Güptæ Metasat Mukesh

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19/03/2024

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16/08/2020

"कुछो काम नहीं है, हम सब दसो रुपया के लिए 'आदमी' का मुँहतकवा हैं, हमें कुछ काम दीजिए!" आख़िरकार आरा में स्त्रियाँ निकलीं और बोलीं, और क्या बोलीं! न जाति, न धर्म, प्लुरल्स का अजेंडा सिर्फ़ बिहार और मेरे सिर्फ़ तीन मुद्दे - रोज़गार, रोज़गार और रोज़गार!

16/08/2020

न जाति, न धर्म, इस बार मुद्दा बस रोज़गार। सबको रोज़गार!

एक नजर बनमनखी चीनी मिल पर..बनमनखी चीनी मील की स्थापना दि पूर्णिया को-आपरेटिव सुगर फैक्ट्री लि., बनमनखी के नाम से 28.4.19...
18/05/2020

एक नजर बनमनखी चीनी मिल पर..
बनमनखी चीनी मील की स्थापना दि पूर्णिया को-आपरेटिव सुगर फैक्ट्री लि., बनमनखी के नाम से 28.4.1956 को हुई थी, जो 3 जून 1977 तक सहकारिता के अधीन रहा। 2 फरवरी 1970 से इस मील में चीनी का उत्पादन शुरू हुआ, परंतु इस बीच बिहार सरकार द्वारा भारत के राष्ट्रपति से अनुमति प्राप्त करते हुए बिहार सरकार के अधिनियम संख्या 13/1977 बिहार राज्यपाल द्वारा सहकारिता से बिहार राज्य चीनी मील निगम को सौंप दिया गया। इस मील की क्षमता एक हजार टन प्रतिदिन थी। मील की अपनी 119.76 एकड़ की अचल संपत्ति है, जिसमें से 64.76 एकड़ में मील, आवासीय कॉलोनी एवं गोदाम आदि अवस्थित है। एशिया के सबसे बड़़े इस मिल के कारण पूर्णिया और कोसी प्रमंडल के लाखों किसान और कामगार खुशहाल थे. हजारों लोगों को चीनी मिल के कारण रोजगार मिला था लेकिन पर्याप्त मात्रा में गन्ना, बिजली और पानी उपलब्ध न हो पाने की वजह से 1997 में घाटा की बात कहकर लालू यादव की सरकार ने चीनी मिल को सदा के लिये बंद कर दिया. अब तो हालत ये है कि चीनी मिल खंडहर में तब्दील हो गयी है.एसबीआई कैपिटल मार्केट्‌स लिमिटेड (एसबीआईसीएपी) की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, 1980 में बिहार में 28 चीनी मिलें थीं, जिनकी क्रसिंग कैपेसिटी 34 हज़ार टन थी। इन सभी मिलों के यूनिट्‌स की प्रगति के लिए बिहार सरकार ने 1974 में बिहार स्टेट सुगर कॉरपोरेशन लिमिटेड का गठन किया। शुरू में कुछ सालों तक मिल से चीनी का अच्छा उत्पादन हुआ, लेकिन यह ज़्यादा समय तक बरक़रार नहीं रह सका। कम फायदा और अधिक ख़र्च का हवाला देते हुए सरकार ने हाथ खड़े कर दिए और 1996-97 तक कई चीनी मिलें एक के बाद एक करके बंद होती चली गईं।
नीतीश सरकार ने इन चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने के वादे कई बार किए, लेकिन बात स़िर्फ वादे तक ही सीमित रह गई।
आज की स्थिति मिल की कीमती मशीनें चोर ले जा रहे हैं. यहां की 119 एकड़ जमीन को सरकार ने बियाडा को सौंप दिया है लोगो में इस बात को लेकर उत्साह है कि जल्द बियाडा द्वारा इस जमीन पर कृषि आधारित उद्योग लगाए जाए ताकि इलाके के किसानो को फसल का सही मूल्य मिल सके।
यहां के मजदूरों को अपने गृह राज्य और और जिले में काम मिल सकें जिनसे उन्हें पलायन कर अन्य राज्यों में ना जाना पड़े

