03/07/2025
चाँदनी रात थी। हिमालय की वादियों में ठंडी हवा के झोंके बह रहे थे। बर्फ से ढकी चोटियों के बीच एक छोटा-सा पहाड़ी गाँव था – गौरिखेत। वहीं रहती थी एक सीधी-सादी लेकिन दिल से नर्म लड़की – अनजल बैननी।
अनजल किताबों में डूबी रहने वाली, सपनों में खो जाने वाली लड़की थी। लेकिन उस रात... सब कुछ बदल गया।
उसने अपनी खिड़की से झाँका और देखा – घाटी की गहराई में एक चमकती हुई नीली रौशनी हवा में तैर रही थी। अचानक वो रौशनी पास आने लगी। तेज़! और तेज़! वो डर गई, लेकिन आँखें झपकाई नहीं।
अचानक बिजली सी कौंधी और सामने खड़ा था — एक अजनबी लड़का, नीली आँखे, सफेद बाल, चमकती जैकेट, और कंधे पर एक अजीब सी तलवार।
“तुम... कौन हो?” अनजल की आवाज काँप रही थी।
“मैं... कोई नहीं हूं। पर तुम्हारे पास कुछ है जो मुझे चाहिए,” उसने धीमे से कहा।
लड़का कोई आम इंसान नहीं था। उसका नाम था अर्ज़ेल, और वो चंद्रलोक से आया था। एक योद्धा, जिसे शाप मिला था – जब तक वो अपने खोए हुए ‘आखिरी प्यार’ को नहीं पाएगा, वो पृथ्वी पर भटकता रहेगा।
“तुम्हारी आँखों में वही चमक है... जो मेरी दुनिया की रानी की थी,” अर्ज़ेल ने कहा।
अनजल को हँसी आई, “क्या तुम मुझे किसी रानी से मिला रहे हो?”
“नहीं… शायद तुम ही हो…” उसकी आवाज धीमी पड़ गई।
उसी रात अर्ज़ेल ने बताया कि चंद्रलोक का एक राक्षस, जराम, उसकी रानी को मार चुका है और अब उसे अनजल में उसी आत्मा का पुनर्जन्म दिखता है। अनजल हँसती रही, लेकिन उसका दिल धड़कने लगा।
अर्ज़ेल अनजल के आस-पास रहने लगा। वो उसे जादुई कहानियाँ सुनाता, आसमान के नक्शे दिखाता और कभी-कभी चुपचाप उसकी आँखों में देखता रहता।
कुछ दिनों में अनजल को भी महसूस हुआ – यह अजनबी अब अजनबी नहीं रहा।
लेकिन एक रात, जब चाँद लाल हुआ, अर्ज़ेल ने कहा, “कल रात जराम वापस आएगा। और इस बार… वो तुम्हें मारेगा।”
“मुझे क्यों?” अनजल चौंकी।
“क्योंकि वो जानता है… कि तुम ही मेरी रानी हो। और अगर तुम मर गईं, तो मैं हमेशा के लिए अकेला रह जाऊँगा।”
पूरा गाँव अंधेरे में डूबा था। अनजल ने पहली बार उस नीली तलवार को अपने हाथ में लिया। “मुझे लड़ना है,” उसने कहा।
अर्ज़ेल ने उसकी आँखों में देखा — “मैं तुम्हें खो नहीं सकता।”
और तभी आकाश से आग गिरने लगी। जराम – वो विशाल राक्षस जो धुएँ और काले जादू से बना था – उनके सामने आ खड़ा हुआ।
अर्ज़ेल और जराम की ज़बरदस्त लड़ाई हुई। तलवारें टकराईं, बिजली कड़की, और हवा में आग की लपटें गूंज उठीं।
जराम ने अनजल की तरफ वार किया – लेकिन अनजल ने अर्ज़ेल की तलवार उठा ली।
“अगर मैं तुम्हारी रानी थी… तो मैं तुम्हारा अंत भी बनूंगी।”
इतना कहकर अनजल ने तलवार सीधे जराम के सीने में घोंप दी।
एक चमक हुई… और सब कुछ शांत हो गया।
अर्ज़ेल ज़मीन पर गिर पड़ा। वो मुस्कराया, “तुमने मेरा श्राप तोड़ दिया, अनजल। अब मैं जा सकता हूँ...”
“नहीं!” अनजल रो पड़ी। “तुम नहीं जा सकते…”
“मुझे जाना होगा। चंद्रलोक मुझे पुकार रहा है। लेकिन वादा करता हूँ – हर चाँदनी रात को, जब तुम आसमान में देखोगी... मैं वहीं होऊँगा।”
उसने उसका हाथ चूमा... और नीली रौशनी में गायब हो गया।
कई साल बीत गए। अनजल अब एक लेखिका बन चुकी थी। उसकी पहली किताब थी –
“चंद्रलोक का योद्धा”
लोगों ने पूछा – “क्या ये कहानी सच्ची है?”
वो मुस्कराई और आसमान की तरफ देखा,
“कभी-कभी सबसे जादुई कहानियाँ… सबसे सच्ची होती हैं।”