Mrityunjay Mishra

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24/09/2026

Pyar ki dastan na suno tum meri

Poetry by Mrityunjay Mishra

14/09/2026
लड़के जो मगरूर होते हैं,हालातों से मजबूर होते हैं...घर चलाने की खातिर,घर से बहुत दूर होते हैं...फुटपाथों पे काटते हैं रा...
08/08/2026

लड़के जो मगरूर होते हैं,
हालातों से मजबूर होते हैं...

घर चलाने की खातिर,
घर से बहुत दूर होते हैं...

फुटपाथों पे काटते हैं रातें,
जो माँ बाप के नूर होते हैं...

कहीं भी बैठकर खा लेते हैं रोटी,
घर में नखरे जिनके भरपूर होते हैं...

क्या-क्या नहीं करते सबके लिए,
सच कहुँ, लड़के मज़दूर होते हैं...

दर्द तमाम लेकर भी मुस्कुराते हैं,हम वफादार होकर भी पछताते हैं...हम ऐसे लोग हैं कि मेहमाननवाजी के,इंतज़ाम लाख करके भी घबर...
11/04/2026

दर्द तमाम लेकर भी मुस्कुराते हैं,
हम वफादार होकर भी पछताते हैं...

हम ऐसे लोग हैं कि मेहमाननवाजी के,
इंतज़ाम लाख करके भी घबराते हैं...

वो लोग जो ताकत की नुमाइश करने,
मासूम पर वार करके भी इतराते हैं...

पहले तो खुद को मेरा ही कहते हैं,
और एहसान करके फिर गिनवाते हैं...

जिनको हमारी बाहों के दरमिया ही सुकून था,
वो पास आने से भी आजकल कतराते हैं...

हकीक़त से वाक़िफ नहीं ये नई उम्र के लड़के,
वो ही इश्क का मतलब हमको सिखलाते हैं...

राम हैं दीनबंधु कृपा के हैं सिंधु,राम पुरूषों में उत्तम राम हैं शील बिंदु,राम के नाम का बल है जो जानता,सूर्य का ताप भी उ...
27/03/2026

राम हैं दीनबंधु कृपा के हैं सिंधु,
राम पुरूषों में उत्तम राम हैं शील बिंदु,
राम के नाम का बल है जो जानता,
सूर्य का ताप भी उसको लगता है इंदु...

कई रंग थे कई हाथ थे,सभी का निशाना मेरे गाल थे,मगर मुझको रंगना था तुमसे प्रिये,भले इसमें लगने कई साल थे...नजरों से नजरें ...
04/03/2026

कई रंग थे कई हाथ थे,
सभी का निशाना मेरे गाल थे,
मगर मुझको रंगना था तुमसे प्रिये,
भले इसमें लगने कई साल थे...

नजरों से नजरें मिल आ गया है,
तुम्हारी अदाओं पे दिल आ गया है,
रंग दे तू मुझको अपने ही रंग में,
लो आज होली का दिन आ गया है...
बचाकर रखे थे गुलाबी अधर ये,
चुंबन को तरसे कई साल थे...

अब सब्र करने को बोलो न तुम,
लगा लो गले से छोड़ो न तुम,
मेरी मांग में तुम सितारे सजाओ,
सराबोर रंगों में कर दो न तुम...
ये चोली ये दामन तरसे बहुत हैं,
रंगों से बचते कई साल थे...

कई रंग थे कई हाथ थे,
सभी का निशाना मेरे गाल थे,
मगर मुझको रंगना था तुमसे प्रिये,
भले इसमें लगने कई साल थे...

खोया बहुत कुछ थोड़ा सा पाने के लिए,बिगाड़ा बहुत कुछ थोड़ा बनाने के लिए...दूसरों को पाने की खातिर दूर हो गए ख़ुद से,और मश...
23/02/2026

खोया बहुत कुछ थोड़ा सा पाने के लिए,
बिगाड़ा बहुत कुछ थोड़ा बनाने के लिए...

दूसरों को पाने की खातिर दूर हो गए ख़ुद से,
और मशहूर हो गए सारे ज़माने के लिए...

हमने चाहत भी निभाई तो इस कदर निभाई कि,
तोड़ दी हर दीवार वादा निभाने के लिए...

जिनको यकीन नहीं आप हद से भी गुजर जाएं तो,
मत मारिये ख़ुद को उनको दिखाने के लिए...

ये चलन जब से चला है चलता ही रहा है,
मत हराइए ख़ुद को किसी को जिताने के लिए...

अर्थ के व्यर्थ पर व्यर्थ के अर्थ पर,कुछ मिलेगा नहीं किसी शर्त पर,बात जो बोलिए तोल कर बोलिए,क्या कसौटी खरी है किसी तर्क प...
20/02/2026

अर्थ के व्यर्थ पर व्यर्थ के अर्थ पर,
कुछ मिलेगा नहीं किसी शर्त पर,
बात जो बोलिए तोल कर बोलिए,
क्या कसौटी खरी है किसी तर्क पर...

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