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लालची कुत्ते की कहानी |एक गांव में एक लालची कुत्ता रहता था। वह गांव में घूम-घूमकर खाने की तलाश करता था। वह इतना लालची था...
27/05/2023

लालची कुत्ते की कहानी |
एक गांव में एक लालची कुत्ता रहता था। वह गांव में घूम-घूमकर खाने की तलाश करता था। वह इतना लालची था कि उसे जितना भी खाने के लिए मिलता था, उसे कम ही लगता था।

गांव के दूसरे कुत्तों के साथ पहले उसकी अच्छी दोस्ती थी, लेकिन उसकी इस आदत की वजह से सभी उससे दूर रहने लगे, लेकिन उसे कोई फर्क नहीं पड़ा, उसे सिर्फ अपने भाेजन से मतलब था। कोई न कोई आते जाते उसे खाने के लिए कुछ न कुछ दे ही देता था। उसे जो खाने को मिलता उसे वो अकेले ही चट कर जाता।एक दिन उसे कहीं से एक हड्डी मिल गई। हड्डी को देखकर उसकी खुशी का ठिकाना न रहा। उसने सोचा कि इसका आनंद तो अकेले ही लेना चाहिए। यह सोचकर वो गांव से जंगल की ओर जाने लगा।
रास्ते में वह पुल के ऊपर से नदी पार कर रहा था, तभी उसकी नजर नीचे नदी के ठहरे हुए पानी पर पड़ी। उस समय उसकी आंखों में सिर्फ हड्डी का लालच था। उसे यह भी पता नहीं चला कि नदी के पानी में उसका ही चेहरा नजर आ रहा है।उसे लगा की नीचे भी कोई कुत्ता है, जिसके पास एक और हड्डी है। उसने सोचा कि क्यों न उसकी भी हड्डी छीन लूं, तो मेरे पास दो हड्डियां हो जाएंगी। फिर मैं एक साथ दो हड्डियों के मजे से खा सकूंगा। ऐसा सोचकर वह जैसे ही पानी में कूदा, उसके मुंह से हड्डी सीधे नदी में जा गिरी।

मुंह से छुटकर हड्डी के पानी में गिरते ही कुत्ते को होश आया और उसे अपने किए पर पछतावा हुआ।

जून का महिना था चिलचिलाती धुप में रामलाल अपने मनमे बडबडाता हुआ जा रहा था। धुप इतनी तेज थी की जमीन भी आग सी तप रही थी, रा...
26/05/2023

जून का महिना था चिलचिलाती धुप में रामलाल अपने मनमे बडबडाता हुआ जा रहा था। धुप इतनी तेज थी की जमीन भी आग सी तप रही थी, रामलाल के पैर में चंपल भी नहीं थी। वो नंगे पैर लम्बे लम्बे पगों से आगे बढ़ता जा रहा था। उसको अपनी नहीं बल्कि अपने खेतो की बहोत ज्यादा फिक्र थी। जंगली भुंडो के झुण्ड खेतो में आते थे और कुछ ही मिनीटो में खेत को नहस तहस कर देते थे।

रामलाल के खेत में इस साल बहोत ही अच्छी तरबुचे की फसल लगी थी। जिसे देखकर उसकी जान में जान आती थी। उसके पास पैसा नहीं था। लेकिन उसने गाव के ही एक जमीनदार से पैसा उधार लिया हुआ था। जिस पर जमीनदार का ब्याज बहोत तेजी से बढ़ रहा था। रामलाल मन ही मन में सोच रहा था। इस बार तरबुचे बेचकर जमीनदार का सारा कर्ज चुकाऊंगा। और इसके बाद अपनी बीबी के लिए एक अच्छी सी साड़ी और अपने लिए एक कुर्ता खरीद लूँगा। बच्चो के पास भी कपडे नहीं है। उन्हें भी कुछ न कुछ देना पड़ेगा। आगे शर्दी भी आने वाली है। जिसके लिए रजाई और कम्बल भी लेलेना पड़ेगा, वह यही सब अपने मन में बडबडाते हुए खेतो की तरफ जा रहा था। उसे अपने पैरो की फिक्र नहीं थी। आम आदमी तो ऐसी गरमी में नंगे पैर नहीं चल पाता। लेकिन रामलाल अपने मनमे सपने देखता हुआ अपने खेतो की और बढ़ता चला जा रहा था।

खेत के पास पहोचते ही रामलाल गदगद हो गया। खेत में बहोत अच्छी तरबुचे की फसल थी। वह हर समय खेत में ही आते जाते रहेता था। क्योकि अगर धोके से भी भुंड आ गया तो उसका पूरा का पूरा खेत कुछ ही समय में ख़त्म हो जाएगा। और उसके सपने मिटटी में मिल जायेगे। इसलिए रामलाल दिन में और रात में पूरा समय खेत में ही गुजारता था।

रामलाल की पत्नी भी फूली नहीं समां रही थी। क्योकि दस साल बाद उनके खेतो में इतनी अच्छी फसल लगी हुई थी। लेकिन गर्मी बहोत ज्यादा था।

जमींदार अक्षर आके रामलाल को धमकी देता रहेता था। फसल काट दो और मेरी पाई पाई चूका दो नहीं तो तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा। रामलाल ने हाथ जोड़कर कहा – इस साल खेत में फसल अच्छी लगी है साहब, मै आपका एक एक पैसा चूका दूंगा।तरबुचे की फसल लगभग तैयार थी। जीतनी ख़ुशी आज रामलाल को हो रही थी इनका अंदाजा लगाना आज मुश्किल था। वह मन ही मन में खुशी से झूम रहा था। लेकिन उसको पता था की अगर जरा सी भी हमसे चुक हुई तो मेंरा सबकुछ नष्ट हो जाएगा। रात में भी वह जरा सी आहट से भी उठ के बैठ जाता। अपने खेत में इधर उधर देखता और आकर फिर से सो जाता, उसकी नींद कभी पूरी नहीं हो पाती थी। उसके सपने में भी खेतो की याद बनी रहेती थी। अगर कहानी अच्छी लगे तो चैनल को फॉलो जरूर कर देना

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