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16/06/2026

👉त्रेतायुग में, जब भगवान राम वनवास में थे, तब उनकी मुलाकात सुग्रीव से हुई। सुग्रीव ने अपने भाई बाली से मदद मांगी थी, लेकिन बाली ने उसे राज्य से निकाल दिया था।
👉राम ने सुग्रीव की सहायता करने का वचन दिया। जब बाली और सुग्रीव के बीच युद्ध हुआ, तब भगवान राम ने छिपकर बाली पर बाण चला दिया।
मरते समय बाली ने राम से प्रश्न किया—
“आपने सामने से युद्ध क्यों नहीं किया?”
राम ने धर्म और कर्तव्य का उत्तर दिया, लेकिन बाली के मन में यह घटना एक अधूरी पीड़ा बनकर रह गई।
👉🔁 कृष्ण और जरा की कथा (दूसरा जन्म)
द्वापर युग के अंत में, भगवान कृष्ण ने अपना अवतार समाप्त करने का समय चुना।
वन में ध्यान करते समय, उनके पैर का एक हिस्सा झाड़ियों में चमक रहा था। उसी समय जरा नाम का एक शिकारी वहां शिकार की तलाश में था।
जरा ने उस चमकते हुए भाग को हिरण समझकर तीर चला दिया, जो कृष्ण के पैर में जा लगा।
जब जरा पास आया, तो उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और वह रोने लगा।
तब भगवान कृष्ण ने मुस्कुराकर कहा—
“यह सब पूर्व जन्म के कर्मों का फल है।”
कहा जाता है कि यही जरा, पिछले जन्म का बाली था।
👉⚖️ इस कथा का गहरा अर्थ
कर्म का फल अवश्य मिलता है, चाहे समय कितना भी क्यों न बदल जाए।
भगवान भी अपने बनाए नियमों (कर्म और धर्म) से ऊपर नहीं जाते।




15/06/2026

जब कंस को यह भविष्यवाणी मिली कि देवकी का आठवां पुत्र उसकी मृत्यु का कारण बनेगा, वह भय से पागल हो गया। उसने कई नवजात शिशुओं की हत्या कर दी और गोकुल के बच्चों को मारने का आदेश दिया।
इसी आदेश पर राक्षसी पूतना गोकुल आई। वह सुंदर स्त्री का रूप धारण कर सकती थी, इसलिए किसी को उस पर शक नहीं हुआ। माता यशोदा भी उसे पहचान नहीं पाईं।
पूतना ने अपने स्तनों पर विष लगाया और बालक कृष्ण को दूध पिलाने लगी, ताकि उन्हें मार सके।
लेकिन कृष्ण ने दूध के साथ उसकी जीवन शक्ति भी खींच ली।
कुछ ही क्षणों में वह अपने असली रूप में आ गई और उसका विशाल शरीर धरती पर गिर पड़ा। गोकुल में हाहाकार मच गया, लेकिन कृष्ण सुरक्षित रहे।
👉 सबसे अद्भुत बात — पूतना को मोक्ष मिला।
क्योंकि उसने कृष्ण को माँ की तरह स्तनपान कराया था, और भगवान ने उसके भाव को स्वीकार किया।
👉पूतना का पूर्व जन्म
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, पूतना का पूर्व जन्म राजा बलि की पुत्री रत्नमाला के रूप में हुआ था।
जब भगवान वामन बाल ब्राह्मण के रूप में राजा बलि के पास आए, तब रत्नमाला ने उन्हें देखा।
उनका सुंदर, मासूम रूप देखकर उसके मन में ममता जागी और उसने सोचा:
👉 “काश मुझे ऐसा प्यारा बालक मिलता, जिसे मैं अपने दूध से पालती।”
लेकिन जब वामन ने तीन पग में पूरा राज्य ले लिया, तब रत्नमाला के मन में क्रोध आ गया।
उसने सोचा:
👉 “अगर यह मेरा बच्चा होता, तो मैं इसे मार देती!”
⚖️ यही दो भाव — ममता और क्रोध — उसके अगले जन्म का कारण बने।
इसीलिए वह पूतना बनी —
जिसमें एक माँ का भाव भी था और हत्या की मंशा भी।
अंत में, भगवान कृष्ण ने उसके अच्छे भाव को स्वीकार किया और उसे मोक्ष दे दिया।
💡 यही सीख है:
भगवान केवल हमारे कर्म नहीं, बल्कि हमारे दिल के भाव भी देखते हैं।




15/06/2026

हर हर महादेव 🙏🙏🙏
जय बजरंगबली 🙏🙏🙏




14/06/2026

महाभारत के अंत के बाद…
जब श्री कृष्ण इस धरती से चले गए,
तब सब कुछ बदल गया।

अर्जुन, जो कभी कुरुक्षेत्र में अजेय था,
जिसके गांडीव के सामने महारथी भी टिक नहीं पाए…
वही अर्जुन द्वारिका की यदुवंशी स्त्रियों और बच्चों को
सुरक्षित हस्तिनापुर ले जा रहा था।

लेकिन रास्ते में…
कुछ साधारण लुटेरों ने हमला कर दिया।

अर्जुन ने गांडीव उठाया…
पर इस बार वह पहले जैसा नहीं था।
दिव्य अस्त्र शांत हो चुके थे,
तरकश के बाण भी जैसे साथ छोड़ चुके थे।

और वो महान धनुर्धर…
एक साधारण काबा के सामने हार गया।

क्योंकि इस बार न समय साथ था…
न श्री कृष्ण।

बाद में महर्षि वेद व्यास ने समझाया—
यह सब नियति थी, समय का खेल था…
ताकि अर्जुन समझ सके कि
शक्ति, ज्ञान और विजय भी
समय के आगे कुछ नहीं।

समय सबसे बलवान है।




13/06/2026

कृष्ण को “रणछोड़” इसलिए कहा गया क्योंकि उन्होंने युद्ध से भागने का फैसला लिया…
लेकिन सच यह है कि वो भागे नहीं, बल्कि अपने लोगों को बचाने के लिए एक बड़ी रणनीति बना रहे थे।

जब जरासंध और कालयवन ने मथुरा पर हमला किया,
तो कृष्ण ने सीधे युद्ध करने के बजाय कालयवन को अपने पीछे दौड़ाया
और उसे एक गुफा में ले गए…

वहां राजा मुचुकुंद सो रहे थे, जिन्हें वरदान था—
जो भी उन्हें जगाएगा, वह उनकी नजर से भस्म हो जाएगा।

कालयवन ने उन्हें कृष्ण समझकर जगा दिया…
और अगले ही पल वह राख बन गया।

इधर कृष्ण ने मथुरा की प्रजा को सुरक्षित द्वारका पहुंचा दिया।

इसलिए याद रखो—
हर बार लड़ना ही जीत नहीं होती,
कभी-कभी सही समय पर पीछे हटना ही सबसे बड़ी जीत होती है।




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