Sameer Ali

Sameer Ali मिट जाए गुनाहो का तसव्वुर ही दुनिया से
अगर हो जाए यकीन की अल्लाह देख रहा है,

तेरे दिन अच्छे हैं, सो हम से किनारा कर लो,हम   बुरे   लोग  बुरे  वक़्त  में काम आते हैं।
20/08/2025

तेरे दिन अच्छे हैं, सो हम से किनारा कर लो,
हम बुरे लोग बुरे वक़्त में काम आते हैं।

तुम गर्मी देख कर चाय छोड़ कर जाने वाले,हमें   सिखाओगे  वफ़ा   कैसे   करते   हैं।
19/08/2025

तुम गर्मी देख कर चाय छोड़ कर जाने वाले,
हमें सिखाओगे वफ़ा कैसे करते हैं।

छोड़  दी  है अब  हमने वो फनकारी वरना ,तुझ जैसे हसीन तो हम कलम से बना देते थे ।।
19/08/2025

छोड़ दी है अब हमने वो फनकारी वरना ,

तुझ जैसे हसीन तो हम कलम से बना देते थे ।।

कौन रोता है ता आल्लुक को ता देर तकसब चले जाते है बस एक सिपारा पढ़ के !!
19/08/2025

कौन रोता है ता आल्लुक को ता देर तक

सब चले जाते है बस एक सिपारा पढ़ के !!

“मर्द” ❣️👇🏻         कभी अपनी मोहब्बत का इज़हार लफ़्ज़ों में नहीं कर सकता उसे करना ही नहीं आता या फिर सिखाया ही नहीं जाता...
18/08/2025

“मर्द” ❣️👇🏻

कभी अपनी मोहब्बत का इज़हार लफ़्ज़ों में नहीं कर सकता उसे करना ही नहीं आता या फिर सिखाया ही नहीं जाता।
वो कभी अपनी माँ को नहीं बता पाता कि उसे, उनके बग़ैर घर बोहोत अधूरा लगता है।
वो कभी अपनी बहन को नहीं बोल पाता कि उसे उसकी शरारतें अच्छी लगती हैं।
वो अपनी बीवी को नहीं बोल पाता कि उसकी वजह से उसका ईमान महफ़ूज़ है।
वो अपनी बेटी को नहीं बता पाता कि उसने कितनी दुआ़एँ की थी, कि रब उसको रहमत से नवाज़े।

गर्ज़ यह कि मर्द को लफ़्ज़ी मोहब्बत करना ही नहीं आता,
वो हमेशा अ़मली और मज़बूत मोहब्बत करता है और उसी मोहब्बत के इज़हार के लिए वो अपनी ज़ात पर हर तकलीफ़ सहता है कि उसकी मोहब्बतें महफ़ूज़ रह सके।❤‍🩹

