Ordnance Dramatic Club Samiti

Ordnance Dramatic Club Samiti कला मन मस्तिष्क में उपजती है और सम्पूर्ण शरीर का सहारा लेकर जवान होती है।
-‘भारत’

सांस्कृतिक, सामाजिक एवं साहित्यिक कार्य व्यापार के लिए तत्परता से अग्रिम भूमिका निभाने को सदैव उत्सुक रहना हमारी प्राथमिकता है।

26/09/2023
08/10/2021

उत्तर प्रदेश के महानगर शाहजहांपुर में स्थापित ओसीएफ-इस्टेट की श्री रामलीला के कलाकारों को इस वर्ष पूरी उम्मीद थी कि मेला लगेगा और रामलीला खेली जायेगी। परन्तु फैक्ट्री प्रशासन ने कोविड-19 का हवाला देते हुए पल्ला झाड़ लिया। जबकि शहर के दूसरे स्थानों पर बदस्तूर भगवान श्रीराम की लीला का मंचन जारी है।
ऐसे में कलाकारों की क्षुब्धता कुछ इस तरह से उजागर हुई।.....?
पेश है एक दशक से रामायण के भरत का किरदार निभाने वाले रंगकर्मी अंकित अवस्थी की जुवानी.....

08/10/2021

उत्तर प्रदेश के महानगर शाहजहांपुर में स्थापित ओसीएफ-इस्टेट की श्री रामलीला के कलाकारों को इस वर्ष पूरी उम्मीद थी कि मेला लगेगा और रामलीला खेली जायेगी। परन्तु फैक्ट्री प्रशासन ने कोविड-19 का हवाला देते हुए पल्ला झाड़ लिया। जबकि शहर के दूसरे स्थानों पर बदस्तूर भगवान श्रीराम की लीला का मंचन जारी है।
ऐसे में कलाकारों की क्षुब्धता कुछ इस तरह से उजागर हुई।.....?
पेश है तीन दशकों से रामायण के रावण/दशरथ के पात्रों के किरदार करने वाले मशहूर रंगकर्मी यशपाल कुकरेजा की जुवानी.....

“सिलसिलेवार मुलाकात”===============आज की मुलाकात ग्राम-नियामतपुर निवासी ब्रिजकिशोर यादव(बिरजू) के नाम रही।आपको बताते चले...
17/10/2020

