22/05/2026
21 मई 2026
अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस 2026 के उपलक्ष्य में भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत न्यास (इनटैक), उदयपुर चैप्टर एवं मानव विज्ञान सर्वेक्षण भारत सरकार, पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र, उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में “विभाजित दुनिया को जोड़ते संग्रहालय” विषयक विशेष संगोष्ठी एवं विचार-विमर्श कार्यक्रम का आयोजन जोनल एंथ्रोपोलॉजिकल म्यूजियम, प्रतापनगर, उदयपुर में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम में संग्रहालयों की समकालीन प्रासंगिकता, सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, सामुदायिक सहभागिता तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से संग्रहालयों के परिवर्तित स्वरूप पर विस्तृत विमर्श किया गया। इस अवसर पर लगभग 50 प्रतिभागियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें इनटैक सदस्य, शोधार्थी, शिक्षाविद्, विद्यालयों के प्राचार्य एवं शिक्षक, संग्रहालय विशेषज्ञ, कला एवं संस्कृति प्रेमी तथा विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि सम्मिलित थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के औपचारिक स्वागत तथा एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की वृत्तचित्र फिल्म के प्रदर्शन के साथ हुआ। तत्पश्चात मानव विज्ञान सर्वेक्षण भारत सरकार, उदयपुर के कार्यालय प्रमुख एवं उपनिदेशक (संस्कृति) डॉ. नीलांजन खातुआ ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए कहा कि संग्रहालय केवल अतीत के अवशेषों के संरक्षण केंद्र नहीं, अपितु समाज, संस्कृति एवं समुदायों के मध्य जीवंत संवाद स्थापित करने वाले सशक्त माध्यम हैं।
इनटैक उदयपुर चैप्टर के संयोजक गौरव सिघवी ने “प्रदर्शन से परे : संग्रहालय की वास्तविक पहचान क्या है?” विषय पर अपने व्याख्यान में कहा कि आधुनिक संग्रहालय अब मात्र वस्तुओं के प्रदर्शन स्थल नहीं रहे, बल्कि वे संवेदनाओं, सांस्कृतिक स्मृतियों एवं सामाजिक चेतना के जीवंत केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक सशक्त संग्रहालय वह है, जो दर्शक को केवल जानकारी प्रदान न करे, बल्कि उसे अपनी सांस्कृतिक जड़ों, इतिहास एवं लोकपरंपराओं से आत्मिक रूप से जोड़ सके।
उन्होंने विद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि यदि विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से संग्रहालय संस्कृति से परिचित कराया जाए, तो उनमें सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के प्रति स्वाभाविक संवेदनशीलता एवं उत्तरदायित्व विकसित किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने युवाओं को संग्रहालयों से जोड़ने हेतु डिजिटल तकनीकों, इंटरैक्टिव डिस्प्ले, स्टोरीटेलिंग, लाइव डेमॉन्स्ट्रेशन तथा सहभागी गतिविधियों जैसे नवाचारों को समय की आवश्यकता बताया।
इसके उपरांत डिजिटल कलाकार डॉ. गौरव शर्मा ने “डिजिटल कला का इतिहास और कलाकार की योग्यता” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए डिजिटल माध्यमों द्वारा सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं प्रभावी प्रस्तुतीकरण की नवीन संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथियों एवं प्रतिभागियों ने भी संग्रहालयों की सामाजिक, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। अंत में संग्रहालय की सहायक कीपर सुश्री सुदीपा मंडल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को संग्रहालय दीर्घा का अवलोकन कराया गया, जहाँ उन्होंने विविध सांस्कृतिक एवं मानवशास्त्रीय प्रदर्शनों का निरीक्षण किया।