08/08/2025

सुन्नत मुहब्बत का तकाज़ा यह है कि
महबूबे कायनात सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की हर सुन्नत को मुहब्बत से अपनाया जाए।
उनकी एक-एक अदा पर दिल फिदा किया जाये।
जान कुरबान की जाये।।
अकीदत के फूल सुन्नत की पैरवी की सूरत में नोछावर किये जायें। जिस तरह आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम चलते थे, उसी तरह चला जाये जिस तरह आप सलाम कहते थे,
उसी तरह सलाम कहा जाये।
जिस तरह आप मुसाफ़ह करते थे,
उसी तरह मुसाफह किया जाये।
जिस तरह आप गले मिलते थे, उसी तरह गले मिला जाये जिस तरह आप खाना तनावुल फरमाते थे,
उसी तरह खाना खाया जाये।
जिस तरह आप पीते थे, उसी तरह पिया जाये।
जिस तरह आप सोते थे, उसी तरह सोया जाये।
जैसा आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कपड़ा पहनते थे, वैसा ही कपड़ा पहना जाये।
जिस तरह आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सफर में जाते और फिर वापस तशरीफ़ लाते, वैसा ही सफ़र पसन्द किया जाये और वापस आया जाये।
जिस तरह आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम नमाज़ पढ़ते, उसी तरह नमाज़ पढ़ी जाये।
रुकूअ, सुजूद, कयाम, कअदा आपकी पैरवी में किया जाये। जिस तरह हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के हुजूर रात को सज्दे में रोते थे, उसी तरह रोया जाये।
जिस तरह हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने लोगों के हक अदा किये, उसी तरह लोगों के हुकूक़ अदा किये जायें।
गर्ज़ ये कि ज़िन्दगी की हर चीज़ को उसी तरह अपनाना चाहिये जिस तरह हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनाया, इस तरह हमारा खाना-पीना, सोना, उठना-बैठना, चलना -फिरना, सफर करना, रोज़ी कमाना, कपड़े पहनना, खुशबू लगाना, तेल और कंघी करना, गर्ज़ ये कि हर काम जो भी सुन्नत की पैरवी के तरीके पर करेंगे वह नेकी बन जायेगा। पेट हमने अपनी गर्ज़ के लिये भरा पानी अपने जिस्म की सलामती के लिये पिया, आराम अपने सुख के लिये किया। कपड़ा अपने जिस्म को ढाँकने के लिये पहना, जूता अपने पाँव की हिफाज़त के लिये इस्तेमाल किया,
किसी की मेहमान नवाज़ी अपने तअल्लुकात और दोस्ती की बुनियाद पर की मगर अल्लाह के हुजूर में वह नेकियाँ बन गई क्योंकि सिर्फ इन्हें हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पैरवी में कीं इसलिये मेरे दोस्त याद रखो कि जो काम भी हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नक्शे कदम पर चलते हुए करेंगे वह अल्लाह के यहाँ कुबूल होगा।
और रोज़े कयामत उसका बहुत अज्र मिलेगा।
अल्लाह हम सबको कहने सुनने से ज्यादा अमल की तौफ़ीक़ दे आमीन

(आदाब ऐ सुन्नत पेज नम्बर 05 06)

08/08/2025

जूं जूं साइंस तरक्की करती गई नित नई खोजें और ईजादात सामने आती गईं। ये तो सब जानते हैं कि इन ईजादात ने इंसान को बहुत फायदा और सहूलत दी मगर इनके जो जहरीले असरात से इंसानियत को जो नुकसान पहुंचा है उन पर अक्सर लोगों की तवज्जोह नहीं । कैमरा, टीवी और मोबाइल ने जो तबाही बरपा की है वो किससे छुपी है। कैमरे का सबसे खतरनाक और जहरीला इस्तेमाल बेहयाई फैलाने के लिए किया। इसके जरिए बेहुदा, गंदी और अखलाक का कत्ल कर देने वाली तस्वीरें और फिल्में बनाईं और उसे टीवी पर दिखाई और शैतान मरदूद ने टीवी की तरफ लोगों को ऐसा खीचा कि हर घर में लोगों ने टीवी लगा डाली और अब घर का घर एक साथ बैठ कर लव सीन, रोमांस सीन देखने लगा।
एक मजबूरी तो यहाँ थी कि जो दिखाया जाता वही देखना पड़ता था मगर जब मोबाइल और इंटरनेट आया तो अब ये पाबंदी न रही। अब हर एक के हाथ मे एक एक मोबाइल आ गया कि सब (म'आज़ अल्लाह) जो जी मे आया देखने लगे। जब लव सीन और रोमांस सीन देखते जी धर गया तो अब नफ्स ने चाहा कि कुछ फहश देखा जाए। फिर तो म'आज़ल्लाह जो सर्च किया वो घिनोना मैटर मिल गया। नंगी तस्वीरों और फिल्मों ने एक आग बदन में लगा दी। अभी शादी तो हुई नहीं और जिना से बदनामी का डर भी है तो ये नौजवान अपनी शहवत को मिटाने के लिए अपनी जवानी हाथ से बर्बाद करने पर उतारू हो जाता है। और एक वक्त आता है जब वो इस लत का आदी हो चुका होता है।
गौर किया जाए तो इसकी इब्तेदा यानी शुरुआत नज़र से हुई।
आंख ने देखा, दिल में खयाल पैदा हुआ, नफ्स ने उकसाया, हाथ पांव ने हरकत की और शर्मगाह ने जुर्म को पूरा कर दिखाया। लिहाजा अगर आंख यानी नज़र की हिफाजत कर ली जाए तो यकीनन इस बद फे'ली से बचा जा सकता है।
अल्लाह हम सबको अमल की तौफीक दे
आमीन

अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाही व बरकातोहू ☆☆---☆सब दिनों का सरदार ....---✿नबीये करीम सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम का फरमा...
24/03/2022

अस्सलामु अलैकुम
व रहमतुल्लाही
व बरकातोहू ☆☆
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☆सब दिनों का सरदार ....
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✿नबीये करीम सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम का फरमाने बा करीना है ----
जुमुआ का दिन तमाम दिनों का सरदार है , और अल्लाह के नजदीक सबसे बड़ा है , और वह अल्लाह के नजदीक ईद उल अज़हा और ईद उल फ़ित्र से बड़ा है , इसमें पांच (5) खसलते है , :
●1/- अल्लाह ताला ने इसी में आदम अलैहिस्सलाम को पैदा किया और
●2/- इसी में ज़मीन पर उन्हें उतरा और
●3/- इसी में उन्हें वफ़ात दी और
●4/- इसमें एक सआदत ऐसी है की बाँदा उस वक़्त जिस चीज़ का सुआल करेंगा वह उसे देंगा जब तक हराम का सुआल न करे और
●5/- इसी दिन में क़यामत क़ायम होंगी
कोई मुक़र्रर फरिश्ता व आसमान व ज़मीन और हवा व पहाड़ और दरिया ऐसा नहीं की जुमुआ के दिन से डरता न हो
📚 (سنن ابن ماجه ج ۲ ص۸حديث ١٠٨٤)

19/03/2022
27/02/2022

☆अगर तुम में से कोई मुझे सलाम करता है तो मैं.....
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♥अबू हुरैरा रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की
रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमाया-
अगर तुम में से कोई मुझे सलाम करता है तो
अल्लाह सुबहानहु मेरी रूह को वापस लौटा देता है
और मैं उसके सलाम का जवाब देता हूँ
(सुनन अबू दाऊद, जिल्द 2, 273-हसन)
(अत-तबरानी , 3187-सही)
(अल बेहिक़ी, 9519-सही)
(मसनद अहमद, 10590-हसन)
`
♥अब्दुल्लाह रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है
की रसूल-अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमाया-
बेशाक़ अल्लाह के फरिश्ते ज़मीन में घूमते रहते हैं और मेरी उम्मत का सलाम मुझ तक पहुचाते हैं
📚 (सुनन नसाई,जिल्द 2, 1285-सही)
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⚠नोट :- पोस्ट ज़रूर शेअर करें और हमेशा जारी रहने वाले सवाब ए जारीया के हक़दार बने।

27/02/2022

#अल्लाह की कुदरत : जुगनू में अल्लाह की निशानी का एक बेहतरीन करिश्मा

अल्लाह तआला ने इस ज़मीन में सैकड़ों किस्म के जानदार बनाए हैं और हर जानदार की खासियत अलग अलग है , हम अगर अपनी ताकत से एक छोटा सा बल्ब भी जलाना चाहे तो बगैर बिजली के नही जला सकते ,

लेकिन अल्लाह तआला ने सिर्फ अपनी कुदरत से एक छोटा सा कीड़ा ” #जुगनू ” बनाया जो अपने अंदर रौशनी ले कर चलता है , यह अल्लाह की कुदरत का एक ज़बरदस्त करिश्मा है ।

27/02/2022

"सू ए तैबा" ये समझकर हैं जमाने जाते
ये वो रोज़ा है जहाँ दिल नही तोड़े जाते!!!
मेरे आक़ा व मौला (सल्लल्लाहु व अलैही वसल्लम) 💕💕💕💕💕💕💕💕

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