“सिलसिलेवार मुलाकात”
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आज की मुलाकात ग्राम-नियामतपुर निवासी ब्रिजकिशोर यादव(बिरजू) के नाम रही।
आपको बताते चलें कि बिरजू रंगमंच की एक ऐसी शख्सियत है जिसने अपने जीवन की जवानी श्रीराम लीला को प्रभावी बनाने में खर्च कर दी। मंच की बल्लियां गाड़ने से लेकर मंच पर हास्य अभिनय का लोहा मनवाने तक का सफर तय करने वाले इस कलाकार ने अपने अभिनय कौशल से जहाँ दर्शकों को हास्य रस का पान कराया वहीं करुण रस का स्वाद भी चखाया। बड़ी ही सहजता से चरित्र में उतर जाना इनकी तमाम खूबियों में से एक है।
एक बार की बात है मंच पर लक्ष्मण - मेघनाद का युद्ध चल रहा था, सभी जानते हैं कि इन दोनों पात्रों का युद्ध अनेक बार और अधिकाधिक दिखाया जाता है जिसके कारण विशेष हैं जो मैं नहीं बताऊंगा। खै़र..... दर्शक ऊबे ना... इसलिये युद्ध के साथ साथ बीच में थोड़ी कॉमेडी भी पेश कर दी जाती थी। अब हुआ ये कि बिरजू तो ठहरा रावण दल का सैनिक जिसे कुछ भी करने और कहने की पारम्परिक स्वतंत्रता(मर्यादित) परन्तु रामादल तो पूर्ण मर्यादित। मेघनाद(महेश सक्सेना जी) लड़ते लड़ते मंच से उतर गये लेकिन सैनिक(बिरजू) डटा हुआ लक्ष्मण(सतीश सक्सेना जी) के साथ-‘पहिले हमसे लड़उ, अगर जीति गये तउ महराज से लड़िअउ’। लक्ष्मण ने ललकारा-‘सावधान’। अब ये खड़बड़ाया बोला-अरे रुकउ रुकउ, लड़ाई के कुछ नियम होति करो, ऐसेइ थोड़उ चिल्लाइ परे सावधान। लक्ष्मण बोले-‘अच्छा बताओ क्या नियम होते हैं लड़ाई के'। बोला-‘लेउ औउ सुनउ इन्हइ जहो न पता कि लड़ाई कइसे लड़ी जाति अउ लन्न आइ गए हमास्संग'। लक्ष्मण बोले-‘तो तुम्हीं बता दो'। बोला-‘हाँ, अब तुमने सही कही। देखउ हम कहंइ कि लड़ाई शुरू तउ शुरू, हम कहंइ बंद तउ बंद’। शर्त मान ली गयी। लड़ाई शुरू हुई। ठेठ देहाती अंदाज, हाथ में लकड़ी की डेढ़ फुटी तलवार।दर्शक झूम झूम जायें। अब लक्ष्मण को ये समझ में न आये कि करें तो करें क्या। लक्ष्मण जी ज्यों ही धनुष पर तीर चढ़ाकर निशाना साधते तभी ये बोल देता कि लड़ाई बंद, फिर जैसे ही लक्ष्मण जी दिशा बदलते तभी हमलावर हो जाता ये कहकर कि लड़ाई शुरू। शर्त के नियम से बंधे हुये लक्ष्मण जी कुछ न कर पाते सिवाय पसीना बहाने के। तभी हनुमान जी(लल्ला) ने देखा कि लक्ष्मण जी को थकान होने लगी है तो सामने आकर स्वयं लड़ने लगे। ये तो थी सामान्य बात, मज़े की बात तो ये है कि जब हनुमान जी ने उसे खदेड़ा तो खुद को बचाने के लिए वह मंच की साइड विंग के पास लगे लोहे के खम्बे पर इस तरह चढ़ गया जैसे छिपकली चढ़ रही हो। ये नज़ारा अद्भुत तो था ही असुनियोजित भी था। दर्शक वर्ग पेट पकड़ हँस रहा था लेकिन कलाकार वर्ग भौचक्का था कि ये किया कैसे बिरजू ने। अब हनुमान जी वहीं खड़े कि कहीं ये गिर न पड़े, लेकिन हनुमान जी के रहते वो कैसे उतरे। निर्देशक का इशारा पाकर हनुमान जी सरक लिए तब दुबले शरीर का बिरजू खम्बे से उतरा और कमर में खोंसी तलवार निकालकर मंच पर चक्कर लगाने लगा तुर्रा ये कि ‘भाग गये सब डरके'। बाहें फैलाकर-‘हम जैसे योद्धा के सामने कोई टिक ही नहीं पाया’।
इस तरह के दृश्यों की कोई स्क्रिप्ट नहीं होती है। निपुण रंगकर्मी presence of mind का प्रदर्शन करता है।
परिस्थितियोंवश ये कलाकार मंच से दूर होता गया।
तमाम संस्मरण के बीच ये भी एक लमहा था।
ऐसा रंगसाधक तस्वीर के मध्य में। दाहिनी ओर सत्यनारायण ‘जुगनू' जी तथा बायीं तरफ मैं स्वयं।

आयुध वस्त्र निर्माणी, शाहजहाँपुर द्वारा आयोजित होने वाली श्रीराम लीला का मंचन हो या फिर यहाँ पर लगने वाली प्रदर्शनी, प्र...
10/10/2020

आयुध वस्त्र निर्माणी, शाहजहाँपुर द्वारा आयोजित होने वाली श्रीराम लीला का मंचन हो या फिर यहाँ पर लगने वाली प्रदर्शनी, प्रदेश में अपना अलग ही स्थान रखती है परन्तु कोरोना जैसी जानलेवा महामारी के क्रूर अवतरण ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के चरित्र को जन सामान्य के मध्य उदाहरणार्थ प्रस्तुत करने की वर्तमान स्थिति को पंगु बना डाला। जिसके फलस्वरूप कलाकारों का मन बड़ा ही आहत हुआ है।

1991 की श्रीराम लीला में प्रथमबार भरत की भूमिका से पदार्पण करते बायें से राजीव सिंह‘भारत’ के साथ मनीष मुनि(शत्रुघ्न), स्...
02/10/2020

1991 की श्रीराम लीला में प्रथमबार भरत की भूमिका से पदार्पण करते बायें से राजीव सिंह‘भारत’ के साथ मनीष मुनि(शत्रुघ्न), स्व.बालकिशन(मंथरा), जनार्दन सिंह(कैकई)।

अतीत के लम्हों की यादगार तस्वीर में दायें से महेश श्रीवास्तव (सुमञ्त),पैट्रिक दास(दशरथ), अनीता(कैकई), विनोद सक्सेना (कौश...
01/09/2020

अतीत के लम्हों की यादगार तस्वीर में दायें से महेश श्रीवास्तव (सुमञ्त),पैट्रिक दास(दशरथ), अनीता(कैकई), विनोद सक्सेना (कौशल्या) तथा राम-लक्ष्मण-भरत-शत्रुहन के किरदार में बाल कलाकार।

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