19/12/2024
शीघ्र प्रकाशित होने वाले मेरे दूसरे काव्य संग्रह
" तुम अपनी सारी नफरतें मुझे दे दो" की प्रथम कविता।
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तुम अपनी नफरतें मुझे दे दो।
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तुम कितनी वहशतें पाले हुए हो !
गले में यह नाग जो डाले हुए हो !
तुम शंकर सा विषपायी तो नहीं ,
फिर विष पात्र क्यों थामे हुए हो ?
स्रष्टा खुद ही खुद से प्रश्न करके,
अपनी सृष्टि पर भौंचक खड़ा है।
जिससे उम्मीद थी सर्जक बनेगा,
क्यों यमराज सा तनकर खड़ा है?
दहन में तुम्हारा भी घर जलेगा।
घृणा से अंत अति विचित्र होगा,
यह काला नाग तुमको भी डंसेगा।
यह विषधर न तुम्हारा मित्र होगा।
जो आया था धरा को जीतने को,
बोलो ! वह सिकंदर अब कहाँ है?
जिस दंभ में था वह महा योद्धा,
ढूंढो ! उसकी अब मिट्टी कहाँ है?
क्या तुम ही जगत में श्रेष्ठतम हो?
कभी अपनी तरफ भी देख लेना।
विजय का दंभ जब मन में चढ़े तो,
उसमें अपना पतन भी देख लेना।
जिस श्रेष्ठता पर है दंभ तुमको,
वह तुम्हारा नहीं, एक वक्त भर है।
खुद को सिंधु समझना मूर्खता है।
तेरी हस्ती तो बस एक बूंद भर है।
तुम खुद को सूर्य कहते हो? कहो,
फिर तिमिर रथ पर क्यों चढ़े हो?
ओ रोशनी के मेरे भटके मसीहा!
दियों को बुझाने पर क्यों अड़े हो?
जिसे तुम धर्म ग्रंथों में ढूंढते हो,
वह ईश्वर मिट्टी का गागर नहीं है ।
स्रष्टिकर्ता है सभी सरहदों से परे ,
उसके सम्मुख कोई सागर नहीं है ।
घृणा की आग में क्यों जल रहे हो ?
घनी अंधेरी रात्रि में प्रदीप बनो ।
जहां अंतिम दिया भी बुझ चुका है ,
वहां तुम चिर प्रज्वलित दीप बनो ।
अग्नि बनो तो सृजन की अग्नि बनो।
क्रोध की अग्नि तुम्हें ही क्षय करेगा ।
तुम्हारा जीवन ही कठिन अग्निपथ है ,
अगर सम्हले नहीं तो खुद ही जलेगा ।
धरा से प्रकाश पुंज विलुप्त हो गया ,
तमस सारी धरती पर पसरा हुआ है ।
अपने- पराये का है भेद मिट चुका ,
आदमी कई टुकड़ों में टूटा हुआ है ।
गृष्म में वसंत की पुरवाई बन जा।
धरा पर गिर,अमृत की बूंद बन जा।
निराशाओं में नयी उम्मीद बन जा।
तमस के राज में तुम सूर्य बन जा।
निराशा चारों तरफ पसरा हुआ है ।
लगता है,यहां पर कुछ बुरा हुआ है
भाई का भाई पर भरोसा उठ चुका,
आदमी अपने आप से डरा हुआ है।
हर तरफ फैले हुए हैं धर्म के घरौंदे ,
हर कोई ईश्वर को है यहां बेच रहा ।
सबने किया हुआ है धर्म का नशा ,
कौड़ियों के दाम खुद को बेच रहा ।
अब व्यर्थ के संघर्ष को विश्राम देदो।
बहुत हुआ, स्वयं को अब त्राण देदो ।
स्वर्ग इसी धरा पर उतर कर आयेगी,
तुम अपनी सारी नफरतें मुझे देदो ।
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