Motivational poem

Motivational poem हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥

30/04/2026

वक़्त मुश्किल हैं बड़ा ,ये माना मैंने
वक़्त मुश्किल हैं बड़ा ,ये माना मैंने
वक़्त मुश्किल हैं बड़ा ,ये माना मैंने
इन मुश्किलों में ही अपनों को ,पहचाना मैंने ,

हर किसी को अपना ,बनाया नहीं करते
हर किसी को अपना बनाया नहीं करते
हर किसी को अपना बनाया नहीं करते
बनाकर अपना फिर यूँ ,पराया नहीं करते ,

वक्त औरों पे अपना यूँ जाया नहीं करते
वक्त औरों पे अपना यूँ जाया नहीं करते
वक्त औरों पे अपना यूँ जाया नहीं करते
बार बार अपनापन जताया नहीं करते ,

जो हैं अपना उसे भुलाया नहीं करते
जो हैं अपना उसे भुलाया नहीं करते
जो हैं अपना उसे भुलाया नहीं करते
ग़ैरों की भीड़ में अपनों को ,पराया नहीं करते ,

राज अपनों से यूँ छुपाया नहीं करते
राज अपनों से यूँ छुपाया नहीं करते
राज अपनों से यूँ छुपाया नहीं करते
और ज़ख़्म दिल के किसी को दिखाया नहीं करते ,

सुषमा पारख
स्वरचित (मौलिक)

30/04/2026

बेटी तो हैं पराया धन ,जवाई ले जाएगा
बेटी तो हैं पराया धन ,जवाई ले जाएगा

बेटी तो हैं पराया धन ,जवाई ले जाएगा
बेटी तो हैं पराया धन ,जवाई ले जाएगा

बनके चिड़िया ,बनके चिड़िया
बनके चिड़िया बिटिया तो ,सवेरे उड़ जाएगी
बनके चिड़िया बिटिया तो ,सवेरे उड़ जाएगी

बेटी तो हैं पराया धन ,जवाई ले जाएगा
बेटी तो हैं पराया धन ,जवाई ले जाएगा

जब कभी मायके की उसको याद आएगी
जब कभी मायके की उसको याद आएगी

जब कभी मायके की उसको याद आएगी
भींग जाएगी पलके ,पर सबसे छुपाएगी

भींग जाएगी पलके ,पर सबसे छुपाएगी
बेटी तो पराया धन ऽऽऽ सवेरे उड़ जाएगी

बेटी घर बाबुल के ,भाग्य बन आती हैं
बेटी घर बाबुल के ,भाग्य बन आती हैं

बेटी घर बाबुल के ,भाग्य बन आती हैं
बेटी से आँगन की शोभा बढ़ जाती हैं
बेटी से आँगन की शोभा बढ़ जाती हैं

सौ भाग्य उदय से ही ऽऽऽएक बेटी आती हैं
सौ भाग्य उदय से ही ऽऽऽएक बेटी आती हैं
सौ भाग्य उदय से ही ऽऽऽएक बेटी आती हैं
बेटी के आने से क़िस्मत चमक जाती हैं

-: सुषमा पारख
धुन -: तुम तो ठहरे परदेशी

शीर्षक - जो राधा नाम जपते हैं …राधा राधा जपने से श्री कृष्ण मिलते हैं राधा राधा जपने से श्री कृष्ण मिलते हैं पहाड़ों से ...
16/04/2026

शीर्षक - जो राधा नाम जपते हैं …

राधा राधा जपने से श्री कृष्ण मिलते हैं
राधा राधा जपने से श्री कृष्ण मिलते हैं
पहाड़ों से संकट भी ,एक पल में टलते हैं

प्रभाव में राधा ऽऽऽऽ अभाव में राधा
हर हाल में राधाऽऽऽ ऽऽ राधा राधा
जो कहते हैं उन्हें श्री कृष्ण मिलते हैं
हाँ श्री कृष्ण मिलते हैं …………. …

खिल जाते हैं रोम रोम ,नाम जो राधा जपते हैं
कष्टों के बादल भी यूँ क्षण भर में छँटते हैं
हौसले हो जाते बुलंद वो इतिहास रचते हैं
जो राधा नाम जपते हैं उन्हें श्री कृष्ण मिलते है

ग म में राधा राधा ख़ुशी में राधा राधा
जपता हैं जो हर हाल में राधाऽऽ राधा
सुबह भी राधा राधा शाम भी राधा राधा
काम भी राधा राधा आराम भी राधा राधा
जों ऐसा करते हैं उन्हें श्री कृष्ण मिलते है

जो राधा राधा जपते हैं उन्हें घन श्याम मिलते हैं

सुषमा पारख
सिलचर ,असम

वैशाख महात्मयवैशाख मास को माधव मास भी कहते हैं, इसके विषय में नारद जी सूतजी से ब्रह्मा जी द्वारा बताएँ गए महत्व को बताते...
14/04/2026

