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विनम्र व्यक्ति सफल होता है और सफल व्यक्ति विनम्र ! रूबी प्रसाद

"मेरे कदम"निराशाओं की तरफ बढ़ते_ बढ़ते ,अचानक ही मेरे कदम रुक जाते हैं !"एक सोच "फिर से जीने को प्रेरित करती है  _कि गर ...
10/03/2026

"मेरे कदम"

निराशाओं की तरफ बढ़ते_ बढ़ते ,
अचानक ही मेरे कदम रुक जाते हैं !
"एक सोच "फिर से जीने को प्रेरित करती है _
कि गर मौत समान दुख न मिलता _
जीवन में ,तो मैं सुख_दुख का अन्तर कैसे समझ पाती ?
कैसे समझ पाती जीवन को ?
कैसे समझ पाती औरों के दुख को ?
गर सुख ही सुख मिलता मुझे हर पल तो,
कैसे मैं आशाओं के दीप को _
जलाना सीख पाती ?

उस वक्त फिर से मेरे कदम रुक जाते हैं !
जब दिल पर घाव टीस देते हैं _
एहसास होता है ये सच कि ,
लोग रिश्तों में प्यार की भीख देते हैं !

है सच ये भी कि मैं कभी_कभी बहुत टूट जाती हूं !
अतीत को याद कर _
ईश्वर से अकसर रूठ जाती हूं ।
जब जब याद आता है वो दुखों का समंदर_
तब तब निराशाएं घेरने लग जाती है मुझे,
और मेरे कदम रुक जाते हैं !
फिर से इस सोच के साथ कि गर ,
न मिलती मुझे नफरत बेहद अपनों से तो_
मैं प्रेम को कैसे समझ पाती ?
कैसे मैं गैरों में छिपे अपनों को और_
अपनों में छिपे गैरों को ढ़ूंढ पाती ?

मेरे कदम हमेशा उस वक्त रूक जाते हैं !
जब अहम मुझे घेरने लग़ता है ,
मैं तब याद कर लेती हूं फिर से अतीत को !
फिर से समेट लेती हूं उस दुख के समंदर को_
अपने भीतर !
जिसने मुझे अपनों के बीच रह तन्हा कर,
मुझे मुझसे मिलाया_
मुझे जीना सिखाया _
मुझे सुख और दुख के अन्तर को समझाया !

जब जब निराशाओं से घिरने लगती हूं मैं,
रोक लेती हूं अपने कदमों को !
क्योंकि मैंने अब निराशा में आशा को ढ़ूंढना_
सीख लिया है !
मैंने आंसुओं को पोंछ हंसना सीख लिया है ।
मैंने जीवन को समझ_
जीवन को हर हाल में जीना सीख लिया है ।
मैंने सीख लिया है जीना
तभी अब सकारात्मकता की राह पर चल,
नहीं रोकती अपने बढ़ते कदमों को_
क्योंकि अब मैंने चलना सीख लिया है !
मैंने हंसना सीख लिया है !!

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______"अब भी जी चाहता है"______अब भी जी चाहता है,लौट जाऊं उस पल में जब कभी मैं  बस मैं हुआ करती थी ।बेफिक्र , चंचल , मास...
08/03/2026

