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आइने की कोई याददाश्त नहीं होती —ऐसा मुझे तब तक लगता रहा,जब तक मैंने उसेआइने में अपनी तस्वीर लेते हुए नहीं देखा।उस एक क्ष...
05/03/2026

आइने की कोई याददाश्त नहीं होती —
ऐसा मुझे तब तक लगता रहा,
जब तक मैंने उसे
आइने में अपनी तस्वीर लेते हुए नहीं देखा।

उस एक क्षण में
मैंने भी उसे आइने की नज़र से देखा —
और अनायास ही
मैं, आइने के साथ, स्वयं भी आइना हो गया
और कहीं दूर खड़ा इस रंगमंच को
एक दर्शक बना
निहारता रहा।

आइने ने उसे
गुलाल में भीगे रंगों में देखकर
उसके उस प्रतिबिंब को
अपने भीतर सदा-सर्वदा
सजा कर रख लिया।

वह जीवन भर
टूटना भूल गया,
और अब पिघल-पिघल कर
उसके रंगों में
धीरे-धीरे फैलने लगा।

वह रंगों की गिनती भी भूल गया —
बस उतने ही रंग,
जितने उसने अपने गालों पर
लगाए हुए थे,
आइने की स्मृति में
जुगनुओं-से जलते-बुझते रहे।

वह स्वयं मृदु गुलाल हो गया —
हवा में हल्का-सा तैरता,
उसकी उँगलियों की पोरों से छूकर
फिर उसी के चेहरे पर
एक रंग की तरह ठहर जाता।

और विस्मय से सोचता —
क्या कोई यूँ भी
आइनों को रंग लगा सकता है?

जैसे अज़ीज़ नबील का बेहद ख़ूबसूरत शेर है कि —

“साँस लेता हुआ हर रंग नज़र आएगा,
तुम किसी रोज़ मेरे रंग में आओ तो सही।”

अब आइना भी
उसी रंग में साँस ले रहा है,
आज से वह सचमुच जीवित है —
और चुपचाप
अगली होली की बाट जोह रहा है…।

— अमित
०४/०३/२६

14/12/2024

यह एक बंद अंधेरे कमरे में सिमटी पूरी एक दुनिया है,
एक बच्चे की दुनिया ।

और वह इतने लंबे वक़्त से इसमें कैद है कि वह भूल चुका है इसके अलावा भी कोई और दुनिया है।
किसी ने उसके बचपन को रौंद डाला है,
उसकी उजली हँसी पर किसी ने
दुःख की तेज़ाब मार दी है।
वह डरा सहमा एक कोने में सुबक रहा है।

वह कमरा उसकी दुनिया का आखिरी कोना है,
वहां मौजूद हर एक चीज़ जो बोल नहीं सकती
उसका परिवार है,
दीवारें फर्श हर कोना वहां का अंधेरा और उसके सन्नाटे,
से बाहर की दुनिया का कोई ताल्लुक़ नहीं है।
उसे देखने पर किसी को भी उसपर रहम आना तय है।
उसके हालात देखकर सिर्फ ईश्वर से दुआ की जा सकती है।

वह अपनी आवाज़ खो चुका है,
इशारों में बात करता है,
पेन और पेपर से या पेंटिंग्स से,
यह उसके कमरे की दीवारें चीखकर बयान कर रहीं हैं।
सफेद दीवारों को कोयले की चॉक से गूदा गया है
गौर से देखने पर जैसे उनमें दाख़िल हुआ जा सकता है,
वे दीवारें बोल सकती हैं जैसे उन दीवारों ने
उसे एक अर्से से सुना हो।
दीवार के हर एक हिस्से पर एक कहानी उभरी है
जो कुछ भी उस बच्चे पर गुजरी है।

उसकी आँखों में देखकर लगता है कि
उन्हें एक लंबे वक्त तक आंसुओं ने मांझा है
और अब उन एक अलग ही चमक है एक हँसी है।

हँसी जो महज एक तंज है ।
हँसी में कई सवाल हैं ।
हँसी में दैवीय उदासी है
हँसी जिसमें शैतान सा गुस्सा है।
हँसी जो खंडहर सी वीरान है,
हँसी उसका आराम है।

बच्चा दीवार पर गुदे एक चित्र की ओर
उंगली से इशारा करते हुए कोई सवाल पूछ रहा है,
जिसमें दो लोग लगभग गले मिलने ही को हैं पर.... रुक गए!!

क्यों रुक गए...?

अगले ही पल जैसे वह सब सिकुड़कर एक लिफाफे की तरह बंद होने लगा और मैं...

मैं उस नन्हे से बच्चे से सहम गया मेरे पास कोई जवाब नहीं है
मैं शर्मिंदा हूँ उससे नज़रें फेरता लगातार पीछे हटते जा रहा हूँ
कोई मुझे जीवित निगल जाने को आगे बढ़ रहा है और मैं एक ऊंचाई से नीचे गिरने लगता हूँ ,
हाथ पैर ठंडे पड़ जाते हैं।
..और पसीने से तर ..आँख खुल जाती है।

उस सवाल से हारने के बदले..
मेरा एक हिस्सा उस कमरे और लिफाफे में छूट जाता है और उस कमरे का बहुत सारा हिस्सा मैं अपने अंदर लेकर आ जाता हूं,हिस्सा जिसमें उस बच्चे की हँसी मेरे इर्द गिर्द है वहीं खामोशी वही अंधेरा, प्रेत की तरह जो इस दुनिया के सूरज से भी बड़ा है।

