18/01/2026
गुज़रे हुऐ लम्हों के ख़यालात की ख़ुश्बू !
बरसात की उस रात के जज़्बात की ख़ुश्बू !!
उफ़ चाँद सितारों की ग़ज़ल ख़्वानी का आलम !
एहसासे मुहब्बत में वो नग़्मात की ख़ुश्बू !!
जब हुस्न कभी इश्क़ में तहलील हुआ था !
सांसों में है अब तक उन्हीं लम्हात की ख़ुश्बू !!
बेचैन हवाऐं हैं जो इस दौरे ख़िज़ां में !
शायद इन्हें आने लगी बरसात की ख़ुश्बू !!
छाया है फ़ज़ाओ में नशा आज भी तन्हा !
महसूस मुझे होती है उस रात की ख़ुश्बू !!
रेहान मुबारक तन्हा