karwan e Alfaz

karwan e Alfaz Yeh page mere dil se bani hui kalpana ko aur apane gujarte pal ki dastano ko vyakt kar raha hu.

21/04/2026

मिल ही जायेगा वो कभी ना कभी।
ये दिल उदास, उदास, क्यों रहता है।
हमने सुना है वो इसी शहर में रहता है।।
बेहक जाना इंसान फितरत़ में।
जानें कब बदले वक्त का मिज़ाज।।
कौन कब तक दिल को संभाले रहता है।

12/04/2026

मेरी मोहब्बत के अफस़ाने बाकी हैं।
कहां कुछ आसान है यारों।।
अब दिल में उतारा ना बाकी है।
मोहब्बत में खुदा कह दिया उन को।
फ़लक से ज़मीं पर उतारना बाकी हैं।।

04/04/2026

तुम जो मुस्कुरा कर चल दिए।
हमने जलते हुए चरागों को बुझा दिए।।
संभाले रखा था उन तस्वीरों को दिल में।
जिन तस्वीरों को तुम ने दिवारों से उतार है।

02/04/2026

चराग़ जलते रहे सारी रात।
परवानें आते रहे जलते रहे सारी रात।।
सुना था इश्क आग हैं फिर भी हम।
गले मिलते रहे सारी रात हम।।

02/04/2026

चराग़ जलते रहे सारी रात।
परवानें आते रहें सारी रात।।
सुना था इश्क आग हैं फिर भी हम।
गले मिलते रहे सारी रात।

28/03/2026

सवालों में लिपटा जवाब हूं।
तुम अगर बढ़ सको तों।।
मैं खुला किताब हूं।
कोई क्या समझें मुझ को।
मैं दर्द का सैलाब हूं।।

24/03/2026

अब रोज, रोज आईना दिखायें कौन।
असली चेंहरा दिखायें गा कौन।।
सुबह हुंई है रात भी होंगी।
दिन में तारें गिनता कौन।।
पत्थर तो फिर भी पत्थर है।
पत्थर दिल में बसता कौन।।

21/03/2026

सारे ग़म ऐक तरफ़ हों।
सिर्फ एक इशारा मेरी तरफ़ हों।।
आ जाऊंगा तुम्हारी तरफ़।
जैसे ऐक दरिया हो।।
बातें सिर्फ आंखों से।
हर इशारा मेरी तरफ़ हों।

19/03/2026

ऐक भूखे को तूं ने दर से लौटाया हैं।
अब भगवान् को मना लें तो जानू।।
किसी गरीब को सताना आसान है।
किसी अमीर को सता ले तो जानू।।
झूठ के सहारे बहुत जी चुके है।
अब सच का सामना करो तो जानू।।
माना के दुनियां में फरेब़ है।
तूं फरेब़ छोड़ कर जी तो मैं जानू।।

17/03/2026

अजीब सा दर्द ठहर क्यों नहीं जाता।
जो सह नहीं सकता ‌‌।।
वो वक्त गुजर क्यों नहीं जाता।
जों ख्वाब मुकम्मल ना हो
वो हंवाओ में बिखर क्यों नहीं जाता।

12/03/2026

बिना दर्द के दर्द बतायें कौन।
मतलबी रिश्तों को देर तक निभायें कौन।।
ये पत्थर के शहर पत्थर के लोग।
इस सुलगते हुए शहर में।।
इंसानियत को ढूंढें कौन।

10/03/2026

ये तंज़ कशी है या।
उसे अपनी जवानी का शुरूर।
ये सब पे चढ़ता है ज़रूर।
उस नशें में ऐसा चढ़ा।।
आज जाके टूटा मेरा गुरूर।

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