Idher udher ki baate#

Idher udher ki baate# Hello

Credit : filmifresh
26/01/2025

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16/01/2025

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बीकानेर महाराजा गंगासिंह जी राठौड़ ने 1899-1900 ई. में पड़े कुख्यात ‘छप्पनिया अकाल’ की हृदय-विदारक विभीषिका देखी थी और अप...
12/06/2023

बीकानेर महाराजा गंगासिंह जी राठौड़ ने 1899-1900 ई. में पड़े कुख्यात ‘छप्पनिया अकाल’ की हृदय-विदारक विभीषिका देखी थी और अपनी रियासत के लिए पानी का इंतजाम एक स्थाई समाधान के रूप में करने का संकल्प लिया था और इसीलिये सबसे क्रांतिकारी और दूरदृष्टिवान काम, जो उनके द्वारा अपने राज्य के लिए किया गया वह था पंजाब की सतलुज नदी का पानी ‘गंग-केनाल’ के ज़रिये बीकानेर जैसे सूखे प्रदेश तक लाना और नहरी सिंचित-क्षेत्र में किसानों को खेती करने और बसने के लिए मुफ्त ज़मीनें देना

मिल्का सिंह जी की पुरानी तस्वीर ❤️❤️यह उस समय की तस्वीर है जब हमारे मिल्खा सिंह पाकिस्तान के खिलाफ दौर में सर्वप्रथम आए ...
10/06/2023

मिल्का सिंह जी की पुरानी तस्वीर ❤️❤️

यह उस समय की तस्वीर है जब हमारे मिल्खा सिंह पाकिस्तान के खिलाफ दौर में सर्वप्रथम आए थे एक लाइक तो बनता है भारतीय होने पर गर्व है हमें। 🖤🌎







#विजेता

जोधपुर का रियासतकालीन दृश्य (110 वर्ष पूर्व)
07/06/2023

जोधपुर का रियासतकालीन दृश्य (110 वर्ष पूर्व)

“FIFTH AVENUE ON SUNDAY”                   NEW YORK CITY                             1898Photo Hulton Archive/Getty Imag...
07/06/2023

“FIFTH AVENUE ON SUNDAY”
NEW YORK CITY
1898

Photo Hulton Archive/Getty Images
NYPL Collections

“View of the West side of Fifth Avenue, North from 51st street, showing residences of Elliott F. Shepard, brother in law of William K. Vanderbilt, whose home is next to it. Further North is St. Thomas Episcopal Church and 5th Avenue Presbyterian Church, New York City.”
-FineArtAmerica

“How 19th century New Yorkers spent Sundays

During the workweek, the city was fast-paced and cutthroat, just as it is today.

But in the 19th century, that workweek generally ran from Monday through Saturday.

Which made Sunday the city’s day of leisure, when the mood of New York drastically changed, explains James McCabe’s Lights and Shadows of New York Life, from 1873.

“On Sunday morning New York puts on its holiday dress. The stores are closed, the streets have a deserted aspect, for the crowds of vehicles, animals, and human beings that fill them on other days are absent.”

Around 10 o’clock, New Yorkers went to church—preferably on Fifth Avenue, so well-to-do residents could promenade on the city’s most fashionable street afterward.

“The toilettes of the ladies show well here, and it is a pleasant place to meet one’s acquaintances,” says McCabe.

Dinner was served at 1 p.m.; servants had the rest of the day off. “After dinner, your New Yorker, male or female, thinks of enjoyment.” That meant more promenading, a drive in Central Park, or if you were working class, a picnic in the park or skating session on one of the frozen lakes. Concerts were well-attended; saloons had plenty of business too. By sunset, “the Bowery brightens up wonderfully, and after nightfall the street is ablaze with a thousand gaslights. . . . Bowery beer-gardens do a good business.”

And with Sunday over, it was time to start the workweek . . . and do it all over again.”
-Ephemeral Newyork




Brooklyn Bridge under construction, 1883.(2Photo12/Universal Images)
07/06/2023

Brooklyn Bridge under construction, 1883.
(2Photo12/Universal Images)







Vikky kaushal and Hritik Roshan
07/06/2023

Vikky kaushal and Hritik Roshan













क्या इतिहास में इनका जिक्र हैं कही?बागपत जिले के खेकड़ा  कस्बे की एक वीरांगना नीरा आर्य जिन्होंने  आजाद हिंद फौज में रहक...
07/06/2023

क्या इतिहास में इनका जिक्र हैं कही?

