13/08/2026
कटनी जिले में सिसकता विकास
*विकास के दावों की खुली पोल: कीचड़ और दलदल से गुजरकर स्कूल जाने को मजबूर बेटियां, हादसों के साये में बचपन*
कटनी: कटनी जिले में इस मानसून की बारिश ने जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बुनियादी ढांचे से जुड़े तमाम दावों की हवा निकाल दी है। जिले के दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों—विजयराघवगढ़ और बड़वारा—से बेहद चिंताजनक तस्वीरें सामने आई हैं। आजादी के सात दशक बाद भी पक्की सड़क न होने के कारण यहाँ के ग्रामीण और स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर हैं।
*मामला 1: विजयराघवगढ़ — मथुरा कॉलोनी में कीचड़ का साम्राज्य, छात्राएं हो रहीं चोटिल*
विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम हदरहटा स्थित मथुरा कॉलोनी में हालात बेहद विकराल हैं।
* *दलदल में तब्दील सड़क*: भारी बारिश के कारण मुख्य मार्ग पूरी तरह कीचड़ और दलदल में बदल चुका है, जिससे दोपहिया वाहनों का निकलना भी हादसों को बुलावा देना जैसा है।
* *छात्राओं का दर्द*: हाल ही में सड़क पर फिसलकर चोटिल हुई स्कूली बच्चियों ने एक वीडियो जारी कर अपना दर्द बयां किया है। छात्राओं का कहना है:
*"सड़क पर इतना कीचड़ है कि हम आए दिन गिरकर चोटिल हो जाते हैं। कपड़े खराब हो जाते हैं और चोट लगने से पढ़ाई का नुकसान होता है। अगर सड़क जल्द नहीं बनी, तो हमारी शिक्षा पूरी तरह ठप हो जाएगी।"*
*मामला 2: बड़वारा (पड़रिया गांव) — एंबुलेंस तक नहीं पहुँच पाती, निजी जमीन के पेंच में फंसा विकास*
दूसरा मामला बड़वारा विधानसभा क्षेत्र के ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बरेली रामपुर के आश्रित गांव पड़रिया का है।
* *स्वास्थ्य व शिक्षा पर असर*: लगभग 100 लोगों की आबादी वाले इस गांव की 1 से 1.5 किलोमीटर की सड़क पूरी तरह कच्ची है। बारिश में एंबुलेंस न पहुँच पाने के कारण गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को खाट पर लादकर मुख्य मार्ग तक पहुँचाना पड़ता है।
* *सड़क निर्माण में जमीन का विवाद*: ग्राम पंचायत की सरपंच सरोज त्रिपाठी के अनुसार, सड़क के रास्ते में लगभग 40 से 50 किसानों के खेत आ रहे हैं, जिनमें से 5 किसानों की निजी जमीन के कारण भू-स्वामी अपनी सहमति नहीं दे रहे हैं। इसी पेंच की वजह से निर्माण कार्य अटका हुआ है।
*प्रशासनिक रुख: SDM ने दिया आश्वासन*
मामले की गंभीरता और छात्राओं के विरोध के बाद प्रशासन हरकत में आता दिख रहा है।
निधि गोहल (SDM) का मीडिया को दिया बयान:
* *"पड़रिया गांव की समस्या और स्कूली बच्चों की कठिनाइयों का मामला संज्ञान में आया है। निजी भूमि के स्वामित्व और सहमति के मुद्दे पर जल्द ही संबंधित पक्षों से वार्ता की जाएगी। हमारी प्राथमिकता है कि कोई वैकल्पिक या स्थायी व्यवस्था जल्द से जल्द बनाई जाए ताकि बच्चों की शिक्षा और ग्रामीणों का आवागमन सुचारू हो सके।"*
*साभार दैनिक भास्कर डॉट काम*