Jay Hanuman

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जब हनुमान जी लंका जलाकर लौट रहे थे, तब उन्होंने समुद्र में डुबकी लगाई ताकि शरीर की ज्वाला शांत हो। उसी समय उनके शरीर से ...
14/06/2025

जब हनुमान जी लंका जलाकर लौट रहे थे, तब उन्होंने समुद्र में डुबकी लगाई ताकि शरीर की ज्वाला शांत हो। उसी समय उनके शरीर से पसीने की एक बूंद समुद्र में गिरी, जिसे एक मगरमच्छ (मछली रूपी जलजीव) ने निगल लिया।

कालांतर में उस मछली के गर्भ से एक बलवान बालक जन्मा, जो आधा वानर और आधा जलजीव जैसा था। उसका नाम रखा गया: मकरध्वज।

🔐 यमलोक के द्वार पर भेंट

राम-रावण युद्ध के बाद, जब राम जी ने अहिरावण और महिरावण नाम के दो असुरों को मारने के लिए हनुमान जी को पाताल लोक भेजा, वहाँ द्वार पर एक बलशाली योद्धा पहरा दे रहा था।

हनुमान जी ने उसे परास्त किया और पूछा,
“तू कौन है जो मुझसे बिना डरे लड़ रहा है?”

उसने उत्तर दिया:
“मैं मकरध्वज हूँ – हनुमान जी का पुत्र।”

हनुमान जी चकित रह गए, लेकिन फिर उसे पूरी बात बताई – कैसे समुद्र में उनके शरीर से निकली बूंद से उसका जन्म हुआ।

हनुमान जी ने उसे गले से लगा लिया

हनुमान जी ने कहा, “तू मेरा पुत्र नहीं, मेरे तप और तेज का फल है, लेकिन फिर भी मैं तुझे पुत्रवत स्वीकार करता हूँ।”
उन्होंने मकरध्वज को पाताल लोक का रक्षक नियुक्त किया।

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#शक्तिकेप्रतीक #हनुमानकथा

बहुत समय पहले की बात है। शनिदेव अपनी दृष्टि से लोगों को कष्ट देते थे। देवता, ऋषि-मुनि और राजा सभी उनसे डरते थे।उनकी नजर ...
12/06/2025

बहुत समय पहले की बात है। शनिदेव अपनी दृष्टि से लोगों को कष्ट देते थे। देवता, ऋषि-मुनि और राजा सभी उनसे डरते थे।
उनकी नजर जिस पर भी पड़ती, उसका दुर्भाग्य शुरू हो जाता।

एक दिन शनिदेव की दृष्टि भगवान राम के भक्त हनुमान जी पर पड़ी। शनिदेव ने कहा:
"अब तुम्हारे जीवन में भी कष्ट आएगा, क्योंकि मेरी दृष्टि से कोई नहीं बच सकता!"

हनुमान जी मुस्कराए और बोले,
"अगर तुम मुझे कष्ट देना चाहते हो, तो ठीक है। लेकिन पहले मेरे साथ बैठ जाओ, ताकि मैं ध्यान कर सकूं।"

जैसे ही शनिदेव हनुमान जी की पीठ पर बैठे, हनुमान जी ने अपना शरीर विशाल कर लिया और ध्यान मुद्रा में बैठ गए।
उनकी पूंछ हिलती रही और शनिदेव दबते रहे।

कुछ समय बाद शनिदेव चिल्लाने लगे:
"मुझे क्षमा करो हनुमान जी! मुझे छोड़ दो, मैं अब कभी तुम्हारे भक्तों को कष्ट नहीं दूंगा!"

हनुमान जी ने तब उन्हें छोड़ दिया, और शनिदेव ने वचन दिया:
"जो भी तुम्हारी सच्चे मन से पूजा करेगा, उस पर मेरी कुदृष्टि कभी नहीं पड़ेगी!"