वैशाख महात्मय

वैशाख मास को माधव मास भी कहते हैं, इसके विषय में नारद जी सूतजी से ब्रह्मा जी द्वारा बताएँ गए महत्व को बताते हैं कि :-

पहले तो जीव का भारतवर्ष में जन्म होना ही दुर्लभ है, उससे भी अधिक दुर्लभ है वहां मनुष्य की योनि में जन्म । मनुष्य होने पर भी अपने अपने धर्म में पालन में प्रवृत्ति होनी तो और भी कठिन है।

उससे भी अत्यंत दुर्लभ है-भगवान वासुदेव में भक्ति और उसके होने पर भी माधव मास में स्नानादि का सुयोग मिलना जो और भी कठिन है ।

माधव मास माधव (लक्ष्मीपति) को बहुत प्रिय है।

शीर्षक - ✨✨राधा ✨✨

राधे राधा राधिका नाम मेरे लल्ला को प्यारा हैं
नाम राधा राधा ही जपता गोपाल हमारा हैं
लगन तुम से लगी राधे,हुआ श्याम तुम्हारा हैं -२
सुन रुखमणी तुझमें ,श्याम सुधबुध भी हारा हैं

ख़ुद श्याम चला आया जब जब राधा पुकारा हैं
हम दीन-दुखियों का एक राधा नाम सहारा हैं
नाम राधा राधा राधा ,राधा सबसे ही प्यारा हैं -२
सुन राशेश्रवरी तुझमें ,श्याम सुधबुध भी हारा हैं

टूटी हो तेरी कश्ती ,चाहे तू जीवन से हारा हैं
राधा राधा जपने से ही मिल पाता किनारा हैं
कलयुग में मुक्ति का नाम जप ही आधारा हैं -२
सुन परमेश्वरी तुझमें ,श्याम सुधबुध भी हारा हैं

जीने की नहीं चाहत ,न कोई मकसद हमारा हैं
जिसमें जान मेरी बसती वो चेहरा तुम्हारा हैं ,
भटकन सी हैं राहों में और बड़ा दूर किनारा हैं -२
डूबती मेरी नैया का राधिका तू ही सहारा हैं

सुन वृषभानु दुलारी राधा श्याम तुझ पे ही हारा हैं
सुन वृन्दावनेश्वरी रम्या श्याम तुझ पे ही हारा हैं

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

सुषमा पारख

शीर्षक -: श्री कृष्ण कान्हा  के संग बीता  हर  पल  घणा  चोखा  लगता  है नाम ,प्रसिद्धि ,मान ,सम्मान सब थोथा थोथा लगता हैं ...
10/02/2026

शीर्षक -: श्री कृष्ण

कान्हा के संग बीता हर पल घणा चोखा लगता है
नाम ,प्रसिद्धि ,मान ,सम्मान सब थोथा थोथा लगता हैं
कृष्ण तेरे चरणो में रहना-२ हमको अच्छा लगता हैं
नाम,प्रसिद्धि,मान,सम्मान सब थोथा थोथा लगता हैं ,

गुणगान से तेरे नंदलाला ,मेरा रोम रोम खिलता हैं
देख छवि तेरी सुंदर ,मन का अंधियारा भी छँटता हैं ,
कोई नहीं यहाँ अपना -२अपना अपनों को ही ठगता हैं
नाम, प्रसिद्धि ,मान ,सम्मान सब थोथा थोथा लगता हैं ,

नाम जप जप मन मेरा ,कान्हा तुझमें गोता खाता हैं
तुझ बिन सुन मेरे कान्हा ये दिल चैन कहीं ना पाता हैं ,
सुमिरन करने से तेरा -२ हर हारे को बल मिलता है,
नाम ,प्रसिद्धि ,मान ,सम्मान सब थोथा थोथा लगता हैं ,

मझधार में मेरी नैया,हारा मन मेरा डरता हैं
सिर्फ़ तेरे चरणों का सहारा,ही सहारा लगता हैं ,
तेरे संग जीवन का हर पल ,पल पल सार्थक लगता हैं
नाम ,प्रसिद्धि ,मान ,सम्मान सब थोथा थोथा लगता हैं ,

खाली माया में उलझ कर ,मन ख़ुद ही ख़ुद को छलता हैं ,
मनमोहन तेरी छवि अति प्यारी ,और प्यारा ना कुछ लगता हैं
सजदे में तेरे रहना -२ सरकार अच्छा लगता हैं
नाम ,प्रसिद्धि ,मान ,सम्मान सब थोथा थोथा लगता हैं ,

जीवन धन्य धन्य तुमसे ,हर कष्ट पल में कटता हैं
तुझ बिन इस जीवन का ,ना किनारा मुझको दिखता हैं
अपनी शरण में ही रखना -२ अरदास दास ये करता हैं
नाम ,प्रसिद्धि ,मान ,सम्मान सब थोथा थोथा लगता हैं ,

