19/10/2023
आकार में आधे।
मुझे अनेकों आकार में ढाला है तुमने
कहकर,तुम अंतिम आकार में आधे हो!
कल थोड़े पूर्ण से हो जाओ इस जग में
बांट लेना पूर्णता के कुछ भाग सबमें!
भले बुरे में जकड़े हैं मन हम सब के
दो वचन मुझे तुम जो हर पल जूझोगे
प्रतिष्ठा नहीं,भीतर को अपने खोजोगे।
भीड़ इस जग में जो रोके तुमको
प्रेम को रखो तुम सम्मुख उनके
करो प्रयास तुम,दे सको सत्य सबको!
कला रुपी संसार है,अंश सब इसके
पग पग है रोपे ये प्रेम को भीतर सबके
स्वयं को कर परिपूर्ण, तुम कल के लिए
मिलूं जब भी तुम्हें,दिखाई मुझे दो तुम
अंश कुछ पूर्णता के तुम में बांटो सबमें!
अधिराज शर्मा