18/04/2026
सितंबर 2023 में संसद ने महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) सर्व समिति से पास किया गया।
इसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह 106वाँ संविधान संशोधन बन गया।
अब ये संविधान का हिस्सा है, पर 33% आरक्षण लागू होगा, जनगणना के बाद परिसीमन होगा इसके बाद लागू होगा। पर जो लोकसभा में बिल गिरा है वो परिसीमन बिल है, जिसमें परिसीमन का आधार 2011 की जनगणना का आधार बनाया जा रहा हैं। विपक्ष इस बात से सहमत नहीं,क्योंकि विपक्ष चाहता है 2026 की जनगणना कास्ट आधार होगी जिस से ओबीसी के आंकड़े भी आ जाएंगे। फिर परिसीमन किया जाना चाहिए। इसी मतभेद में बिल 54 वोटो से गिर गया। बीजेपी अभी ही क्यों लाई इस बिल को , क्योंकि 5 राज्यों में चुनाव है, इसको चुनावी मुद्दा बनाया जा सके। अगर बीजेपी इतनी महिलाओं की फिक्र बंद है तो RSS में अभी तक कोई महिला प्रमुख क्यों नही है,
लोकसेवा की 816 सीटों की बात अमित शाह जी के तरफ से कही गई, उसका क्या आधार है, कोई समिति बनी थी , इसके लिए की कितनी सीटे बढ़ाई जाएंगी।
सिर्फ जनसंख्या के आधार पर ही सीटे बढ़ेगी तो दक्षिण के राज्यों में भयंकर विरोध होगा, क्योंकि उन्होने अच्छी नीति अपनी ओर जनसंख्या कंट्रोल किया, इतनी अच्छी जीडीपी उनकी । और दूसरी तरफ बिहार, यूपी जैसे राज्यों को फायदा होगा, क्योंकि उन्होंने जनसंख्या कंट्रोल नहीं किया, तो इसका फायदा मिलेगा। मतलब जिसने अच्छा काम किया दक्षिण के राज्यों ने तो उनकी सीटे कम होगी, ओर जिन्होंने कुछ नहीं किया उनकी सीटे बढ़ जाएगी। अ खेल इस लिए भी खेल जा रहा हैं क्योंकि उतरी राज्यों में बीजेपी मजबूत है। और साउथ में कमजोर । और फिर परिसीमन आयोग जो रिपोर्ट देगा उसको अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती, यानी उसका ही अंतिम फैसला होगा। अगर साउथ के राज्यों के साथ भेदभाव हुआ तो देश में भयंकर स्थिति होगी।
जन जन की वार्ता