-:सुषमा पारख
स्वरचित (मौलिक )

17/01/2026
@*'यह मोदी वाला भारत है’ काव्य संकलन का दिल्ली में हुआ लोकार्पण*देश विदेश के 80 रचनाकार राष्ट्र गौरव सम्मान से सम्मानितन...
22/12/2025

@*'यह मोदी वाला भारत है’ काव्य संकलन का दिल्ली में हुआ लोकार्पण*
देश विदेश के 80 रचनाकार राष्ट्र गौरव सम्मान से सम्मानित
नई दिल्ली, 21 दिसंबर।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साहित्य एवं संस्कृति के लिये समर्पित संस्था शब्द सृजन संस्थान (पंजी) के तत्वावधान में दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी, श्यामा प्रसाद मुखर्जी मार्ग स्थित गीतांजलि सभागार में ऑपरेशन सिंदूर पर आधारित साझा काव्य संकलन “यह मोदी वाला भारत है” का भव्य लोकार्पण संपन्न हुआ। इस संकलन का संपादन साहित्यकार डॉ. राजीव कुमार पाण्डेय एवं डॉ. ओंकार त्रिपाठी द्वारा किया गया है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि टीवी 9 के सलाहकार सम्पादक अमिताभ अग्निहोत्री रहे, जबकि अध्यक्षता केंद्रीय हिंदी निदेशालय के सहायक निदेशक डॉ. दीपक कुमार पांडेय ने की। अपने संबोधन में वक्ताओं ने ऑपरेशन सिंदूर को समकालीन राष्ट्रचेतना, संकल्प और सांस्कृतिक आत्मविश्वास का प्रतीक बताते हुए इस काव्य संकलन को समय की आवश्यक साहित्यिक दस्तावेज़ कहा।
कार्यक्रम में देशभर से आए लगभग 80 रचनाकारों ने सहभागिता की। ऑपरेशन सिंदूर जैसे राष्ट्रीय विषय पर सृजनात्मक योगदान के लिए सभी रचनाकारों को “राष्ट्र गौरव सम्मान” से अलंकृत किया गया। यह सम्मान साहित्य के माध्यम से राष्ट्रभाव को सशक्त करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल के रूप में सराहा गया।
संस्था के अध्यक्ष डॉ राजीव कुमार पाण्डेय ने संस्था का विस्तृत परिचय देते कहा संस्था देश विदेश में हिन्दी साहित्य की सेवा में समर्पित है। जिसकी इकाइयां सम्पूर्ण देश एवं विदेश में भी हैं। साथ ही यह भी बताया कि इससे पूर्व चार और ग्रन्थ आ चुके है जिनमें तीन विश्व रिकॉर्ड भी स्थापित कर चके हैं।
यह कार्यक्रम दो सत्रों में हुआ प्रथम सत्र सम्मान समारोह, एवं द्वितीय सत्र कवि सम्मेलन का रहा।
संस्था के महासचिव डॉ ओंकार त्रिपाठी ने यह मोदी वाला भारत है विषय क्यों रखा गया इसका विस्तार से परिचय देते हुए इस ग्रन्थ को राष्ट्रीय चेतना का ग्रन्थ बताया।
संस्था के सचिव बृज माहिर, कोषाध्यक्ष गार्गी कौशिक, संगठन मंत्री रजनीश स्वछंद, राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डॉ बिनोद हैंसोड़ा, पण्डित जयराम शर्मा दिव्य, दिल्ली प्रदेश प्रभारी सीमा पटेल, महिला इकाई प्रभारी कुसुमलता कुसुम का सराहनीय योगदान रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां वागीश्वरी के वंदन एवं वंदे मातरम् से हुआ तथा समापन राष्ट्रगान के साथ गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। आयोजन में साहित्यप्रेमियों, बुद्धिजीवियों एवं मीडिया प्रतिनिधियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। संस्था के अध्यक्ष डॉ राजीव पाण्डेय ने कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन किया।


15/12/2025

18/09/2025





शीर्षक -: हँस के हसरतों को अपनी मारते हैं वो

देखते हैं जो सपने ,नींदों में जागते हैं वो
उन्हें पूरा करने को दिनभर भागते हैं वो ,
थक थक के थकन से ,ना हारते हैं जो
हँस के हसरतों को अपनी मारते हैं वो ,

पसीने की कमाई को,खरा मानते हैं वो
मुफ़्त कि रोटियों को बुरा जानते हैं वो ,
बूँद बूँद से बूँदों की ,कद्र पहचानते हैं जो
हँस के हसरतों को अपनी मारते हैं वो ,

जीवन की परीक्षा को अवसर जानते हैं जो
क्षण क्षण की क़ीमत को ,क़ीमती मानते हैं वो ,
ख़ुद कमतर ,अपनों को बेहतर जानते हैं जो
हँस के हसरतों को अपनी मारते हैं वो ,

-: सुषमा पारख
स्वरचित,मौलिक

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