15/06/2026
दीबाचा
असलम चिश्ती पूने (इंडिया)
डाक्टर ऋचा सिन्हा ग़ज़ल का नाम Fine Arts की दुनिया - ए - उफ़क़ पर कई हवालों से मशहूर है - उन के नाम की तरह उन का काम भी आर्टस की दुनिया में चमक दमक रखता है - उन की शख़्सियत हमा रंगी, हमा सिफ़ात की हामिल है बयक वक़्त यह शाइरा , कवयित्री भी हैं और मौलिम्मा (अध्यापिका ) भी, अदाकारा भी रक़्क़ासा भी गायिका भी एनाउंसर भी - अदाकारी, गायकी और रक़्स उन का शौक़ रहा है - शौक़ में फ़न के जलवों ने उन्हें इनआमात और एवार्डस से भी नवाज़ा - पैशे के लिहाज़ से डाक्टर ऋचा सिन्हा मौलिम्मा ( अध्यापिका) हैं - इस शोबे में उन्होंने नाम कमाया नतीजतन Best Teacher Award से भी नवाज़ी गईं - लेकिन उन की शख़्सियत का पैकर उन की शाइरी की वजह से नुमायां नज़र आता है - जिस का सबूत उन के कविताओं के मजमुए टुकड़ा टुकड़ा चांद, क्षितिज से क्षितिज तक, और गूंजती ख़ामोशियां की इशाअत और मक़बूलियत है - यह मजमुए हिंदी रस्म - उल - ख़त में शाया हुए थे - इस के इलावा मुशायरों और कवि सम्मेलनों में उन की शिरकत और Performance ने उन के शेरी किरदार को फ़ायदा पहुंचाया -
डाक्टर ऋचा सिन्हा ग़ज़ल की पैदाइश 13 अगस्त को एक मोहज़्ज़ब कायस्त घराने में केसर गंज ज़िला बहराइच उत्तर प्रदेश में हुई वालिद ( श्री सरकार स्वरूप श्रीवास्तव) और वालिदा ( श्रीमती सुरत प्यारी श्रीवास्तव)
की बहतर तरबियत में उन की शख़्सियत को जिला मिली - उन के ज़ाती ज़ौक़ - ओ - शौक़ को हौसला अफ़ज़ाई बचपन से ही नसीब हुई जिस की वजह से उन्होंने कला के मैदान में तरक़्क़ी की - आज यह किसी तआरूफ़ की किसी बेसाखी की मोहताज नहीं - अपने बल पर तरक़्क़ी करने वाली डाक्टर ऋचा सिन्हा ग़ज़ल ने गोल्डन बुक आफ़ वर्ड में अपना नाम दर्ज करवाया - ओनलाइन पोयट्री शो आन थीम रामायण के ज़रिए उन की शोहरत में चार चांद लग गए -
आला तालीम याफ़ता डाक्टर ऋचा सिन्हा ग़ज़ल जो अंग्रेज़ी से एम - ए - बी - एड - पी एच डी हैं और मुंबई के ( तिलक एजुकेशन सोसायटीज़ ) में अंग्रेज़ी की उस्तादनी हैं - उन्हें हिन्दी और उर्दू से यकसां प्यार है इस लिए दोनों ज़बानों में यह गीत, ग़ज़ल, छंद, कविता, दोहे, मुक्तक, संस्मरण, माहिया और कहानियां लिखतीं हैं और छपती रहतीं हैं - आकाश वाणी प्रसार भारती और टीवी के प्रोग्रामों में यह अपनी रचनाओं का पाठ करती रहती हैं - उन की कहानियों को कभी मेंने पढ़ा नहीं हां उन की शायरी से ख़ूब वाक़िफ़ हूं और उन की तख़लीक़ी सलाहयतों से मुतआसिर भी हूं - उन से ए सी एफ़ सी (असलम चिश्ती फ्रेंड सर्कल) पूने के आल इंडिया मुशायरे में मेरी एक मुलाक़ात भी हो चुकी है साफ़ सुथरा अदबी ज़ौक़ रखने वाली डाक्टर ऋचा सिन्हा ग़ज़ल के ख़्यालात सेहतमंद हैं तो ज़ाहिर है उन का पैश करदा अदब भी मरीज़ाना नहीं सेहतमंदाना होगा - मुझे यह जानकर ख़ुशी हुई के उन का नया मजमु -ए-कलाम "आरती है ग़ज़ल" उर्दू ज़बान में शाया हो रहा है और साथ में इस का हिन्दी एडिशन भी रोशनी में आने वाला है - इस ख़ुशी को Share करने के लिए पहले में उन के अपनी पसंद के कुछ अशआर पेश करना चाहूंगा - मुलाहिज़ा फ़रमायें -
उलझनें बनने लगी हैं जब भी पल पल की लकीर
खींच ली माथे पे मैं ने अपने संदल की लकीर
चाहती हूँ इश्क़ में जानाँ कभी गीली न हो
मैं ने आँखों मे जो खींची है ये काजल की लकीर
जो बनके साया मिरे आस पास रहता है
उसी से दिल भी मिरा बदहवास रहता है
क़दम क़दम पे जिसे करती रहती हूँ महसूस
न जाने पाके मुझे क्यूँ उदास रहता है