पुलवामा आतंकी हमले (Pulwama Terror Attack) के बाद भारतीय वायुसेना (Indian AirForce) ने एलओसी (LOC) पार कर बड़ी कार्रवाई ...
26/02/2019

पुलवामा आतंकी हमले (Pulwama Terror Attack) के बाद भारतीय वायुसेना (Indian AirForce) ने एलओसी (LOC) पार कर बड़ी कार्रवाई की है। मिराज-2000 के 12 विमानों ने एलओसी पार कर आतंकी कैंपों पर एक हजार किलो के बम गिराए। इससे वहां मौजूद सभी आतंकी कैंप ध्वस्त हो गए। यह हमला मंगलवार सुबह 3:30 पर किया गया। यह जानकारी न्यूज एजेंसी एएनआई ने भारतीय वायुसेना के सूत्रों के हवाले से दी है।

सूत्रों ने पीटीआई को बताया कि भारतीय वायुसेना के विभिन्न लड़ाकू विमानों ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बालाकोट में पाकिस्तान स्थित कई आतंकवादी समूहों के शिविरों को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। गौरतलब है कि इससे पहले 14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले में जैश-ए-मोहम्मद के फिदायिन हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। कई अन्य घायल हुए थे। जैश के आतंकवादी ने विस्फोटकों से लदे वाहन से सीआरपीएफ जवानों को ले जा रही बस को टक्कर मार दी। केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के 2500 से अधिक कर्मी 78 वाहनों के काफिले में जा रहे थे। इनमें से अधिकतर अपनी छुट्टियां बिताने के बाद अपनी ड्यूटी पर लौट रहे थे।

भारत की कार्रवाई पर लगे बिहार में भारत माता की जय के नारे

भारतीय वायु सेना के द्वारा किए गए हमले के बाद बिहार के औरंगाबाद में लोग सड़क पर उतर आए। मंगलवार की सुबह सैकड़ों की संख्या में युवा शहर के रमेश चौक पर जमा हो गए और भारत माता की जय तथा वंदे मातरम के नारे लगाए। इस दौरान आतिशबाजी की गई और लोगों के बीच में मिठाई का वितरण भी किया गया। युवाओं के स्तर से नारेबाजी होती देख स्थानीय लोग जमा हो गए और जमकर नारे लगाए। हमले के बाद औरंगाबाद में चर्चा का बाजार भी शुरू हो गया। लोग इसे कड़ी कार्रवाई बताते हुए इसकी सराहना कर रहे हैं।

दहेज उत्पीड़न क़ानून (498 A) पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम फ़ैसला सुनाया है.अब इस क़ानून के तहत महिला की शिक़ाय...
01/01/2019

दहेज उत्पीड़न क़ानून (498 A) पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम फ़ैसला सुनाया है.

अब इस क़ानून के तहत महिला की शिक़ायत पर उसके पति और ससुराल वालों की गिरफ़्तारी में 'परिवार कल्याण समिति' की कोई भूमिका नहीं होगी.

कोर्ट ने पिछले साल ऐसे मामलों के लिए 'परिवार कल्याण समिति' बनाने की बात की थी. लेकिन कोर्ट ने अपने ताज़ा फ़ैसले में इस समिति के रोल को ख़ारिज कर दिया है.

इसके आलावा सुप्रीम कोर्ट का ये फ़ैसला उनके पिछले साल के दिशा निर्देशों की तरह ही है.

कोर्ट ने पहले कहा था कि दहेज के मामलों में महिला के पति और ससुराल वालों की तुरंत गिरफ़्तारी नहीं होगी और उनके पास अग्रिम ज़मानत लेने का विकल्प भी रहेगा.

भारत के चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविल्कर और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की बेंच ने ये फ़ैसला सुनाया है.

इसी साल 23 अप्रैल को कोर्ट ने सुनवाई के बाद इस मामले में फ़ैसला सुरक्षित रखा था.