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🌟 सीख:

हनुमान जी केवल शक्ति के प्रतीक नहीं, बल्कि अपने भक्तों के सच्चे रक्षक भी हैं।
अगर आप हनुमान जी की भक्ति करते हैं, तो किसी शनि, ग्रह या बाधा से डरने की जरूरत नहीं।

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लंका युद्ध के समय जब लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए थे, तब सभी देवता भी चिंतित थे। जब संजीवनी बूटी लाने की बात आई, तो हनुमान ज...
12/06/2025

लंका युद्ध के समय जब लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए थे, तब सभी देवता भी चिंतित थे। जब संजीवनी बूटी लाने की बात आई, तो हनुमान जी हिमालय की ओर उड़ चले।

लेकिन रास्ते में एक बड़ी बाधा खड़ी हो गई — काल (यमराज) स्वयं प्रकट हो गए और बोले:

"हनुमान! हर प्राणी का जीवन निश्चित है। लक्ष्मण का समय पूरा हो गया है, तुम उसे नहीं बचा सकते!"

हनुमान जी ने नम्रता से उत्तर दिया,
"मैं भगवान राम का दास हूँ। उनका आदेश है लक्ष्मण को बचाने का — और इस आदेश से बड़ा कोई धर्म नहीं।"

यमराज ने क्रोधित होकर कहा,
"यदि तुम मुझे रास्ता नहीं दोगे, तो तुम्हें युद्ध करना होगा!"

हनुमान जी ने अपना विशाल रूप धारण किया और यमराज से भयंकर युद्ध किया।
आखिरकार यमराज ने मुस्कराकर कहा:

"हनुमान, तुम्हारी भक्ति, साहस और निष्ठा अतुलनीय है। तुमसे युद्ध करना असंभव है। मैं मार्ग छोड़ता हूँ, जाओ और अपने आराध्य के भाई को जीवनदान दो।"

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🌟 सीख:

जहाँ निष्ठा और भक्ति अडिग हो, वहाँ मृत्यु भी रुक जाती है।
हनुमान जी केवल बलवान नहीं, भक्ति और बुद्धि के अद्भुत संगम हैं।

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12/06/2025

🕉️ "शिव शक्ति है, शक्ति ही शिव है!" 🔱

भगवान शिव केवल एक देव नहीं हैं,
वो ब्रह्मांड की ऊर्जा हैं, विनाश और सृजन के अधिपति हैं।
जब संसार थक जाता है, तब महादेव ध्यान में बैठते हैं —
और वहीं से जन्म लेती है नई शक्ति, नई शुरुआत।

🚩 शिव की तीसरी आंख सिर्फ विनाश नहीं करती,
वो अहंकार, अंधकार और अन्याय को जलाकर
सत्य, प्रेम और चेतना का उजाला लाती है।

🙏 जब जीवन में कुछ न बचे —
तो 'ॐ नमः शिवाय' जप लो,
फिर देखो, कैसे शिव तुम्हारे भीतर छिपी शक्ति को जगा देंगे।
क्योंकि शिव सिर्फ मंदिरों में नहीं,
हर उस इंसान के भीतर हैं जो सच्चा है, शांत है, और शक्तिशाली है।

#महादेव #शिवशक्ति #भोलेनाथ #ॐनमःशिवाय #महाकाल

राधा की रुनझुन में तू,मुरली की तान में तू,हर धड़कन की धुन में तू,जीवन की जान में तू।माथे पे मोरपंख सजा,नटखट सी तेरी अदा,...
05/06/2025

राधा की रुनझुन में तू,
मुरली की तान में तू,
हर धड़कन की धुन में तू,
जीवन की जान में तू।

माथे पे मोरपंख सजा,
नटखट सी तेरी अदा,
गोपियों का तू मनमोहन,
संसार का तू रखवाला।

जब-जब हुआ अन्याय यहां,
तू बनके धर्म चला आया,
गीता के ज्ञान से तूने,
जग को सच्चा मार्ग दिखाया।

कभी तू बाल गोपाल बना,
कभी रण का रथ चलाया,
मोह-माया से दूर रहकर,
कर्म का दीप जलाया।

तेरे नाम में है शक्ति इतनी,
जो टूटे उसे जोड़ दे,
बस एक बार ‘श्याम’ पुकारो,
कण-कण में तू दौड़ दे।

एक बार की बात है, जब रामराज्य की स्थापना हो चुकी थी और अयोध्या में सभी लोग आनंदित थे। भगवान राम ने सोचा कि अब समय आ गया ...
05/06/2025

