09/06/2026
# **जो सत्य है, जो सुंदर है, वही कला है**
**"जो सत्य है, जो सुंदर है, वही कला है।"** यह केवल एक पंक्ति नहीं, बल्कि कला का सबसे सरल और सबसे गहरा परिचय है। कला कभी झूठ का सहारा नहीं लेती। वह मन की सच्ची भावनाओं को व्यक्त करती है। जहाँ सच्चाई होती है, वहीं सुंदरता अपने आप दिखाई देती है और वहीं से कला जन्म लेती है।
आज के समय में लोग अक्सर सुंदरता को केवल चेहरे या दिखावे से जोड़कर देखते हैं, जबकि असली सुंदरता इंसान के विचार, व्यवहार और उसके कर्म में होती है। ठीक उसी तरह कला भी केवल रंगों, ब्रश या वाद्ययंत्रों तक सीमित नहीं है। अच्छा बोलना, मधुर व्यवहार करना, किसी की मदद करना, प्रकृति से प्रेम करना और अपनी संस्कृति का सम्मान करना भी एक प्रकार की कला है।
कला हमें धैर्य सिखाती है। एक अच्छा चित्र एक दिन में नहीं बनता, मधुर संगीत एक दिन में नहीं सीखा जाता और न ही कोई नृत्य एक ही अभ्यास में पूर्ण हो जाता है। लगातार मेहनत, अभ्यास और सीखने की इच्छा ही एक साधारण विद्यार्थी को अच्छा कलाकार बनाती है।
आज तकनीक के इस दौर में कला सीखना पहले की तुलना में बहुत आसान हो गया है। **ऑनलाइन कला शिक्षा** के माध्यम से विद्यार्थी घर बैठे अनुभवी शिक्षकों से चित्रकला, संगीत, नृत्य, हस्तकला और अन्य कलाएँ सीख सकते हैं। वहीं **ऑफलाइन शिक्षा** में गुरु के सामने बैठकर सीखने का अपना अलग ही आनंद और महत्व है। वहाँ विद्यार्थियों को तुरंत मार्गदर्शन मिलता है, गलतियाँ तुरंत सुधरती हैं और अभ्यास का वातावरण भी बेहतर मिलता है।
इसलिए यदि संभव हो तो दोनों माध्यमों का लाभ उठाना चाहिए। ऑनलाइन माध्यम ज्ञान को घर-घर तक पहुँचाता है, जबकि ऑफलाइन शिक्षा कला की बारीकियों को और अधिक मजबूती से समझने का अवसर देती है। दोनों मिलकर सीखने की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाते हैं।
आज कला शिक्षा केवल शौक नहीं रह गई है, बल्कि यह सम्मानजनक रोजगार और स्वरोजगार का भी बड़ा माध्यम बन चुकी है। चित्रकला, संगीत, नृत्य, हस्तकला, डिजाइनिंग, डिजिटल आर्ट, मंच संचालन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित कलाकारों की लगातार आवश्यकता बढ़ रही है। सबसे अच्छी बात यह है कि कला हर किसी के बस की बात नहीं होती। जिसके पास प्रतिभा, लगन और सही प्रशिक्षण होता है, वही इस क्षेत्र में आगे बढ़ता है। इसलिए इस क्षेत्र में प्रतियोगिता भी अपेक्षाकृत कम होती है और अवसर अधिक मिलते हैं।
इसी प्रकार **योगासन** भी एक महत्वपूर्ण कला है। योग केवल शरीर को मोड़ने का अभ्यास नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन बनाने का माध्यम है। नियमित योग करने से शरीर स्वस्थ रहता है, मन शांत रहता है, एकाग्रता बढ़ती है और जीवन में अनुशासन आता है। आज विद्यालयों, महाविद्यालयों, खेल संस्थानों और स्वास्थ्य केंद्रों में प्रशिक्षित योग शिक्षकों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसलिए **योगासन का प्रशिक्षण** केवल स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि भविष्य में रोजगार और समाज सेवा का भी अच्छा माध्यम बन सकता है।
हर माता-पिता की यह इच्छा होती है कि उनका बच्चा पढ़ाई के साथ-साथ किसी एक ऐसी कला में भी निपुण बने, जिससे उसका व्यक्तित्व निखरे और भविष्य सुरक्षित हो। इसलिए बच्चों और युवाओं को कला तथा योग जैसी रचनात्मक विधाओं से अवश्य जुड़ना चाहिए।
याद रखिए, **कला केवल हाथों से नहीं, बल्कि दिल से निकलती है।** जब कलाकार अपनी रचना में सच्चाई, मेहनत और अच्छे विचारों को जोड़ देता है, तब उसकी कला लोगों के दिलों तक पहुँचती है। यही कारण है कि वर्षों बाद भी महान कलाकारों की रचनाएँ लोगों को प्रेरणा देती रहती हैं।
आइए, हम सभी यह संकल्प लें कि कला को केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि संस्कार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता का माध्यम बनाएँ। क्योंकि अंत में यही सत्य है—
**"जो सत्य है, जो सुंदर है, वही कला है।"**
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# # # **प्रेषक :**
**डॉ. विकाश कुमार**
**प्राचार्य**
**विकास ललित कला अकादमी**
न्याय मार्ग, श्रीनगर, सिवान (बिहार)
**संबद्ध : सुरों भारती संगीत कला केन्द्र, हुगली (पश्चिम बंगाल)**
**Centre Code : C-19-2228**