रंज की दर्द की इंतिहा हो गए
इश्क़ में डूब कर हम फ़ना हो गए
उनको भी शौक़ सजने सँवरने का था
इसलिए दोस्त हम आईना हो गए
यादों के अब्र छाने लगे, रात आ गई
पलकें भी कह रही हैं कि बरसात आ गई
रोने लगी है मुफ़लिसी कच्चे मकान में
ऊँची हवेलियों में जो बारात आ गई
जैसे शामिल हो सदा वो मिरी परछाई में
उसके होने का भी एहसास है तन्हाई में
पहले डरती थी,तिरे नाम से ,मंसूब हूँ अब
इन दिनों लुत्फ़ बहोत आता है रुसवाई में
रंग उभर आए मन की रंगोली में
प्रेम का आँगन भीग गया है होली में
प्रेम की पिचकारी को उठाया है ,जैसे
बैठी हो रंगों की दुल्हन डोली में
आईने से नज़र मिलाते हुए
उसको सोचा है मुस्कुराते हुए
वो नज़र आ रहा था साहिल पर
कितनी उभरी मैं डूब जाते हुए
गर इरादा है पास आने का
पहले वादा करो निभाने का
ज़िंदगी बन के पास आए हो
अब ना ढूँढो बहाना जाने का
बुझा सकते हैं दरिया प्यास मेरी
मिरी मिट्टी में इतनी तो नमी है
किसी ने दी नहीं थी जो अभी तक
अभी आवाज़ वो मैंने सुनी है
ज़माने बाद मेरा मुझ से राब्ता हुआ है
वो शख़्स मेरे लिए जैसे आईना हुआ है
इश्क़ के पहले पायदान में हूं
इन दिनों सख़्त इम्तेहान में हूं
लम्हा लम्हा सवाल करता है
में' न' और ' हां' के दरमियान में हूं
रस्म - ए - उल्फ़त हमेशा निभाते चलो
इश्क़ के लम्हे यूं ही बिताते चलो
उठ रहे हैं ग़ुरूर के शोले
आग से क्या कहेगा पानी सुन
ख़ुद ग़रज़ बन के तुम जिया न करो
हम तुम्हारे हैं मेहरबां जानां
माँ, बेटी, मौसी, मामी, बेटी सी बहु, बहना होती है
इक औरत से, पूछो घर की, ज़िम्मेदारी क्या होती है
शौक़ से बाहर, जाओ लेकिन, सब की लाज समेटे रखना
हर घर की दहलीज़ के बाहर, फैली हुई दुनिया होती है
किसी के इश्क़ का मुझ पर ख़ुमार है तारी
किसी की याद मिरे आस पास डोलती है
इन अशआर को दर्ज करने का मक़सद डाक्टर ऋचा सिन्हा ग़ज़ल की सुख़न सोच को क़ारईन पर रोशन करना है और इन अशआर में शायरा के लहजे की निशानदही करना है - उन की सोच और उन का लहजा क़ारईन की गिरफ़्त में आ जायेगा तो क़ारईन को इस किताब के पढ़ने में लुत्फ़ का एहसास होगा - और यह भी मुमकिन है के क़ारईन उन के शेरी मवाद में खोकर अपनी ज़ात की झलक देखें -
" आरती है ग़ज़ल" मजमु - ए-कलाम में मानवियत के कई पहलू हैं महब्बत, अक़ीदत, इबादत वग़ैरह और इस " वग़ैरह" को में सामईन के लिए छोड़ रहा हूं क्योंकि हर सामे हर क़ारी की पसंद अलग होती है - मेरा यह ख़्याल है के " आरती है ग़ज़ल " हर सुख़न आशना को मुतमईन करेगा - क्योंकि डाक्टर ऋचा सिन्हा ग़ज़ल के कलाम में जहां तग़ज़्ज़ुल का रंग चोखा है वहां ज़िन्दगी के मुख़्तलिफ़ रंग कलाम के एज़ल पर लफ़्ज़ों से paint किये गये हैं - इस Painting में एहसासात के रंग सच्चे और जज़्बात के रंग अच्छे नज़र आते हैं - शाइरा के तजरेबात से ज़्यादा इर्द-गिर्द के मुशाहिदात क़ारईन को सोचने पर मजबूर करते हैं -
मेरी नज़र में डाक्टर ऋचा सिन्हा ग़ज़ल असरे हाज़िर की शाइरात और शौअरा में अपना एक अलग नाम और मक़ाम रखती हैं - यक़ीन न आये तो " आरती है ग़ज़ल " का बारीक बीनी से मुतआला करें - आप भी वालेहाना तौर पर वही कहेंगे जो मेंने कहा है -
डाक्टर ऋचा सिन्हा ग़ज़ल को में तहेदिल से मुबारकबाद पेश करता हूं - और उम्मीद रखता हूं के यह अपना शेरी सफ़र जारी रखेंगीं और उर्दू - हिन्दी अदब के सरमाये में इज़ाफ़ा करेंगीं - उन्हीं के एक पुर मग़्ज़ शेर पर में अपने दीबाचे का इख़्तिताम करता हूं -
दिल-ओ- दिमाग़ से है खेलती हर इक लम्हा
बड़ी ही शोख़ बहुत ही शरारती है ग़ज़ल