04/03/2026
होली नाम की एक औरत थी,उसने ब्रह्मा से वरदान मांगी थी कि मुझे अग्नि न जला सके। ब्रह्मा एवमस्तु कहे। हिरण्यकश्यप की बहन थी, विजातीय पक्ष की विधवा थी। हिरण्यकश्यप के पास शासन -सत्ता,बल,सब कुछ था, लेकिन दुर्गुणों से भी भरपूर था। स्वयं भगवान बना बैठा था।
इधर सजातीय पक्ष में एक अकेला प्रह्लाद।
ब्रह्मा का वरदान फेल, हिरण्यकश्यप का शासन-सत्ता एवं बल फेल।
संसार के प्रपंच में मत पड़ो। संसार झूठा है,सत्य नहीं है।
ईश्वर सत्य है,और वे ईश्वर हर मनुष्य के हृदय में हैं।
पेड़ -पौधों में थोड़े ही हैं, मनुष्य के हृदय में हैं।
सही युक्ति महापुरुषों के पास है, इसलिए सतसंग करो,नाम जपो तब सब समझ में आयेगा।
शुभ होली