______"अब भी जी चाहता है"______

अब भी जी चाहता है,
लौट जाऊं उस पल में जब कभी
मैं बस मैं हुआ करती थी ।
बेफिक्र , चंचल , मासूम , बरबोली , हंसमुख, मुंहफट
हाँ, अब भी जी चाहता है
मैं जी लूँ फिर से उन बीतें पलों को
जब बस एक जुनून हुआ करता था
कुछ कर गुजरने का !
एक ख्वाब हुआ करता था
मम्मी पापा को खुद पर नाज करवाने का !
दोस्तों से आगे निकल जाने का
पूरे स्कूल में अव्वल आने का !!
हाँ,
अब भी जी चाहता है
स्कूल जाने का
शिक्षकों की शाबासी पाने का
सहेलियों के साथ खूब सारा वक्त बिताने का
और बेमतलब के लतीफों पर खुल कर ठहाके लगाने का !
अब भी जी चाहता है,
बना देने का इस दिल को फिर से मासूम
जो भरा था कभी प्यार से भरपूर
जो अंजान था प्यार के दर्द से
जो टूटा ही नहीं था कभी
जो इतना था भोला कि
जिसने नहीं देखा कभी था चेहरा
अपनों में छिपे शैतानों का !
हाँ ,
अब भी जी चाहता है
भूख प्यास सब भूलकर
अपनी मोटी_मोटी किताबों में डूब जाने का
रात को दो , तीन बजे
मम्मी, पापा से छुप_छुपकर चाय बनाने का
हां, अब भी जी चाहता है
पापा से मम्मी की और मम्मी से भाई बहनों की
शिकायत लगाने का !
पापा और पेड़ पौधों के साथ घंटों वक्त बिताने का !
कभी मम्मी के गले में झूल जाने का
तो कभी पापा को अपनी तारीफ करते देख
भाई बहनों का चिढ़ जाने का !!
हाँ ,
अब भी जी चाहता है
जिन्दगी से एक बार फिर प्यार में पड़ जाने का _
खूब हंसने का खुब हंसाने का ,
अपनी ज़िन्दादिली से हवाओं को महकाने का _
जिन्दगी के हर पल को भरपूर जी जाने का !
हाँ,
अब भी जी चाहता है,
मासूम से बचपन में लौट जाने का
मुखौटा उतार
सच में मुस्काराने का !
हाँ ,
अब भी जी चाहता है
अपनों का
बहुत बहुत सारा प्यार पाने के लिए
रूठ जाने का !!
हाँ,
अब भी जी चाहता है _
औपचारिकता भूल
होली के असली रंग में डूब जाने का
बच्चा बन हुड़दंग मचाने का !!

रूबी प्रसाद
सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल)

Feelings

06/03/2026

अपने पराये हो जाते है 🫴

.........अधूरी ख्वाहिशें........यूं तो कई ख्वाहिशें होती है हर दिल में दबी,पर जो हम चाहे वही हो जरूरी तो नहीं_हमें जो लग...
06/03/2026

.........अधूरी ख्वाहिशें........

यूं तो कई ख्वाहिशें होती है हर दिल में दबी,
पर जो हम चाहे वही हो जरूरी तो नहीं_
हमें जो लगे सही ,
वहीं हो सही जरूरी तो नहीं !

एक बचपन ही होता है जब ख्वाहिशें ,
न हो पूरी तो तकलीफ नहीं होती !
जिन्दगी से अंजान मासूम होता है बचपना ,
जहां तकलीफें शरीक नहीं होती !

बड़े होने की बहुत जल्दी होती है हमें ,
इस बात से अंजान कि कितनी बेदर्द है ज़िन्दगी !
दहलीज पर कदम रखते ही जवानी के_
जिन्दगी से अंजान लोगों के,
पैरों तले अक्सर जमीं नहीं होती !
क्योंकि उन्हें नहीं होता पता_
जिन्दगी कांटे भी है बोती !!
ख़ुद से रुबरू कराती है जब ये_
बुजदिलों को अक्सर बहुत परेशान करती है ज़िन्दगी !
हौसला मंदों का इम्तिहान लेती है ज़िन्दगी !!

हमारे सपनों को कर चकनाचूर ,
जीवन शमशान करती है ज़िन्दगी !
बन्द कर रास्ते समाधानों के,
मुश्किलों से हैरान करती है ज़िन्दगी !
पर जो थामे रहते हैं दामन उम्मीदों का _
उसे ही खुशियों का इनाम देती है ज़िन्दगी !
हौसला, उम्मीद , परिश्रम, सद्व्यवहार_
ही है ज़िन्दगी की गुरुदक्षीणा !
जो बस एकलव्य को ही प्रदान करती है ज़िन्दगी !
हां उतार चढ़ाव से भरपूर,
नहीं आसान होती है ज़िन्दगी !!
तभी तो क़िसी को सम्मान तो किसी को _
अपमान देती है ज़िन्दगी !

ताउम्र यूं तो कई ख्वाहिशें दबी होती है दिल में_
उन सपनों को पूरा करने में ,
बहुत इम्तिहान लेती है ज़िन्दगी !!
जो होकर निडर लड़ते है _
बस उनको ही इतिहास के पन्नों में,
स्थान देती है जिन्दगी !

