17/07/2017
जानिए कब होगा कलियुग का अंत, पृथ्वी पर सिर्फ जल ही बचेगा, उत्तराखंड की वादियों में बस है ये राज
https://youtu.be/yHnxwbwy9tQ
दोस्तो , ये कलियुग चल रहा है। , हर युग की तरह , इस युग का भी अंत होेगा। , लेकिन हर कोई जानना चाहेगा , कि ये अंत कब होगा। , दोस्तो ,उत्तराखण्ड की , पहाड़ी वादियों के बीच , बसे एक कस्बे , गंगोलीहाट की , पाताल भुवनेश्वर , गुफा , किसी आश्चर्य से कम नही है। ,नमस्कार दोस्तो , आप सभी का स्वागत है , हमारे यूट्यूब चैनल , पंडित जी ऑनलाइन में , दोस्तो ,
दोस्तो , सृष्टि की रचना से लेकर , कलयुग का अंत , कब और कैसे होगा , इसका पूरा वर्णन , यहां पर है। , यहां पत्थरों से बना , एक - एक शिल्प , तमाम रहस्यों को , खुद में समेटे हुए है। , मुख्य द्वार से , पतला फिसलन भर रास्ता , ओर , 80 सीढियां उतरने के बाद , एक ऐसी दुनिया , देखने मिलती है , जहां , युगों युगों का इतिहास , एक साथ प्रकट हो जाता है। , गुफा में बने पत्थरों के ढांचे , व्यक्ति को , सोचने पर मजबूर कर देते हैं।,
दोस्तो , ये एकमात्र ऐसा स्थान है , जहां पर , चारों धामों के दर्शन , एक साथ होते हैं। , शिवजी की जटाओं से , बहती , गंगा की धारा , यहां नजर आती है , तो ,अमृतकुंड के दर्शन भी , यहां पर होते हैं। , ऐरावत हाथी भी , आपको यहां , दिखाई देगा , और , पौराणिक मान्यताओं के अनुसार , स्वर्ग का मार्ग भी , यहां से शुरू होता है। ,
दोस्तो ,समय-समय पर , दुनिया खत्म होने की , भविष्यवाणियां भी , आती रहती हैं , लेकिन , अभी दुनिया खत्म होने में , काफी वक्त है। , भारत के कुछ गुफाएं , और मंदिर ऐसे हैं , जहां , यह रहस्य छुपा हुआ है। , पाताल भुवनेश्वर , दरअसल एक प्राचीन , और रहस्यमयी गुफा है , जो अपने आप में , एक रहस्यमयी दुनिया को , समेटे हुए है। , गुफा में पहुंचने पर , एक अलग ही , अनुभूति होती है। , जैसे कि आप , किसी काल्पनिक लोक में ,पहुंच गए हों। , गुफा में उतरते ही , सबसे पहले , गुफा के बाईं तरफ , शेषनाग की , एक विशाल आकृति दिखाई देती , जिसके ऊपर , विशालकाय , अर्द्धगोलाकार चट्टान है , जिसके बारे में कहा जाता है , कि शेषनाग ने , इसी स्थान पर , पृथ्वी को , अपने फन पर धारण किया है।,
दोस्तो , स्कंद पुराण में , इस गुफा के विषय में , कहा गया है , कि , इसमें भगवान , शिव का निवास है। , सभी देवी-देवता , इस गुफा में आकर , भगवान शिव की , पूजा करते हैं। , गुफा के पतले रास्ते से , जमीन के अंदर , आठ से दस फीट , अंदर जाने पर , गुफा की दीवारों पर , शेषनाग सहित , विभिन्न , देवी-देवताओं की आकृति , नज़र आती है। , मान्यता है कि , पाण्डवों ने , इस गुफा के पास , तपस्या की थी। , बाद में , आदि शंकराचार्य ने , इस गफा की , खोज की। , इस गुफा में , चार खाबे है , जो चार युगों , अर्थात सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग तथा कलियुग , को दर्शाते हैं। , इनमें , पहले तीन आकारों में , कोई परिवर्तन नही होता। , जबकि , कलियुग का खंभा ,लम्बाई में अधिक है , और इसके ऊपर , छत से एक पिंड ,नीचे लटक रहा है। , यहां के पुजारी का कहना है , कि 7 करोड़ वर्षों में , यह पिंड , 1 ईंच बढ़ता है। , मान्यता है कि , जिस दिन , यह पिंड , कलियुग के खंभे से , मिल जाएगा , उस दिन , कलियुग समाप्त होगा , और महाप्रलय आ जायगी ,
दोस्तो , पौराणिक महत्व के अलावा , पुरातत्व की मानें तो , इस गुफा को , त्रेता युग में , राजा , ऋतुपर्ण ने , सबसे पहले देखा। , द्वापर युग में , पाण्डवों ने , यहां चौपड़ खेला , और कलयुग में , जगदगुरु शकराचार्य का , 822 ई के आसपास , इस गुफा से , साक्षात्कार हुआ , तो उन्होंने यहां , तांबे का एक शिवलिंग , स्थापित किया। , इसके बाद , चन्द राजाओं ने , इस गुफा के विषय मे जाना , और आज , यहाँ देश विदेश से , सैलानी आते हैं , एवं गुफा को देख ,दांतो तले ,उंगली दबाने को , मजबूर हो जाते हैं।,
मान्यताएं चाहे कुछ भी हो , पर एक बार , गुफा में बनी , आकृतियों को , देख लेने के बाद , उनसे जुड़ी , मान्यताओं पर , भरोसा किये बिना , नहीं रहा जाता। ,
Dosto गुफा की शुरुआत में , शेषनाग के फनों की तरह , उभरी संरचना , पत्थरों पर नज़र आती है। , मान्यता है कि , धरती , इसी पर टिकी है। , आगे बढने पर , एक छोटा सा , हवन कुंड , दिखाई देता है। , कहा जाता है , कि राजा परीक्षित को , मिले श्राप से , मुक्ति दिलाने के लिए , उनके पुत्र ने , इसी कुण्ड में , सभी नागों को जला डाला , परंतु , तक्षक नाम का , एक नाग बच निकला , जिसने बदला लेते हुए , परीक्षित को , मौत के घाट उतार दिया। , हवन कुण्ड के ऊपर , इसी तक्षक नाग की , आकृति बनी है। ,
आगे चलते हुए , महसूस होता है कि , हम किसी की , हडिडयों पर चल रहे हों। , सामने की दीवार पर , काल भैरव की , जीभ की आकृति , दिखाई देती है। , कुछ आगे , मुड़ी गरदन वाला गरुड़ , एक कुण्ड के ऊपर , बैठा दिखई देता है। , माना जाता है , कि शिवजी ने , इस कुण्ड को , अपने नागों के , पानी पीने के लिये बनाया था। , इसकी देखरेख , गरुड़ के हाथ में थी। , लेकिन जब गरुड़ ने ही , इस कुण्ड से , पानी पीने की कोशिश की , तो शिवजी ने गुस्से में , उसकी गरदल मोड़ दी। , कुछ आगे , ऊंची दीवार पर , जटानुमा सफेद संरचना है। ,
यहीं पर एक , जलकुण्ड है , मान्यता है कि , पाण्डवों के , प्रवास के दौरान , विश्वकर्मा ने , उनके लिये ,यह कुण्ड बनवाया था। , कुछ आगे , दो खुले दरवाजों के अन्दर , पतला रास्ता जाता है। , कहा जाता है , कि ये , द्वार , धर्म द्वार , और मोक्ष द्वार है ।