21/02/2024
नीचता:---
नीच नीचता त्यागे कोनी,
कितना ही सत्कार करो,
काजल नाही सफ़ेद होवे रे भाई,
नित्त कोशिश हज़ार करो।
काजल नाही सफ़ेद होवे रे भाई,
नित्त कोशिश हज़ार करो।नीचे से जड़ काटन आळा,
मुख पर मीठी बात करे,
धोखा देकर गला काट दे,
दाव देखकर घात करे,
मात पिता से करे लड़ाई,
रोज खड़ा उत्पात करे,
बिना बुलाए पर घर जाकर,
मुख देखी पंचायत करे,
बेईमानों से बच कर रहना,
कभी नहीं व्यवहार करो,
काजल नाही सफ़ेद होवे रे भाई,
नित्त कोशिश हज़ार करो।
नीच नीचता त्यागे कोनी,
कितना ही सत्कार करो,
काजल नाही सफ़ेद होवे रे भाई,
नित्त कोशिश हज़ार करो।अपने आप बड़ाई करके,
असली दोष छिपा लेते,
दो आने के लालच में पड़,
झूठा धर्म उठा लेते,
मतलब होय पेट में बड़कर,
धोका दे धन खा लेते,
बिना मतलब से मुख ना बोले,
अपनी नज़र छुपा लेते,
दे विश्वास दगा दे जाते,
कितना चाहे प्यार करो,
काजल नाहीं सफ़ेद होवै रे भाई,
नित्त कोशिश हज़ार करो।
नीच नीचता त्यागे कोनी,
कितना ही सत्कार करो,
काजल नाही सफ़ेद होवे रे भाई,
नित्त कोशिश हज़ार करो।मन में रखता बेईमानी रै,
ऊपर बात सफाई की,
कपट फंद छल धोका देकर,
नाड़ काट दे भाई की,
बहन भाणजी समझे कोणी,
कोणी साख जमाई की,
मण भर दूध फाड़ सकती है,
देखो बून्द खटाई की,
बाण कुबान दुष्ट ना छोड़े,
कितना ही उपकार करो,
काजल नाहीं सफ़ेद होवै रे भाई,
नित्त कोशिश हज़ार करो।
नीच नीचता त्यागे कोनी,
कितना ही सत्कार करो,
काजल नाहीं सफ़ेद होवै रे भाई,
नित्त कोशिश हज़ार करो।काग कुटिलता त्यागे कोनी,
हँसा बीच बैठाय देखो,
अपनी आदत छोड़े कोनी,
सोने में चौंच मंढा देखो,
जहरी नाग जहर नहीं त्यागे,
चाहे दूध पिला देखो,
काला उपर रंग दूसरा,
चढ़ता नाहीं चढा देखो,
हरि नारायण हरि गुण गाओ,
भवसागर बेडा पार करो,
काजल नाहीं सफ़ेद