Feelings

06/03/2026

सच्चे प्रेम की तलाश 🫴

24/02/2026

बिछङकर प्रेमी बिखर जाते है 🫴

ये प्यार व्यार की बातें तो महज बस बातें है ,जो बयां आंखो से हो इश्क उसी को कहते है ... ❤️❤️Feelings
14/02/2026

ये प्यार व्यार की बातें तो महज बस बातें है ,
जो बयां आंखो से हो इश्क उसी को कहते है ... ❤️❤️

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12/02/2026

े_स्पेशल

सब्जी बेचकर बाजार से घर आया थकाहारा रामदीन अभी मुंह हाथ धोकर दोपहर का खाना खाकर लेटा ही था कि कुछ याद आते ही झट से चारपाई से उठ खड़ा हुआ और उठते ही तुरंत फुलन को जोर से गले लगा लिया । उसकी इस हरकत पर घर के कामों से पहले से ही चिड़चिड़ाई फुलन ने उसे दूर ढ़केल दिया और भंवो को तरेतती गुस्से से बोली " इ का कर रहे हो , पगला गये हो का " ?

हर बात का कौनो समय होता है कौनो देख लेगा तो का सोचेगा ? " बुढ़ापे में बुद्धि भ्रष्ट हो गयी है का तुम्हारी " ?

उसके गुस्से को देख रामदीन ने उसे छोड़ दिया और सर को खुजाता बहुत मासुमियत से बोला " अरे बाबरी आज हग डे है न " , तुझे तो कुछ पता ही नहीं होता है कुछभी " कहकर आंखो में प्यार भरकर फुलन के गुस्से को नजरअंदाज कर फिर से वो लिपट गया तो फुलन से फिर से उसे दुर ढ़केलते हुए कहा " ये हग डे का होत है जी " ? तो रामदीन बोला " अरे फरवरी है न उन प्यार का महिना होत है रोज कोनो न कोनो डे होत है और आज बाजार में लड़का-लड़की एक दूसरे को गले लगा_लगा कर हैप्पी हग डे बोल रहे थे , हमरा ऐगो दोस्त बोला आज है डे है इसमें गले लगते है एक दुसरे के " तो हम भी तुम हग दिये " कोनो गुनाहकिये का " कहकर मासूम सा चेहरा बना लिया रामदेव ने और फिर से लिपटने ही जा रहा था कि फूलन हैरान होकर बोली _

" का उ सब लैला लैकी बिना शादी के गले लगा रहे थे जी " ?

" हाय राम कैसा जमाना आ गया है " ।

रामदीन उसकी मासूमियत पर निहाल होता बोला " अरे पगली बड़े_बड़े शहरों में ये सब तो आम बात है " और फिर उ सब जब बिन शादी के गले लग सकते है तो तू तो हमरी मेहरारू है न री बाबरी " आ हग दे न एक बार " ! फिर से गले लगाने ही वाला था रामदीन फुलवा को कि उसे गुस्से से इस बार जोर से कुछ इस तरह ढ़केल दिया फुलवा ने कि वो बेचारा गिरते-गिरते बचा । गुस्सा अब उसके चरम पर था ।

बेलन हवा में लहराकर फुंफकारते हुए बोली " यह सब नौटंकी अंग्रेजों के चोंचले है " , तुम तो ये लोटा उठाओ और जाओ खेत में , समझे कि नाहीं ! खाने में कचर_कचर मूली खाकर बदबू फैलाए जा रहे हो । बड़े आये हग डे मनाने वाले । अंग्रेज चले गये चोंचले छोड़ गये बुदबुदाती फूलन काम निपटाने लगी । बेचारा रामदीन अब खेतों में जा रहा था हग डे मनाने ।

रूबी प्रसाद

12/02/2026

जमीर मारकर कैसे जिंदा रहे 🫴

_____ मुझे अच्छा लगता है ______सुनो ,मुझे अच्छा लगता है !जब मेरे शब्दों में लोग ढ़ूंढ़ते है तुम्हें !और करते है कल्पनाओं...
11/02/2026

_____ मुझे अच्छा लगता है ______

सुनो ,
मुझे अच्छा लगता है !
जब मेरे शब्दों में लोग ढ़ूंढ़ते है तुम्हें !
और करते है कल्पनाओं में तुम्हारी चित्रकारी
तब मुझे अच्छा लगता है !

जब कभी मेरे शब्दों में तुम खुद को करते हो न महसूस,
और अपने आपको उन शब्दों में पाते ही
तुम जब जाते हो न डूब
तब मुझे अच्छा लगता है !

प्रेम भरे उन शब्दों में धीरे-धीरे उतरते ही
जब तुम लगते हो न जब पिघलने मुझमें
सुनो ,
तब मुझे अच्छा लगता है !

