29/08/2026
नेपाल की 'स्वाभिमान' वाली जंग: तबाही के बीच दुनिया को क्यों कहा 'नो थैंक्स'?
नेपाल में कुदरत का ऐसा कहर टूटा है कि चारों तरफ सिर्फ तबाही का मंजर नजर आ रहा है। अचानक आई भीषण बाढ़ ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। अब तक 469 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 1,000 लोग जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं और लापता हैं। गायब होने वालों में नेपाल पुलिस के 28 जांबाज जवान भी शामिल हैं।
इस भयानक तबाही के बीच नेपाल में एक ऐसा फैसला लिया गया है, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है।
खुद के दम पर जंग: क्यों ठुकराई दुनिया की मदद?
भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान और दक्षिण कोरिया समेत दुनिया के तमाम बड़े देशों ने इस मुश्किल वक्त में नेपाल की तरफ मदद का हाथ बढ़ाया था। भारत ने तो अपने नागरिकों की तलाश के लिए NDRF की विशेष टीमें भेजने की अनुमति भी मांगी थी।
लेकिन नेपाल सरकार ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लेते हुए सभी विदेशी राहत-बचाव टीमों के प्रस्तावों को साफ इनकार कर दिया है।
नेपाल सरकार का रुख: नेपाल के विदेश मंत्रालय का कहना है कि उनकी अपनी सुरक्षा एजेंसियां ही इस पूरे सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन को संभालने में सक्षम हैं।
मैदान में उतरे जवान: नेपाल पुलिस और सेना के 4,348 जवान दिन-रात एक करके मलबे और पानी के बीच जिंदगी की तलाश कर रहे हैं। अब तक 1,545 से ज्यादा लोगों को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है।
लापता विदेशी: दुनिया भर में बढ़ी चिंता
इस त्रासदी में सिर्फ नेपाल ही नहीं, बल्कि कई देशों के परिवारों की सांसें अटकी हुई हैं। बाढ़ की चपेट में आने से सैकड़ों विदेशी नागरिक गायब हैं, जिनकी कोई खबर नहीं मिल पा रही है:
भारत: 178 नागरिक लापता
चीन: 100 से अधिक नागरिकों से संपर्क टूटा
अमेरिका: 65 नागरिक लापता
अन्य देश: मलेशिया (51), यूक्रेन (53), ऑस्ट्रेलिया (35), ब्रिटेन (33) और कनाडा (25) के नागरिक भी गायब हैं।
रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जैसे इलाकों से लोगों को लगातार सुरक्षित निकाला जा रहा है। सवाल यह है कि क्या नेपाल की अपनी एजेंसियां बिना विदेशी मदद के इतने बड़े पैमाने पर फैले मलबे से बाकी लापता लोगों को समय रहते बचा पाएंगी? पूरी दुनिया की नजरें अब नेपाल के इस 'सेल्फ-रेस्क्यू' ऑपरेशन पर टिकी हैं।
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