ऐस्ट्रोविजन (ज्योतिष)

Vande Guru Paramparam.
19/07/2016

Vande Guru Paramparam.

19/07/2016

✋✋✋✋✋✋✋✋
👌गुरु ही संबल है 👌
🎯गुरु ही आलंबन है🎯
👍गुरु ही प्रभाव है 👍
☔गुरु ही स्वभाव है☔
❤गुरु ही अभिनन्दन है❤
🎺गुरु ही नंदन है🎺
🌹गुरु ही मंजिल है 🌹
🎸गुरु ही सकल जहाँ है🎸
💘गुरु ही प्रकाश है 💘
🔥गुरु ही जीवनज्योती हैै🔥
🙏गुरु ही समाधान है, 🙏
👊गुरु ही आराधना है👊
🌹गुरु ही माँ है - गुरु ही पिया है
💘गुरु ही दिया है - गुरु ही मीत है
🌹गुरु ही प्रीत है - गुरु ही जीवन है
💗गुरु ही सांस है - गुरु ही आस है
🌹गुरु ही प्यास हैै - गुरु ही ज्ञान है
💛गुरु ही ससांर है - गुरु ही प्यार है
🌹गुरु ही गीत है - गुरु ही संगीत है
💙गुरु ही लहर है - गुरु ही भीतर है
🌹गुरु ही बाहर है - गुरु ही बहार है
💜गुरु ही प्राण है - गुरु ही जान है
🌹गुरु ही दर्पण है - गुरु ही धर्म है
💚गुरु ही कर्म है - गुरु ही मर्म है
🌹गुरु ही नर्म है - गुरु ही चमन है
❤गुरु ही मान है - गुरु ही सम्मान है
🌹गुरु ही प्राण है - गुरु ही जहान है
🌹गुरुही उपासना है, गुरुही सगुन है
💗गुरु ही निर्गुण है - गुरु ही आदि है
🌹गुरु ही अन्त हैै - गुरु ही अनन्त है
💛गुरु ही विलय है - गुरु ही प्रलय है
🌹गुरु ही आधि है - गुरु ही व्याधि है
💙गुरु ही समाधि है - गुरु ही जप है
🌹गुरु ही तप है - गुरु ही ताप है
💜गुरु ही यज्ञः है - गुरु ही हवन है
🌹गुरु ही समिध है, गुरुही समिधा है
💚गुरु ही आरती है - गुरु ही भजन है
🌹गुरु ही भोजन है - गुरु ही साज है
❤गुरु ही वाद्य है - गुरु ही वन्दना है
🌹गुरु ही आलाप है - गुरु ही प्यारा है
💘गुरु ही न्यारा है - गुरु ही दुलारा हैै
🌹गुरु ही मनन है - गुरु ही चिंतन है
💗गुरु ही वंदन है - गुरु ही चन्दन है
🌹गुरु ही गरिमा है - गुरु ही महिमा है
💛गुरु ही चेतना है - गुरु ही भावना है
🌹गुरु ही गहना है - गुरु ही पाहुना है
💙गुरु ही अमृत है - गुरु ही खुशबू है
🌹गुरु समष्टि है - गुरु ही व्यष्टि है
💜गुरु ही सृष्टी है - गुरु ही दृष्टि है
🌹गुरु ही तृप्ति है - गुरु ही 🌹
🌹🙏🙏🌹

18/07/2016

*आषाढ़ पूर्णिमा ही क्यों है गुरु पूर्णिमा*

सीखने और सिखाने की परंपरा न हो तो ज्ञान एक ही जगह पर ठिठक जाएगा। यही वजह है कि जीवन में गुरु की महत्ता है।
कहा जाता है कि आषाढ़ पूर्णिमा को आदि गुरु वेद व्यास का जन्म हुआ था। उनके सम्मान में ही आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।
आषाढ़ की पूर्णिमा को चुनने के पीछे गहरा अर्थ है। अर्थ है कि गुरु तो पूर्णिमा के चंद्रमा की तरह हैं जो पूर्ण प्रकाशमान हैं और शिष्य आषाढ़ के बादलों की तरह। आषाढ़ में चंद्रमा बादलों से घिरा रहता है। जैसे बादल रूपी शिष्यों से गुरु घिरे हों। शिष्य सब तरह के हो सकते हैं, जन्मों के अंधेरे को लेकर आ छाए हैं। वे अंधेरे बादल की तरह ही हैं। उसमें भी गुरु चांद की तरह चमक सके, उस अंधेरे से घिरे वातावरण में भी प्रकाश जगा सके, तो ही गुरु पद की श्रेष्ठता है। इसलिए आषाढ़ की पूर्णिमा का महत्व है! इसमें गुरु की तरफ भी इशारा है और शिष्य की तरफ भी। यह इशारा तो है ही कि दोनों का मिलन जहां हो, वहीं कोई सार्थकता है।
*गुरु के प्रति आभार का पर्व*
गुरु की महत्ता को समर्पित इस पर्व को व्यास पूर्णिमा या मुड़िया पूनों भी कहा जाता है। इस दिन कई श्रद्धालु गोवर्धन पर्वत परिक्रमा देते हैं। बंगाली साधु सिर मुंडाकर परिक्रमा करते हैं क्योंकि आषाढ़ पूर्णिमा को ही चैतन्य महाप्रभु के प्रमुख शिष्य सनातन गोस्वामी का तिरोभाव हुआ था। ब्रज में इसे 'मुड़िया पूनों"कहा जाता है। यह अपने गुरु की पूजा का दिन है। उनसे जो भी कुछ पाया है उसके लिए आभार व्यक्त करने का दिन है। यूं तो 'व्यास' नाम के कई विद्वान हुए हैं परंतु वेदव्यास को आदिगुुरु माना जाता है। वे ही वेदों के प्रथम व्याख्याता थे, आज के दिन उनकी पूजा की जाती है।

।। अंजनीपुत्र एस्ट्रोविजन ।।
।। जय श्री राम ।।

16/07/2016

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