दहेज क़ानून, सुप्रीम कोर्ट
क्या था सुप्रीम कोर्ट का पुराना निर्देश?
पिछले साल 27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के दो जजों, जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस उदय उमेश ललित ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए अहम निर्देश दिए थे.

इसमें 498-ए के तहत महिला की शिक़ायत आने पर पति और ससुराल वालों की तुंरत गिरफ़्तारी पर रोक लगाई गई थी.

इनमें सबसे अहम निर्देश है कि पुलिस ऐसी किसी भी शि‍क़ायत पर तुरंत गिरफ़्तारी नहीं करेगी. महिला की शि‍क़ायत सही है या नहीं, पहले इसकी पड़ताल होगी. पड़ताल तीन लोगों की एक अलग नई समिति करेगी. यह समिति पुलिस की नहीं होगी.

इस नई समिति का नाम परिवार कल्याण समिति होगा. उसकी रिपोर्ट आने तक पुलिस को गिरफ़्तारी जैसी कार्रवाई नहीं करनी है.

वैसे निर्देश में ये भी कहा गया था कि इस समिति की रिपोर्ट को मानना शि‍क़ायत की जाँच कर रहे अफ़सर या मजिस्ट्रेट पर लाज़िमी नहीं होगा.

विदेश में रहने वालों का पासपोर्ट आमतौर पर ज़ब्त नहीं होगा. बाहर रहने वालों को पेशी पर आने से छूट दी जा सकती है. इन मामलों में वीडियो कॉन्फ़्रेंस के ज़रिए पेशी की जा सकती है.

Image copyright GETTY IMAGES दहेज क़ानून, सुप्रीम कोर्ट
लेकिन महिलाओं के हक़ के लिए बने इस क़ानून को पुरूष विरोधी बताया जाता रहा है.

इसलिए कोर्ट में ये मामला पहुँचा ताकि पुरुषों के ख़िलाफ़ इसका दुरुपयोग न हो.

महिला अधिकारों के लिए काम करने वालों ने पिछले साल के निर्देश का विरोध करते हुए दलील दी थी कि आज तक इसके आंकड़े सामने नहीं आये कि कितने मामलों में 489-ए का दुरुपयोग हुआ है.

आख़िर 498-ए क्या है?
परिवार में महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा की प्रमुख वजहों में से एक दहेज के ख़िलाफ़ है ये क़ानून. इस धारा को आम ज़बान में 'दहेज के लिए प्रताड़ना' के नाम से भी जाना जाता है.

498-ए की धारा में पति या उसके रिश्तेदारों के ऐसे सभी बर्ताव को शामिल किया गया है जो किसी महिला को मानसिक या शारीरिक नुकसान पहुँचाये या उसे आत्महत्या करने पर मजूबर करे.

दोषी पाये जाने पर इस धारा के तहत पति को अधिकतम तीन साल की सज़ा का प्रावधान है.

इसके मुताबिक़ क्रूरता का मतलब ये होगा:
दहेज क़ानून
दहेज क़ानून

सूर्य तो फिर भी उगेगा, धूप तो फिर भी खिलेगी, लेकिन मेरी बगीची की हरी-हरी दूब पर, ओस की बूंद हर मौसम में नहीं मिलेगी|
17/08/2018

सूर्य तो फिर भी उगेगा,
धूप तो फिर भी खिलेगी,
लेकिन मेरी बगीची की
हरी-हरी दूब पर,
ओस की बूंद
हर मौसम में नहीं मिलेगी|

हमारा देश प्राचीन काल से ही ऋषियों, मुनियों और साधु-सन्तु का देश रहा हैं.| आज ये कुप्रथाएं देश के उन्नति के मार्ग पर एक ...
13/06/2018

हमारा देश प्राचीन काल से ही ऋषियों, मुनियों और साधु-सन्तु का देश रहा हैं.| आज ये कुप्रथाएं देश के उन्नति के मार्ग पर एक रोड़ा हैं. देश – विदेश में प्राचीन काल से ही लड़की को विवाह में गिप्ट, उपहार आदि दिया जाता था. ऐसा नहीं की वर पक्ष लड़की के माँ – बाप पर कोई दहेज की डिमांड रख दे, प्राचीन काल में विवाह में लड़की का पिता दुल्हे को आभूषण कोई उपहार आदि चीजों के साथ अपनी कन्या भी वर पक्ष को प्रदान करता था.

