राब्ता

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कहो नरेंदर, मज़ा आ रहा? इलाबाद प्रयाग हो गयाऔर बनारस क्योटा धनीराम का खेत बिक गयाथार बचा ना लोटा टूटी चप्पल पहन के मनसुख...
12/07/2022

कहो नरेंदर, मज़ा आ रहा?

इलाबाद प्रयाग हो गया
और बनारस क्योटा
धनीराम का खेत बिक गया
थार बचा ना लोटा

टूटी चप्पल पहन के मनसुख
बोरा उठा रहा है
और हमारा देसी नीरो
बँसी बजा रहा है

डॉलर सर पे पाँव जमाये
मुँह के बल पड़ा रुपइया
और भक्त चिल्लाए रहे हैं
जय गंगा जय हो गइया

जो गंगा के लिए लड़ा
वो जीवन गंवा रहा है
और इधर मन-मौजी
मन की बातें सुना रहा है

देश हमारा कहाँ जा रहा!
कहो नरेन्दर, मज़ा आ रहा ?

11/07/2022

तुमको देखा तो ये ख़याल आया

तुमको देखा तो ये ख़याल आया
ज़िन्दगी धूप तुम घना साया

आज फिर दिल ने एक तमन्ना की
आज फिर दिल को हमने समझाया

तुम चले जाओगे तो सोचेंगे
हमने क्या खोया, हमने क्या पाया

हम जिसे गुनगुना नहीं सकते
वक़्त ने ऐसा गीत क्यूँ गाया

~ जावेद अख़्तर

मैं हवा में उड़ रहा हूँ ये कोई मसला नहीं जिसको जलना है जले वो मैंने तो रोका नहीं मुझको मेरे राम पर ये नाज़ था और नाज़ है...
02/07/2022

मैं हवा में उड़ रहा हूँ ये कोई मसला नहीं
जिसको जलना है जले वो मैंने तो रोका नहीं

मुझको मेरे राम पर ये नाज़ था और नाज़ है
उस समंदर से कोई पुल दूसरा गुज़रा नहीं

उज्ज्वल उजाला



🙏 🚩 🚩🚩

हाथो से इश्क के जब खज़ाने निकल गए,फिर हुआ यूं के हम भी कमाने निकल गएउसको भी बाद मेरे मुहब्बत नही हुईमुझको भी  भूलने में ...
01/07/2022

हाथो से इश्क के जब खज़ाने निकल गए,
फिर हुआ यूं के हम भी कमाने निकल गए
उसको भी बाद मेरे मुहब्बत नही हुई
मुझको भी भूलने में ज़माने निकल गए

क़ासिम रज़ा

भर के रखे हो जितना ज़हर तुम अपने घर मे उतना तो ज़हर भी नही होता है ज़हर मे  उज्जवल उजाला
29/06/2022

भर के रखे हो जितना ज़हर तुम अपने घर मे
उतना तो ज़हर भी नही होता है ज़हर मे

उज्जवल उजाला

25/06/2022



24/06/2022

23/06/2022
मैं जिसे ओढ़ता-बिछाता हूँवो ग़ज़ल आपको सुनाता हूँएक जंगल है तेरी आँखों मेंमैं जहाँ राह भूल जाता हूँतू किसी रेल-सी गुज़रत...
21/06/2022

मैं जिसे ओढ़ता-बिछाता हूँ
वो ग़ज़ल आपको सुनाता हूँ

एक जंगल है तेरी आँखों में
मैं जहाँ राह भूल जाता हूँ

तू किसी रेल-सी गुज़रती है
मैं किसी पुल-सा थरथराता हूँ

हर तरफ़ ऐतराज़ होता है
मैं अगर रौशनी में आता हूँ

एक बाज़ू उखड़ गया जबसे
और ज़्यादा वज़न उठाता हूँ

मैं तुझे भूलने की कोशिश में
आज कितने क़रीब पाता हूँ

कौन ये फ़ासला निभाएगा
मैं फ़रिश्ता हूँ सच बताता हूँ

~दुष्यंत कुमार

20/06/2022

शाम-एक किसान
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आकाश का साफ़ा बाँधकर
सूरज की चिलम खींचता
बैठा है पहाड़,
घुटनों पर पड़ी है नही चादर-सी,
पास ही दहक रही है
पलाश के जंगल की अँगीठी
अंधकार दूर पूर्व में
सिमटा बैठा है भेड़ों के गल्‍ले-सा।

अचानक- बोला मोर।
जैसे किसी ने आवाज़ दी-
'सुनते हो'।
चिलम औंधी
धुआँ उठा-
सूरज डूबा
अंधेरा छा गया।

~सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

19/06/2022

मेघ आए बड़े बन-ठन के, सँवर के ।
आगे-आगे नाचती-गाती बयार चली
दरवाजे-खिड़कियाँ खुलने लगीं गली-गली
पाहुन ज्यों आए हों गाँव में शहर के ।

16/06/2022

भोजपुरी ग़ज़ल
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घड़ी भर घाव के पथराव टल जाला कि ना बोला
चनरमा देखके मनवा बहल जाला कि ना बोला

नया बानी मुहब्बत में त सोचलीं पूछ लीं तोंहसे
मिलन के हाल दुनिया से कहल जाला कि ना बोला

केहू अचके में बिन बोलले कलेजा काढ़ के ले जाय
त अइसन हाल में दुनिया बदल जाला कि ना बोला

मोहब्बत के तरफ अपने क़दम आगे बढ़ल त का
खेलौना देखिके बच्चा मचल जाला कि ना बोला

~इरशाद ख़ान सिकन्दर

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