एक बार की बात है, जब रामराज्य की स्थापना हो चुकी थी और अयोध्या में सभी लोग आनंदित थे। भगवान राम ने सोचा कि अब समय आ गया है कि वे अपने भक्तों को कुछ उपहार दें।

उन्होंने सबको बुलाया – भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न, सीता माता, ऋषि-मुनि और अंत में हनुमानजी को।

रामजी ने सभी को कुछ-न-कुछ बहुमूल्य रत्न, वस्त्र, और उपहार दिए।
पर जब हनुमानजी की बारी आई, तो रामजी ने मुस्कराते हुए कहा,
"हनुमान, तुम जो चाहो, माँग सकते हो।"

हनुमानजी हाथ जोड़कर बोले:
"प्रभु! मुझे कुछ नहीं चाहिए। बस इतना वरदान दीजिए कि जब तक इस धरती पर आपका नाम लिया जाए, मेरा नाम भी साथ लिया जाए।"

यह सुनकर सभी दरबारी भावुक हो गए।

रामजी की आँखों में आँसू आ गए। उन्होंने हनुमान को गले लगा लिया और कहा:
"हनुमान! जब तक यह सृष्टि रहेगी, जब तक मेरा नाम रहेगा, तब तक तेरा यश और भक्ति अमर रहेगी।"

🌺 तभी से हर राम कथा, राम भजन और राम मंदिर में सबसे पहले हनुमानजी का नाम लिया जाता है – क्योंकि वे केवल भक्त नहीं, राम के अपने हैं।

हनुमानजी #रामभक्ति #श्रीराम

एक दिन, सीता माता भगवान राम के लिए सिंदूर लगा रही थीं। यह देखकर हनुमानजी को जिज्ञासा हुई।उन्होंने विनम्रतापूर्वक पूछा,"म...
05/06/2025

एक दिन, सीता माता भगवान राम के लिए सिंदूर लगा रही थीं। यह देखकर हनुमानजी को जिज्ञासा हुई।
उन्होंने विनम्रतापूर्वक पूछा,
"माते, आप यह सिंदूर क्यों लगाती हैं?"

सीता माता मुस्कुराईं और बोलीं,
"हनुमान, यह सिंदूर मैं इसलिए लगाती हूँ क्योंकि इससे मेरे स्वामी श्रीराम की आयु लंबी होती है और उनका सौभाग्य बना रहता है।"

यह सुनते ही हनुमानजी भावुक हो गए।
उन्होंने सोचा, "यदि थोड़े से सिंदूर से प्रभु की आयु बढ़ती है, तो मैं पूरे शरीर पर सिंदूर लगाकर उन्हें अमर क्यों न कर दूं?"

अगले ही दिन, हनुमानजी ने सिर से पैर तक खुद को सिंदूर से रंग लिया और दरबार में पहुँच गए।

भगवान राम ने मुस्कराते हुए पूछा,
"हनुमान, ये क्या किया?"

हनुमान बोले,
"प्रभु! मैं चाहता हूँ कि आपकी उम्र अनंत हो, इसलिए खुद को पूरी तरह सिंदूर में रंग लिया।"

रामजी की आँखें भर आईं। उन्होंने हनुमान को गले से लगा लिया और कहा,
"ऐसा भक्त संसार में कोई नहीं।"

इसलिए आज भी मंदिरों में हनुमानजी को सिंदूर अर्पित किया जाता है।

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#हनुमानजी #भगवानराम #सीतामाता #भक्ति

कर्म ही जीवन का आधार है।बिना फल की चिंता किए जो अपना कर्तव्य निभाता है, वही सच्चे अर्थों में जीवन को समझता है।संसार में ...
05/06/2025

कर्म ही जीवन का आधार है।
बिना फल की चिंता किए जो अपना कर्तव्य निभाता है, वही सच्चे अर्थों में जीवन को समझता है।
संसार में हर कार्य का एक परिणाम होता है – अच्छा या बुरा – परंतु हमारे हाथ में केवल कर्म है, फल नहीं।
इसलिए श्रेष्ठ सोचो, अच्छा करो, और निष्काम भाव से कर्म करते रहो।

यही गीता का सार है – 'कर्म करो, फल की इच्छा मत करो।' 🌱

#कर्म

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