14/06/2025
जब हनुमान जी लंका जलाकर लौट रहे थे, तब उन्होंने समुद्र में डुबकी लगाई ताकि शरीर की ज्वाला शांत हो। उसी समय उनके शरीर से पसीने की एक बूंद समुद्र में गिरी, जिसे एक मगरमच्छ (मछली रूपी जलजीव) ने निगल लिया।
कालांतर में उस मछली के गर्भ से एक बलवान बालक जन्मा, जो आधा वानर और आधा जलजीव जैसा था। उसका नाम रखा गया: मकरध्वज।
🔐 यमलोक के द्वार पर भेंट
राम-रावण युद्ध के बाद, जब राम जी ने अहिरावण और महिरावण नाम के दो असुरों को मारने के लिए हनुमान जी को पाताल लोक भेजा, वहाँ द्वार पर एक बलशाली योद्धा पहरा दे रहा था।
हनुमान जी ने उसे परास्त किया और पूछा,
“तू कौन है जो मुझसे बिना डरे लड़ रहा है?”
उसने उत्तर दिया:
“मैं मकरध्वज हूँ – हनुमान जी का पुत्र।”
हनुमान जी चकित रह गए, लेकिन फिर उसे पूरी बात बताई – कैसे समुद्र में उनके शरीर से निकली बूंद से उसका जन्म हुआ।
हनुमान जी ने उसे गले से लगा लिया
हनुमान जी ने कहा, “तू मेरा पुत्र नहीं, मेरे तप और तेज का फल है, लेकिन फिर भी मैं तुझे पुत्रवत स्वीकार करता हूँ।”
उन्होंने मकरध्वज को पाताल लोक का रक्षक नियुक्त किया।
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