Ashok Tiwari

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🏔️ #अतुल्य उत्तराखंड Profile पर आने के लिए आपका धन्यवाद ♥️पहाड़ से जुड़े रहिये♥️🏔️जय देवभूमि🏔️पहाड़ में चकबंदी कैसे हो इसके क्या फायदे होंगे इस मुहीम से भी आप जुड़ सकते हैं।
#अतुल्यउत्तराखंड

ये किसका पौधा है ???
25/09/2026

ये किसका पौधा है ???

 #आखिर_कैसे_बेचा जा रहा है पहाड़ ??पहाड़ों में ज़मीन की ऑफ़र देने वाला प्रॉपर्टी डीलर नाप भूमी के  साथ बेनाप भूमी का लालच...
25/09/2026

#आखिर_कैसे_बेचा जा रहा है पहाड़ ??
पहाड़ों में ज़मीन की ऑफ़र देने वाला प्रॉपर्टी डीलर नाप भूमी के साथ बेनाप भूमी का लालच अवश्य देता है । कई मर्तबा तो पाँच नाली भूमी के टुकड़े साथ बग़ल में साढ़े पाँच नाली बेनाप भूमि के टुकड़े का ऑफ़र ग्राहक को तुरंत डील को सील करने पर मजबूर कर देता है । नाप भूमि के साथ मिलने वाला बेनाप भूमि का टुकड़ा दिल्ली के बड़े बाज़ारों में चल रही एक के साथ एक फ़्री की स्कीम से अधिक आकर्षक प्रतीत होती है और कई मर्तबा तो ऐसा प्रतीत होता है जैसे समूचे पहाड़ को दिल्ली की बाज़ारों में सेल के लिए सज़ा दिया गया हो । और दूसरा पहाड़ों की जमीन गोलखातो मै है एक खाते में 100 से 150 तक भी हकदार हैं इसका फायदा भी बेधड़क उठाया जा रहा है।

कई मर्तबा तो मुझे पूरा पहाड़ ही बेनाप प्रतीत होता है, सच्चाई तो यह है कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण ही बेनाप भूमी पर किया गया है । हमें समझना पड़ेगा कि उत्तराखंड राज्य गठित नहीं किया गया था बल्कि इसका निर्माण हुआ था ।

मुझे अपने पैतृक ग्राम में अपने पैतृक आवास के समीप पुदीना और मिर्ची उगाने के लिए एक मुट्ठी ज़मीन नहीं मिल पाती है लेकिन पूरे पहाड़ों में बाहरी लोगों की बेनाप भूमी में बने आलीशान बंगलों को देखकर मैं आश्चर्यचकित हो जाता हूँ । मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि पहाड़ों में बीस-बीस नाली में बने हुए बंगले , होटल या रिजार्ट पूर्ण रूप से माप भूमि पर नहीं बने हुए हैं ।
मैं स्वयं को उत्तराखंड का मूल निवासी कहता और समझता हूँ । मुझे नहीं मालूम कि मेरे पास वहाँ कितनी ज़मीन है लेकिन जितनी भी होगी वह दस नाली से अधिक नहीं होगी और वो भी एक नाली ताल स्यार में और दूसरी नाली माल स्यार में । मेरी कुल कृषि योग्य भूमि से अधिक बेनाप भूमी के रकबे में दिल्ली के लालाजी ने कार्पेट घास लगा रखी है या पार्किंग बनाई हुई है । क्या सितम है कि बेनाप भूमियों पर बाहरी लालाओं का क़ब्ज़ा करवाया जा सकता है लेकिन उन भूमियों को पहाड़ के किसी काश्तकार के नाम करके उस काश्तकार के कृषि योग्य भूमि के रकबे को बढ़ाया नहीं जा सकता ।

हम पहाड़ी दिल्ली NCR में महाकौतिक आयोजित करते हैं इन कौतिकों में थोड़ा पहाड़ बेचकर हम लोग स्वयं को उत्तराखंडवाद का फ़नकार समझते हैं । ताज्जुब तब होता है जब इन संस्कृति के ठेकेदारों से मूल निवास या Inner line permit system की बात करो तो ये बग़लें झांकने लगते हैं ।
आखिर किसे मानें इसका जिम्मेदार???
कही न कही हम ही हैं

 #महिलाएं डोली में लाई पर बुजुर्ग को नहीं बचा पाईं।😭उत्तराखंड चमोली जिले के कुनियाड़ गांव के सुदूर गोगनानी में सड़क न हो...
23/09/2026

#महिलाएं डोली में लाई पर बुजुर्ग को नहीं बचा पाईं।😭

उत्तराखंड चमोली जिले के कुनियाड़ गांव के सुदूर गोगनानी में सड़क न होने के कारण एक और बेबस बुजुर्ग की जान चली गई। पुरुषों के पलायन से गांव की महिलाओं ने कंधे पर डोली उठाकर मुख्य मार्ग तक का सफर तय किया, लेकिन समय पर इलाज न मिलने से उन्हें बचाया नहीं जा सका। चमोली जिले के ग्राम पंचायत कुनियाड के कोठा गोगनानी तोक में 18 सितंबर को पहाड़ के कठिन जीवन और सिस्टम की अनदेखी की तस्वीर सामने आई।

पेशे से पेंटर 62 साल के बलवंत सिंह नेगी को दिल का दौरा पड़ा, पर सड़क विहीन गांव के कारण रात भर तड़पने को मजबूर रहा। सुबह जब अस्पताल ले जाने को गांव में पुरुष और युवा नहीं मिले, तो वहां की मातृशक्ति ने हिम्मत जुटाई। महिलाओं ने खुद डोली उठाई और पथरीले रास्तों से होते हुए किसी तरह मुख्य सड़क तक पहुंचीं। उन्हें उप जिला चिकित्सालय चौखुटिया और फिर हायर सेंटर ले जाया गया, पर उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

क्या होगा पहाड़ का भविष्य???

