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karwan e Alfaz Yeh page mere dil se bani hui kalpana ko aur apane gujarte pal ki dastano ko vyakt kar raha hu.

15/06/2026

लोग रिश्ते निभा रहे हैं।
औकात देख कर।
दामन छुड़ा रहे हैं लोग।
हैसियत देख कर।
चराग़ जला कर छोड़ दिया हमने।
हवां का मिज़ाज देखकर।

28/05/2026

यें दिले नांदा।
जानें क्यों ग़मों का बोंझ सहता है।।
हर चेहरें पे नकाब यहां।
ना कोई मेरा ना कोई तेरा है।
फूलों की चाहत सभी को यहां।।
कांटों से यारी ना तेरी ना मेरी है।

25/05/2026

वक्त तो रेंत की तरह है।
हाथों में निकलता ही जाएगा।।
जिंदगी एक सफ़र है यहां।
गुज़रता ही चला जायेगा।
इस सफ़र में कुछ रिश्ते भी होंगे।।
कुछ ख़ास तो कुछ समतल होंगे।
बढ़ कर थाम लेना हर रिश्तों को।।
लौट कर कोई नहीं आएगा।

22/05/2026

नज़र से गिरावो मगर।
थोड़ा संभला कर।।
दुश्मनों से भी वफ़ा निभावो।
कभी अपना समझ कर।।
लौट आते हैं पंरिदे भी।
दरों बाम अपना समझ कर।।

13/05/2026

ना कुरेदो इन ज़ख्मों को।
भर ना पावोगें तुम।।
सिल सिलें दूर तलक जायेंगे।
सह ना पावोगे तुम।।
चेहरें पे चेंहरे लगा रखें हैं लोग।
चाह कर भी कुछ कह ना पावोगें तुम।

10/05/2026

यकि नहीं ग़र मुझ पे।
बार, बार, आज़मायें मुझे।।
मैं वो चराग़ जो आंधियों में रोशन हूं।
यें हवाओं तुम बुझा सको तो सुझावों मुझे।।

10/05/2026

सारे उल्लू आ बैठे ऐक ही डाल पर।
परेशां है वो मेरे चंद सवालों पर।।
देश को ला दिया है।
दो धारी तलवारों पर।।
अब ख़तरा मंडरा रहा है।
जनता के कपालों पर।

26/04/2026

दिल में ज़रा भी गुम़ा ना हुआ।
वो इतने करीब हो कर भी मेरा ना हुआ।
चलता रहा थक़न भरें सफ़र में।
फिर भी मैं कभी बद गुमा ना हुआ।

21/04/2026

मिल ही जायेगा वो कभी ना कभी।
ये दिल उदास, उदास, क्यों रहता है।
हमने सुना है वो इसी शहर में रहता है।।
बेहक जाना इंसान फितरत़ में।
जानें कब बदले वक्त का मिज़ाज।।
कौन कब तक दिल को संभाले रहता है।

12/04/2026

मेरी मोहब्बत के अफस़ाने बाकी हैं।
कहां कुछ आसान है यारों।।
अब दिल में उतारा ना बाकी है।
मोहब्बत में खुदा कह दिया उन को।
फ़लक से ज़मीं पर उतारना बाकी हैं।।

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