19/03/2026
https://youtu.be/wFiKoplZHOU
प्रयास साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक समिति द्वारा नाटक *चाय अकेली है* का सफल मंचन भगवान शीत भंडार कैंपस के मुक्ताकाशी मंच पर किया गया। रंग निर्देशक हीरेन्द्र सिंह द्वारा लिखित, निर्देशित यह नाटक मध्यम वर्गीय परिवारों के संघर्षों की आंतरिक वस्तु स्थिति और मानवीय मूल्यों को लेकर लोगों की संशय ग्रस्त स्थिति को रेखांकित करता है। हास-परिहास से शुरू हुआ यह नाटक अपने भीतर कई परतें खोलता दिखाई देता है।
कवि परमानंद 'व्यथित' की भूमिका में राजेश शुक्ल राजन् ने बहुत अच्छा अभिनय किया है। विनय की भूमिका में सत्येन्द्र सेंगर ने संवेदना के स्वर संप्रेषित किए हैं। सुरभि की भूमिका में ज्योति मिश्रा प्रभावित करती हैं। बर्मा जी और बर्माइन जी पड़ोसी की भूमिका में रमज़ान ख़ान और प्रभा मिश्रा सहज रहे हैं
कवियत्री राधिका जी और कवि समरेश बाबू किरदारों में अनुराधा पांडेय और आशीष मिश्रा प्रमाणिक लगते हैं। रज्जन की छोटी सी भूमिका में बालकृष्ण यादव ने अच्छा प्रभाव छोड़ा है। आंचल साहू राजेश सिंह ओम प्रकाश चतुर्वेदी, कमल पांडेय, सीमा रानी झा, प्रशांत सिंह दीपेश्वर सिंह बाबूलाल साकेत डबल कास्ट में थे जिन्होंने इस मंचन के पार्श्व में महत्वपूर्ण योगदान दिया। प्रमुख सहयोगियों में दादा अशोक सिंह, राजेन्द्र सोनी, शैलेंद्र द्विवेदी,शालिवाहन सिंह उपस्थित रहे।
प्रयास साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक समिति द्वारा नाटक *चाय अकेली है* का सफल मंचन भगवान शीत भंडार कैंपस के मुक्...