10/03/2024
एक बार, सौरभ शुक्ला एक फिल्म की शूटिंग के दौरान एक रेलवे स्टेशन पर थे। वहां उन्हें एक चायवाले से चाय पीनी थी। चाय पीने के बाद, उन्होंने चायवाले को पैसे देने के लिए अपनी जेब टटोली, मगर उन्हें अपने पैसे कहीं नहीं मिले।
उस समय, सीन शूट होने के लिए तैयार था और निर्देशक उन्हें जल्दी से जल्दी सेट पर आने के लिए कह रहे थे। इस उलझन में सौरभ ने चायवाले से मजाकिया अंदाज में कहा, "भाई साहब, थोड़ी देर में पैसे दूंगा, अभी डायलॉग याद कर रहा हूँ।"
चायवाला उनका परिहास समझ नहीं पाया और थोड़ा गुस्से में बोला, "डायलॉग बाद में याद कर लेना, पहले मेरा पैसा दे दो।" सौरभ ने तुरंत जवाब दिया, "अरे नहीं, ये तो फिल्म का ही एक सीन है! हीरो चाय पीता है और फिर डायलॉग बोलता है।"
यह सुनकर वहां मौजूद सभी लोग जोर से हंस पड़े, यहां तक कि चायवाला भी अपनी हंसी रोक नहीं पाया। इस तरह सौरभ ने अपने हास्यपूर्ण अंदाज और उपस्थिति से माहौल को हल्का कर लिया और शूटिंग भी निर्धारित समय पर शुरू हो पाई।
यह किस्सा हमें सौरभ शुक्ला की सकारात्मक सोच और दबाव की स्थिति में भी हास्य ढूंढने की उनकी क्षमता को दर्शाता है। यह हमें सिखाता है कि मुश्किल परिस्थितियों में भी हास्य का सहारा लेकर तनाव कम किया जा सकता है।