29/04/2025
मुलाक़ात नहीं तेरी मेरी बात ज़रूरी है. हाथों में हाथ नहीं मन का साथ ज़रूरी है
तुम अपना सुना सको.. हम कह सके अपना सा है ,मेरा कोई अपना ये एहसास ज़रूरी है
कौन समझेगा..??? क्या है रिश्ता हमारा.
कुछ ना हो कर भी. बहुत कुछ है हमारा.
ना जन्मों का बंधन. ना उम्मीदो का दामन..
ना पाने की चाहत. ना बिछड़ने का ग़़म.
कुछ तो है. जो हमें खींचते है दोबारा.
यूं ख्यालों में रहता है. तुम्हारा आना -जाना..
दुनिया के नजरों से परे. बेनाम सा रिश्ता है हमारा..
❤️