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1986 में भारत में एक पाँच साल का छोटा लड़का अपने बड़े भाई का इंतज़ार करते हुए रेलवे स्टेशन की बेंच पर सो गया। उसका भाई व...
22/04/2026

1986 में भारत में एक पाँच साल का छोटा लड़का अपने बड़े भाई का इंतज़ार करते हुए रेलवे स्टेशन की बेंच पर सो गया। उसका भाई वापस ही नहीं आया।

वो लड़का उसे ढूंढने के लिए एक खाली ट्रेन के डिब्बे में चढ़ गया, यह सोचकर कि शायद उसका भाई अंदर हो। वहाँ भी वो सो गया। जब उसकी आँख खुली, दरवाज़े बंद थे और ट्रेन चल रही थी। ट्रेन करीब दो दिन तक नहीं रुकी।

जब रुकी, तो वो कोलकाता पहुँच चुका था — अपने घर से लगभग 1500 किलोमीटर दूर। वो इतना छोटा था कि अपना पूरा नाम नहीं जानता था, पढ़ नहीं सकता था और अपने गाँव का नाम भी नहीं बता सकता था।

वो कई हफ्तों तक अकेला सड़कों पर भटकता रहा। रेलवे स्टेशन की बेंचों के नीचे सोता और जो थोड़ा-बहुत खाना मिलता, उससे गुज़ारा करता। बाद में उसे एक अनाथालय ले जाया गया और “लापता बच्चा” घोषित कर दिया गया। कोई भी यह पता नहीं लगा पाया कि वो कहाँ से आया था।

कुछ समय बाद ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया से एक दंपत्ति ने उसे गोद ले लिया। उन्होंने उसे प्यार भरा घर दिया और उसकी नई ज़िंदगी शुरू हुई।

उसका नाम बन गया Saroo Brierley।
वो इस दुनिया के दूसरे छोर पर बड़ा हुआ।

लेकिन उसने अपना अतीत कभी नहीं भुलाया। उसे कुछ धुंधली यादें थीं — रेलवे स्टेशन के पास एक पुल, पानी की टंकी, मोहल्ले की बनावट और अपने परिवार के चेहरे।

जब वो लगभग 25 साल का हुआ, तो उसने Google Earth के बारे में जाना। उसने अंदाज़ा लगाया कि ट्रेन कितनी दूरी तय कर सकती थी, और कोलकाता के आसपास एक दायरा बनाकर उस इलाके के रेलवे लाइनों के पास के शहरों को खोजना शुरू किया।

कई हफ्तों तक वो हर हफ्ते के करीब 30 घंटे तक सैटेलाइट तस्वीरें देखता रहता, ताकि कोई पहचान वाली जगह मिल जाए। उसके ऑस्ट्रेलिया वाले परिवार को भी नहीं पता था कि वो क्या कर रहा है — उन्हें लगता था कि वो बस इंटरनेट चला रहा है।

आखिरकार 2011 में, कई सालों की मेहनत के बाद, उसे वही जगह मिल गई — एक पानी की टंकी, एक पुल और स्टेशन के पास की खाई। यह जगह थी मध्य प्रदेश के खंडवा शहर का गणेश तलई इलाका। उसने ज़ूम करके उन गलियों को पहचाना, जहाँ वो बचपन में चला करता था।

वो भारत आया और उस शहर की गलियों में घूमते-घूमते अपने घर तक पहुँच गया। घर का दरवाज़ा बंद था, तो उसे डर लगा कि शायद सब कुछ खत्म हो चुका है। तभी कुछ लोग बाहर आए और उसे एक औरत के पास ले गए।

वो उसकी माँ थी। उसने 25 साल तक अपने बेटे की तलाश नहीं छोड़ी थी। इतने सालों बाद दोनों आमने-सामने खड़े थे।
उसे तब पता चला कि उसका भाई, जिसका वो उस रात इंतज़ार कर रहा था, ट्रेन से टकराकर मर गया था।

उसकी माँ ने दोनों बेटों को 25 साल तक ढूंढा — एक के बारे में सच्चाई पता चल गई, लेकिन दूसरे के लिए उसने उम्मीद कभी नहीं छोड़ी।

उसकी कहानी पर किताब A Long Way Home लिखी गई, और बाद में इस पर फिल्म Lion बनी, जिसे 6 ऑस्कर नॉमिनेशन मिले।

(साभार पोस्ट)

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