पृथक सोच

पृथक सोच वृद्धों के अनुभव और युवाओं की नई सोच जब साथ चलती है,
तभी सम्मान और समझ से जीवन की हर राह संवरती है।

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12/06/2026

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10/06/2026

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24/05/2026
02/05/2026

बुढ़ापे में रोटी
आपकी औलाद नहीं
आपके दिए संस्कार खिलाएंगे

समाज में  जिद्दी और खुद को सर्वज्ञाता, सर्वेसर्वा समझने वाले वृद्ध भी हैं। जो अपने पुराने दृष्टिकोण और सोच को इतना मजबूत...
02/05/2026

समाज में जिद्दी और खुद को सर्वज्ञाता, सर्वेसर्वा समझने वाले वृद्ध भी हैं। जो अपने पुराने दृष्टिकोण और सोच को इतना मजबूत मानते हैं कि बच्चों की बात सुनना उनके लिए कठिन हो जाता है। चाहे बच्चे कितनी भी पीड़ा या संघर्ष में हों, ऐसे वृद्ध अक्सर उनके दर्द को समझने में असफल रहते हैं।
इस जिद का कारण केवल उम्र या अहंकार नहीं होता, बल्कि अक्सर यह उनके जीवन में अनुभव, अकेलेपन और अपने समय की आदतों से जुड़ा होता है।
परिवार पर इसका प्रभाव गंभीर होता है। बच्चों को निराशा, असंतोष और भावनात्मक दबाव का सामना करना पड़ता है। कई बार यह स्थिति घरेलू संबंधों में तनाव और दूरी पैदा कर देती है।

#मैंकहतीहूंआंखंनदेखी
#वृद्धविमर्श

30/04/2026

प्रिय साथियों,
“पृथक सोच” केवल एक पेज नहीं, बल्कि पीढ़ियों के बीच समझ, सम्मान और संवेदना का एक प्रयास है।
यहाँ हम वृद्धों के अनुभव, युवाओं की ऊर्जा, और दोनों के बीच प्रेम, संवाद व आदर की ऐसी सोच साझा करेंगे जो समाज को और बेहतर बनाए।
आइए, हम मिलकर ऐसी सकारात्मक सोच विकसित करें जहाँ बुज़ुर्गों को सम्मान मिले, युवाओं को मार्गदर्शन मिले, और हर पीढ़ी एक-दूसरे की ताकत बने।
आपका साथ, आपके विचार और आपका सहयोग ही इस प्रयास को सार्थक बनाएगा।
“पृथक सोच” से जुड़िए — क्योंकि बेहतर समाज, बेहतर सोच से ही बनता है।

*** यह पेज पहले "एक पन्ना एहसासों का' इस नाम से था जिसे अब मैं बदल रही हूं।

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