फिर जब उन शब्दों के खत्म होते ही
जब बैचेन हो जाते हो न मेरी आंखों में देखने के लिए अपने आप को
और ढ़ूंढ़ने लग जाते हो मुझे इधर उधर ,
पर बहुत ढ़ुढने पर भी जब नहीं मिलती मैं तुम्हें
तो मुस्कुरा देते हो न तुम
ये ख्याल आते ही कि
प्रेम में तो मिलन संभव ही नहीं
तब तुम्हारे होठों की मुस्कुराहट की बीच
जब ठहर जाती हूँ न मैं
तब मुझे अच्छा लगता है !

मेरे न मिलने पर जब करते हो न तड़प को महसूस
इतनी की छलक पड़ती है तुम्हारी आंखे
तब उन आंसुओं में जब आ जाता है न मेरा प्रतिबिम्ब .....
तब मुझे अच्छा लगता है !

फिर अंत में उस तड़प से थककर जब मन की बेचैनियों को अपनी समेट कर
फिर से तुम लौटकर
मेरे शब्दों में ठहर जाते हो न
और चेहरे पर तुम्हारे आ जाता है न शुकून
तब मुझे अच्छा लगता है !!

जब कभी मेरे प्रेम में डूबे हुए तुम
शब्दों से करते हो न मेरा सोलह श्रृंगार
और अपनी कलम की स्याही से छुते हो न मेरे अंग अंग को
तब मुझे अच्छा लगता है !

जब कभी भी तुम्हारे पास होता है शब्दों का
अथाह समंदर पर
देखते ही मेरी तस्वीर हो जाते न निःशब्द
तब मुझे अच्छा लगता है !

जब कभी भी तुम्हें सोचते सोचते हो जाती हूँ मैं शुन्य
और मेरी रूह जा मिलती है तुम्हारी रूह से
तब मुझे अच्छा लगता है !

जब कभी भी मेरे शब्दों में जाते हो तुम उतर
और तुम्हारे शब्दों में मैं जाती हूँ ठहर
तब मैं और तुम उन शब्दों से "हम" बनकर
बन जाते है न प्रेम
तब मुझे अच्छा लगता है !

क्योंकि उस प्रेम में तब मैं मैं नहीं रहती, तुम तुम नहीं रहते
हम बन जाते है अनंत
हम बन जाते है शुन्य
हम बन जाते है प्रेम
तब उस अनंत में , उस शुन्य में, उस प्रेम में
सुनो ,
मुझे अच्छा नहीं लगता
बहुत अच्छा लगता है
बहुत अच्छा लगता है !!

रूबी प्रसाद
सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल)

11/02/2026

अगर इश्क गुनाह है तो 💝

नि:शब्द कर गये तुमए जिंदगी____सिखा के जीने के हुनर को,नि:शब्द कर गई तुम !!छोटे थे जब बचपने में खुल कर जिया हमने तुझे ,बड...
03/02/2026

नि:शब्द कर गये तुम

ए जिंदगी____
सिखा के जीने के हुनर को,
नि:शब्द कर गई तुम !!
छोटे थे जब बचपने में खुल कर जिया हमने तुझे ,
बड़े क्या हुए हम भूल गये बचपना__
ऐ जिन्दगी __
जीवन की सच्चाई दिखा कर हमें _
निशब्द कर गई तुम !!
हर तरफ__
भीड़ भी बहुत थी और थी एक खामोशी भी,
बेटियां भी थी और थी बैचेनी भी __
रिश्ते थे बस मतलब के,
थी हर तरफ जिस्म और दौलत की बारिश भी __
मां बाप के अलावा ,
नहीं की किसी ने एक पल मोहब्बत भी !!
झूठे इस संसार में,
सिखाया तुमने हुनर मुझे जीने का__
सुख और दुख के तोहफों से मालामाल कर,
उतार और चढ़ाव के दंश को झेलने का __
सबक सिखा मुझे ,
हौसला मंद और निडर बनाया !
हां हर कदम पर हर हाल में,
जिना सिखा__
तुने मुझे ,
ऐ जिन्दगी,खुद से मिला,
नि:शब्द कर गई तुम _
नि:शब्द कर गई तुम !!

रुबी प्रसाद
सिलीगुड़ी

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Upper Road
Siliguri
734003

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