वह कमरा मेरा था और उस बच्चे की शक्ल में वे लोग जिन्होंने मुझे निस्वार्थ प्रेम किया और बदले में मैंने उस नर्क में धकेल दिया।

जिस अंधेरे कमरे का बाहरी दुनिया से कोई ताल्लुक़ नहीं है।

१४/१२/२४
©अमित

10/02/2024
रास्ता भूल कर आ निकले हैं हम तेरे लोग नहीं थे दुनिया/ अशरफ़ युसूफ़ी
26/11/2022

रास्ता भूल कर आ निकले हैं
हम तेरे लोग नहीं थे दुनिया

/ अशरफ़ युसूफ़ी

When you overcome the danger, you become a danger yourself. 🌊🖤~Amit
07/11/2022

When you overcome the danger,
you become a danger yourself. 🌊🖤

~Amit

ढूँढ सकता है जहाँ सिर्फ मेरा अंधकार उन्हें वो उल्कावहीं से आती है।उसकी प्रमुदित नृत्य कलोलेंकंचनी रौशनी में पैबस्त,उन एक...
27/10/2022

ढूँढ सकता है जहाँ सिर्फ
मेरा अंधकार उन्हें
वो उल्का
वहीं से आती है।
उसकी प्रमुदित नृत्य कलोलें
कंचनी रौशनी में पैबस्त,
उन एक जोड़ी
बड़ी-बड़ी आँखों में
दीये सी चमकती हैं।
उनके पीछे–पीछे चलना
सीख रही है नंगे पांव
दिवाली।
वह इन प्रश्नों का उत्तर है कि
त्योहार कौन मनाता है?
और त्योहार किसे मनाते हैं?

~अमित
२७/१०/२२
Art:

धुंधली सी तस्वीर जानी पहचानी सीपोशीदा रुमानी सी।कभी कानों से सुनी,कभी आँखों में देखी,कभी मेरी ही ज़ुबाँ बोलते-बोलते हो गय...
10/10/2022

धुंधली सी तस्वीर
जानी पहचानी सी
पोशीदा रुमानी सी।

कभी कानों से सुनी,
कभी आँखों में देखी,
कभी मेरी ही ज़ुबाँ बोलते-बोलते
हो गयी बिल्कुल चुप,
फिर अपनी सम्मोहन शक्ति से
अतीत में ले गयी खींच।

मेरी पीठ पर कुछ गूदती और
उगा देती अदृश्य पंखों के जोड़े,
मैं उड़कर उसका पीछा करने को
हो उठता आतुर।

वो बोसों की शक्ल में जादुई
Potion के कुछ छींटो से
सबकुछ जीवित कर डालती,

अल्पसमय के लिए ही सही।
मेरे साथ खेलती,
हँसती,इठलाती ,
मेरी गोद में अपना सिर
छिपाये तुतलाती,
मानो लाडली मेरी बेटी
मेरी एकलौती ।

ढलती अंत में साँझ लिए मेरे कलेजे में,
वक्ष के भीतर अपने गुप्त नीड़ में,
आकर सो जाती पंख पसार,
मेरे प्राणों की ओट में।

”तुम्हारी जीती जागती सुगंध“।

~तुम्हारा अमित
०६/१०/२२

मैं एक तीसरी दुनिया में मुब्तिला हूँ कहीं तू दो जहाँ की कहाँ अक़्ल दे रहा है मुझे/अनुराग अर्श
19/09/2022

मैं एक तीसरी दुनिया में मुब्तिला हूँ कहीं
तू दो जहाँ की कहाँ अक़्ल दे रहा है मुझे

/अनुराग अर्श

_________ग़ज़ल _________तमाम शहर ही अंधा दिखाई देता हैकिसी किसी को ही रस्ता दिखाई देता हैमैं आने वाले दिनों को बदलने लगत...
27/08/2022

_________ग़ज़ल _________

तमाम शहर ही अंधा दिखाई देता है
किसी किसी को ही रस्ता दिखाई देता है

मैं आने वाले दिनों को बदलने लगता हूँ
कभी कभी मुझे इतना दिखाई देता है

मैं ख़ामुशी के बदन से लिपटता रहता हूँ
मुझे सदा का सरापा दिखाई देता है

किसी वजूद को सीधा दिखा नहीं सकता
जो आइना तुझे सच्चा दिखाई देता है

मैं एक पल में ज़मानों को देख सकता हूँ
अभी तो मुझको ज़रा सा दिखाई देता है

/Saeed Raja

❤️
19/08/2022

❤️

कितनी निर्मल होती हैं वे स्मृतियाँ  जो सुबह आँख खुलते ही हमेंअपने आलिंगन में समेट लेती हैं,कल के सारे गिले-शिकवे धुलकर ह...
18/08/2022

कितनी निर्मल होती हैं वे स्मृतियाँ
जो सुबह आँख खुलते ही हमें
अपने आलिंगन में समेट लेती हैं,
कल के सारे गिले-शिकवे
धुलकर हो जाते हैं साफ
जैसे कहीं नदी मैली होकर
आगे फिर आप ही हो जाती है
दर्पण की तरह स्वच्छ।
वैसे ही इन स्मृतियों में प्रेम
छन-छनकर हो गया है कंचन।

प्रेम नदी है,
हम नदी के दो किनारे हैं और
ये स्मृतियां हैं हमें जोड़कर रखने वाला पुल।

~अमित
१८/०८/२२
📽️ वेक अप सिड

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