23/09/2026

जब प्रभु आपके साथ हैं तो हर विपत्ति, संपत्ति बन जायेगी ♥️

 #उत्तराखंड के नौजवानों की शादी का संकट: क्या हमारा समाज जिम्मेदार है?दोस्तों, नमस्कार! 🙏आज मैं उत्तराखंड के उन नौजवानों...
22/09/2026

#उत्तराखंड के नौजवानों की शादी का संकट: क्या हमारा समाज जिम्मेदार है?

दोस्तों, नमस्कार! 🙏

आज मैं उत्तराखंड के उन नौजवानों की शादी को लेकर कई परिवारों में मायूसी का माहौल है।

❓ लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह समस्या पैदा क्यों हो रही है?
मेरा मानना है कि इसके पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण हैं।

90 के दशक में उत्तराखंड सहित देश के कई हिस्सों में बेटियों की शादी का खर्च परिवारों के लिए बड़ी चिंता हुआ करता था। परिवार छोटे होने लगे और कुछ परिवारों में बेटियों के जन्म को लेकर सकारात्मक सोच का अभाव भी था।

उस समय बहुत-सी बेटियों को उच्च शिक्षा के अवसर नहीं मिल पाए। हालांकि, जिन बेटियों को पढ़ने का मौका मिला, उनमें से कई ने शिक्षा प्राप्त कर नौकरी हासिल की और अपने जीवन को बेहतर बनाया।

आज समय बदल चुका है। उत्तराखंड की बेटियाँ उच्च शिक्षा प्राप्त कर बड़े शहरों में नौकरी कर रही हैं। कई बेटियाँ उत्तराखंड से बाहर विवाह कर अपना परिवार बसा रही हैं। यह उनका व्यक्तिगत अधिकार और जीवन का निर्णय है।

दूसरी ओर, पहाड़ों में रहने वाले कई नौजवानों के सामने रिश्ते मिलने की चुनौती बढ़ती दिखाई दे रही है।

कुछ परिवार शहर में मकान, सरकारी नौकरी या बेहतर आर्थिक स्थिति को प्राथमिकता देते हैं। वहीं, गाँव में खेती, व्यवसाय या अन्य रोजगार करने वाले युवाओं को विवाह के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

⚠️ अगर यह समस्या लगातार बढ़ती रही तो इसका असर उत्तराखंड के पहाड़ों पर क्या पड़ेगा?

पहले ही पहाड़ों से पलायन एक बड़ी चुनौती है। यदि गाँवों में रहने वाले युवाओं को विवाह के अवसर नहीं मिलेंगे और परिवार गाँव में बसना नहीं चाहेंगे, तो आने वाले वर्षों में पहाड़ी क्षेत्रों की सामाजिक और जनसंख्या संरचना पर असर पड़ सकता है।

सभी जनप्रतिनिधियों से निवेदन है कि इस विषय को गंभीरता से लिया जाय।

हमें बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान को बढ़ावा देने के साथ-साथ गाँवों में रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाएँ और बेहतर जीवन की परिस्थितियाँ विकसित करनी होंगी, ताकि बेटियाँ और बेटे दोनों अपने भविष्य के बारे में स्वतंत्र निर्णय ले सकें।

साथ ही, समाज को भी अपनी सोच बदलनी होगी। विवाह में केवल सरकारी नौकरी, शहर का मकान या आर्थिक स्थिति को ही प्राथमिकता देने के बजाय शिक्षा, संस्कार, आपसी समझ और सम्मान को भी महत्व देना चाहिए।

बेटियों के जन्म और शिक्षा को प्रोत्साहित करने वाली योजनाओं के साथ-साथ ऐसे उपायों पर भी विचार होना चाहिए, जो ग्रामीण क्षेत्रों में परिवार बसाने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करें।

🙏 इस पर अपनी राय जरूर दें।

क्या सरकार और समाज मिलकर इसका कोई समाधान निकाल सकते हैं?



ये विचार shree kuber singh ji की वाल से ली गई है इस सोच का मै भी समर्थन करता हूं

 #कुमाऊं का द्वार हल्द्वानी अब उत्तराखंड के बड़े शहरों में गिना जाता है लेकिन यहां की अब तक कोई ऐसी चीज नहीं है जो famou...
21/09/2026

#कुमाऊं का द्वार हल्द्वानी अब उत्तराखंड के बड़े शहरों में गिना जाता है लेकिन यहां की अब तक कोई ऐसी चीज नहीं है जो famous फेमस हो।
जैसा कि लगभग हर बड़े शहर की होती है।।
आपको क्या लगता है हल्द्वानी की कौन सी चीज famous हो सकती है जिससे पयर्टक और ज्यादा शहर में आएं ♥️♥️♥️

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