08/08/2025
सुन्नत मुहब्बत का तकाज़ा यह है कि
महबूबे कायनात सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की हर सुन्नत को मुहब्बत से अपनाया जाए।
उनकी एक-एक अदा पर दिल फिदा किया जाये।
जान कुरबान की जाये।।
अकीदत के फूल सुन्नत की पैरवी की सूरत में नोछावर किये जायें। जिस तरह आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम चलते थे, उसी तरह चला जाये जिस तरह आप सलाम कहते थे,
उसी तरह सलाम कहा जाये।
जिस तरह आप मुसाफ़ह करते थे,
उसी तरह मुसाफह किया जाये।
जिस तरह आप गले मिलते थे, उसी तरह गले मिला जाये जिस तरह आप खाना तनावुल फरमाते थे,
उसी तरह खाना खाया जाये।
जिस तरह आप पीते थे, उसी तरह पिया जाये।
जिस तरह आप सोते थे, उसी तरह सोया जाये।
जैसा आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कपड़ा पहनते थे, वैसा ही कपड़ा पहना जाये।
जिस तरह आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सफर में जाते और फिर वापस तशरीफ़ लाते, वैसा ही सफ़र पसन्द किया जाये और वापस आया जाये।
जिस तरह आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम नमाज़ पढ़ते, उसी तरह नमाज़ पढ़ी जाये।
रुकूअ, सुजूद, कयाम, कअदा आपकी पैरवी में किया जाये। जिस तरह हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के हुजूर रात को सज्दे में रोते थे, उसी तरह रोया जाये।
जिस तरह हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने लोगों के हक अदा किये, उसी तरह लोगों के हुकूक़ अदा किये जायें।
गर्ज़ ये कि ज़िन्दगी की हर चीज़ को उसी तरह अपनाना चाहिये जिस तरह हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनाया, इस तरह हमारा खाना-पीना, सोना, उठना-बैठना, चलना -फिरना, सफर करना, रोज़ी कमाना, कपड़े पहनना, खुशबू लगाना, तेल और कंघी करना, गर्ज़ ये कि हर काम जो भी सुन्नत की पैरवी के तरीके पर करेंगे वह नेकी बन जायेगा। पेट हमने अपनी गर्ज़ के लिये भरा पानी अपने जिस्म की सलामती के लिये पिया, आराम अपने सुख के लिये किया। कपड़ा अपने जिस्म को ढाँकने के लिये पहना, जूता अपने पाँव की हिफाज़त के लिये इस्तेमाल किया,
किसी की मेहमान नवाज़ी अपने तअल्लुकात और दोस्ती की बुनियाद पर की मगर अल्लाह के हुजूर में वह नेकियाँ बन गई क्योंकि सिर्फ इन्हें हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पैरवी में कीं इसलिये मेरे दोस्त याद रखो कि जो काम भी हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नक्शे कदम पर चलते हुए करेंगे वह अल्लाह के यहाँ कुबूल होगा।
और रोज़े कयामत उसका बहुत अज्र मिलेगा।
अल्लाह हम सबको कहने सुनने से ज्यादा अमल की तौफ़ीक़ दे आमीन
(आदाब ऐ सुन्नत पेज नम्बर 05 06)