बागपत जिले के खेकड़ा कस्बे की एक वीरांगना नीरा आर्य जिन्होंने आजाद हिंद फौज में रहकर देश की आजादी की लड़ाई लड़ी ,सुभाष चंद्र बोस पर गोली चलाने वाले अपने पति को इन्होंने मार डाला ।
भारत की पहली महिला जासूस कहलाई , इससे अंग्रेजों ने इन्हें काले पानी की सजा दी और स्तन काट के इन्हें सजा और प्रताड़ना दी गई ।
आजादी के बाद सड़क के किनारे फूल बेचकर इन्होंने गुमनाम जिंदगी जी । 😥
बागपत की महान क्रांतिकारी वीरांगना को हम नमन करते हैं आपकी प्रेरणादायक कहानी पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी







भारत में ट्रेन लाने का श्रेय किसको प्राप्त है, अंग्रेज? बिलकुल नहीं, नाना जगन्नाथ शंकर सेठ वो पहले व्यक्ति है जिन्होंने ...
05/06/2023

भारत में ट्रेन लाने का श्रेय किसको प्राप्त है, अंग्रेज? बिलकुल नहीं, नाना जगन्नाथ शंकर सेठ वो पहले व्यक्ति है जिन्होंने इसके लिए पहल शुरू की थी

नाना स्वर्णकार परिवार में जन्मे थे और व्यवसाई घराना होने के कारण वे धन संपदा से काफी संपन्न भी थे

इंग्लैंड में जब ट्रेन पहली बार चली तो ये पूरी दुनिया की हेडलाइन बन जाती है, ये खबर जब नाना तक पहुंची तो उन्हे लगा ये ट्रेन उनके गांव, शहर में भी चलनी चाहिए

अब नाना जी कोई आम व्यक्ति तो थे नहीं उनका व्यवसाय बहुत बड़ा था, उनका प्रभाव इससे समझ सकते है कि कई अंग्रेज अफसर उनके सानिध्य में रहते थे

उन्होंने कई विश्वविद्यालय खोले थे जिसमे कई महान क्रांतिकारियों ने बाद में इसमें शिक्षा को ग्रहण किया, उन्होंने लड़कियों के लिए मुंबई में पहला स्कूल खोला। नानाजी अपने स्कूलों में अंग्रेजी के साथ संस्कृत पढ़ाने की भी व्यवस्था की थी

1843 में वे अपने पिता के दोस्त जमशेद जीजोभोय उर्फ जेजे के पास गए और इंडियन रेलवे का अपना आइडिया उन्हे बताया, भारत में ट्रेन चलने के आइडिया से सुप्रीम कोर्ट के जज थॉमस और ब्रिटिश अधिकारी स्किन पैरी काफी खुश थे

सबको नाना का आइडिया शानदार लगा इसके बाद तीनो ने मिलकर इंडियन रेलवे एसोसिएशन को बनाया, उससे पहले अंग्रेजो का रेलवे के प्रति ऐसी कोई योजना नहीं थी

जब नाना और जेजे जैसे प्रभावी व्यक्तियों ने ईस्ट इंडिया कंपनी को अपना सुझाव दिया, तो उन्होंने काफी सोच विचार के बाद सरकार को इसमें काम करने के लिए कहा।

इन्होंने मुंबई के बड़े बड़े व्यापारियों को इस प्रोजेक्ट से जोड़ते हुए ग्रेट इंडियन रेलवेज नाम की कंपनी बनाई

ये सपना 1853 में पूरा हुआ, जब मुंबई से थाणे की ट्रेन चली, इसमें नाना जी और जेजे भी यात्री के रूप में सवार रहे

महाराष्ट्र में एक चौक भी इनके नाम पर है और इनके एक रेलवे स्टेशन मुंबई सेंट्रल टर्मिनस का नाम नानाजी पर रखा जाने पर विचाराधीन है

वास्तव में हम दूसरो की एक एक बात जानते है पर अपनो के योगदान को जानने की दूर की बात है सुनना भी पसंद नही करते

क्योंकि कहीं न कहीं हमे मानसिक गुलामी की आदत हो गई है



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