09/12/2025
चालदा महाराज के साथ छत्र का भी है गहरा धार्मिक :
जौनपुर रवांई एवं हिमाचल में चालदा महाराज के प्रति बड़ी आस्था व व श्रद्धा है। जब प्रवास के लिए चालदा महाराज की डोली मंदिर से बाहर निकलती है तो आगे आगे एक बड़ा 40 मीटर सफेद कपड़ा में बना हुआ छत्र भी चलता है। इस छत्र को ले जाने का कार्य देवता के छतराईक परिवार करते हैं देवता जहां भी जाते हैं वहां के स्थानीय छतराईक इस छत्र को आगे बढ़ने का काम करते हैं। एक तरह से देवता की डोली उतनी ही आगे बढ़ेगी जितना आगे देवता का छत्र जाएगा।
हनोल स्थित महासू देवता
मंदिर समिति के सचिव एवं हुणा भाट्ट परिवार के सदस्य मोहन लाल सेमवाल का कहना है कि प्राचीन काल में देवता का यह छत्र वाशिक महासू महाराज के पास होता था बाद में उन्होंने संपूर्ण क्षेत्र में चलायमान चालदा महाराज को अपना यह छत्र दे दिया, तब से जहां-जहां महाराज की डोली जाती है वहां यह छत्र आगे आगे चलता है।
ऐसी भी मानता है कि लोग देवता का आशीर्वाद
लेने के लिए छत्र के नीचे आ जाते हैं। इस छत्र का निर्माण देवता के सुनार कारीगर ही करते हैं जो इस कार्य में निपुण है। देवता का यह छत्र शुद्ध रूप एक छतरी के आकार का होता है परंतु इसका आकर व्यापक होता है जिसे एक विशेष तकनीकी से बनाया जाता है।
देवता के इस छत्र में लगभग 40 मीटर सफेद कपड़ा चढ़ाया जाता है यह काम देवता के कुशल सुनार कारीगर करते हैं जब चालदा महाराज की डोली मंदिर में विराजित हो जाती है उसके बाद इस छत्र को बंद कर दिया जाता है। चालदा महाराज के साथ छत्र होने के कारण छत्रधारी चालदा महाराज भी कहा जाता है।
जबकि निचले जौनसार में जो चालदा महाराज की डोली वर्तमान समय में दोहा गांव में है उसके साथ इस प्रकार का छत्र संचालित नहीं होता। देवता की डोली के साथ कपड़े से बने हुए बड़े-बड़े रंग-बिरंगे झंडे अवश्य आगे आगे चलते हैं।