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11/02/2026

हल्लो दोस्त सादर नमस्कार।

मेरा नाती प्यारा साथी।
11/02/2026

मेरा नाती
प्यारा साथी।

13/02/2023

क्या कहने है आपके?
आपने भय को भगवान बना दिया।
लूटा आपने मुझे
मेरी तंगहाली को तुमने नसीब बता दिया।।

राजाराम विद्यार्थी

13/02/2023

संघर्षो से जूझ रहा मै
जग कहता है पावन है।
कही भटकती आशा मेरी
कहीं उमड़ता सावन है।।
भूख प्यास की मुझे न चिन्ता
मै तो पथ का राही हू।
निन्द्रा तन्द्रा मुझे न घेरे
निज मार्ग का सच्चा साथी हू।।
मानव ने मानवता खोई
मै मानवता मन से मानूगा।
गुण समूह से मानवता के
गुरुता जग मे प्रकट करूगा।।
मन नही चाहता जग का वैभव
नही चाहता अति सम्मान ।
मानवता ही रहे अखंडित
मै चाहू मानवता मान। ।
कुलिश किनारे टूट रहे हो
ज्वलित सितारे फूट रहे हो।
चाहू मै कल्याण जगत का
बुद्ध अम्बेडकर से मिला है ज्ञान।।

राजाराम विद्यार्थी
स्वरचित

10/01/2023

मौलिक कविता राजाराम विद्यार्थी
बचपन

बचपन अपना रोते बिता
खुशहाली क्या होती है?
न पेट भर अन्न
न तन पर वस्त्र
कृष्ण कन्हैया सा बचपन
होता होगा और कही।
हमने तो अपने बचपन मे
सुख कभी देखा नही।।
कभी न मागे चान्द सितारे
केवल रोटी मागी थी
हमने अपने बचपन मे भी
कोई सीमा न लाई थी
कैसा ग्यान कैसी शिक्षा
श्रमजीवी माता पिता को
उनके कठोर श्रम का मूल्य
मिलता था मानो भिक्षा।
खेल किसे कहते है
ये कभी न जान पाया
जवानी ने भी न कोई
कहर ढाया।
सिर्फ बुढापा सामने आया।

01/01/2023

वो पल जो बीत गये
उनकी क्या बात करे
आऔ फिर से कुछ
नये सुखो की हम
तलाश करे
कुछ सुनहरे पलो को
दामन मे लेकर
उनसे ही प्यार की
बात करे
आऔ इस नये साल की
हम नयी शुरूआत करे

अब एक नयी अनुभूति हो।
आनन्द हो नव स्फूर्ति हो

कुछ ऐसा हो लहरे से
घरौंदे न टूटे
प्यार की डोर हाथो से न छूटे स्वप्निल नीड़ मे
यथार्थ का जीवन चुके
सुखद हो नव वर्ष तुम्हे
तुम्हारा घर ऑगन महके।

31/12/2022

अलविदा बर्ष 2022 खुशिया याद रखने लायक है।

24/12/2022

काव्य पाठ

24/12/2022

भूख प्यास की मुझे न चिन्ता
मै तो पथ का राही हू।
निन्दा तन्द्रा मुझे न घेरे
निज मार्ग का सच्चा साथी हू।।

मानव ने मानवता खोई
मै मानवता उर से मानेगा
गुण समूह से मानवता के
गुरुता जग मे प्रकट करूगा।

मन नही चाहता जग का वैभव
नही चाहता अति सम्मान
मानवता ही रहे अखण्डता
मै चाहे मानवता मान।

कुलिश किनारे टूट रहे हो
ज्वलित सितारे फूट रहे हो
चाहे मै कल्याण जगत का
बुद्ध अम्बेडकर से मि ला यह ग्यान

।राजाराम विद्यार्थी

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