परन्तु आजकल समाज में इसका उल्टा मतलब हो गया हैं. आजकल शादी से पहले सगाई में दुल्हे के पक्ष से शर्त रख दी जाती हैं की दुल्हे को विवाह में क्या-क्या चीजे चाहिए. दहेज़ माँगने के पीछे और भी कारण है जैसे – अगर कोई लड़की दिखने में ठीक ना हो, विकलांग हो, कद छोटा हो, पढ़ी-लिखी नहीं हो तथा और भी कोई कमी जिसमे लड़की के माता-पिता को लड़की की शादी कराने में कोई दिक्कत आती हैं तो वही इसी मौके का फायदा लड़के वाले उठाते हैं और मोटी रकम की डिमांड लड़की वालो के पास रख देते हैं.

जिससे लड़की के माँ-बाप को हताश होकर ज्यादा दहेज देना पडता हैं. आजकल यह भी देखा गया हैं कि लड़की अगर मायके (माँ के घर) से दहेज़ नहीं लाती हैं तो उसे ससुराल में उसका जीना हराम हो जाता हैं. ससुराल में सास, ससुर, नन्द और दुल्हन के पति को भी देखा गया हैं ये सब लोग दुल्हन के ऊपर ताने मारते हैं और उसका ससुराल में रहना मुश्किल कर देते हैं.

आजकल हमने समाज में देखा हैं कि कई जगह तो लड़का खुद लड़की को दहेज ना लाने पर तलाक तक दे देता हैं जिससे लड़की की जिंदगी खराब हो जाती हैं. आज भी भारतीय समाज में सास-बहु का झगड़ा होना आम बात हैं. झगड़े का भी यही माजरा हैं की सास अपनी बहु को बार – बार ताने मारती हैं कि तेरे बाप ने तेरे को क्या दिया. ये लोग समाज में दहेज के लोभी होते हैं. दहेज़ के कारण आज समाज में हत्याकांड हो रहे रहे हैं.

दहेज़ के लोभी यह नहीं मानते की एक तो लड़की के पिता ने अपनी जान से प्यारी लड़की को हमें दिया और ऊपर से उन पर कोई प्रेसर क्यों डाले. इनके लिये लड़की ही दहेज होना चाहिए था लेकिन ये दहेज़ को एक व्यापार और एक सौदा मान बैठे हैं. ये दहेज़ के दानवों को लड़की के साथ – साथ अच्छी संपति चाहिए.

आज समाज में दहेज एक विनाशकारी समस्या बन गई हैं. इसी दहेज के कारण एक – दुसरे के रिश्ते टूट रहे, मार – पिट तथा आत्महत्या हो रहे हैं. जिसका मुख्य कारण विवाह में दी जाने वाली दहेज (संपति) जिम्मेदार हैं. अगर इसी तरह चलता रहा तो समाज का वातावरण के साथ – साथ आने वाले समय में देश को सामाजिक कुरातियों से भी लड़ना पड़ेगा.

हम सभी लोगो को मिलकर समाज की इस बुरी कुरीति से लड़ना चाहिए और ” न दहेज़ देंगे और न दहेज़ लेंगे “ इस विचार को आत्मसात करना चाहिए. जब हम शुरुआत करेंगे तभी परिवर्तन आएगा. यह एक दिन में ठीक नहीं होने वाला. परिवर्तन तभी होगा जब हम सब लोग इसका मिलकर सामना करे और दहेज़ के खिलाफ मिलकर लड़ें. आगे इस लेख को पढ़कर आपके विचारो में कुछ परिवर्तन आया हो तो इस आर्टिकल को दुसरे लोगो के साथ फेसबुक पर जरुर शेयर करे.

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